मक्का और मूंग पर 0.41 फीसदी एमएसपी बढ़ोत्तरी पर भड़के किसान, बड़े आंदोलन की तैयारी!

Kharif Crops MSP Hike Updates: केंद्र ने एमएसपी बढ़ोत्तरी के ऐलान के बाद से किसान संगठनों में भारी गुस्सा है. न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फिर से विचार करने की अपील की है. वहीं, किसानों की अनदेखी नहीं करने की चेतावनी भी दी है.

नोएडा | Published: 14 May, 2026 | 03:49 PM

केंद्र सरकार ने 14 फसलों के लिए एमएसपी बढ़ोत्तरी को मंजूरी दी है. फसलों के बढ़ाए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर किसान यूनियनों और संगठनों में भारी नाराजगी है. भाकियू, भाकियू मान, भाकियू अराजनैतिक और किसान महापंचायत समेत कई किसान संगठनों ने मक्का, मूंग और धान की एमएसपी में मामूली बढ़ोत्तरी पर नाराजगी जताई है. किसान नेताओं ने कहा कि अगर इसी तरह से किसानों की अनदेखी की जाती रही तो बड़ा आंदोलन करने के लिए वे बाध्य होंगे.

मूंग-मक्का और धान के एमएसपी में मामूली बढ़ोत्तरी

केंद्र सरकार ने मूंग की MSP में भी केवल 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. पहले मूंग की MSP 8768 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 8780 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है. यह बढ़ोत्तरी केवल 0.13 फीसदी है.

मक्का की MSP को 2400 से बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है. यानी किसानों को सिर्फ 10 रुपये प्रति क्विंटल का फायदा मिलेगा. इसे अगर किलो के हिसाब से देखें तो यह बढ़ोतरी करीब 10 पैसे प्रति किलो बैठती है. वहीं, बीते साल की तुलना में यह बढ़ोत्तरी 0.41 फीसदी है.

धान के मूल्य में पिछले वर्ष की तुलना में 72 रुपए जो बीते साल के रेट से बढ़ोत्तरी दर देखें तो केवल 3 फीसदी है.

भाकियू मान ने कृषि लागत एवं मूल्य आयोग को घेरा

भाकियू (मान) के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने किसान इंडिया से कहा कि केंद्र सरकार खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया यह देश के किसानों के साथ में धोखा है. उन्होंने कहा कि कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) किसान विरोधी है. उपभोक्ता के हित को सुनिश्चित करता है. किसान की फसलें लूटने की साजिश कर रहा है CACP खाद्य सुरक्षा, जरूरी वस्तु अधिनियम के लिए काम करता है. सरकार का फैसला फैसला खेती के लिए किसी जोखिम कम नहीं है. किसान नेता गुणी प्रकाश ने कहा कि सरकार सही कीमत किसान को दे और अगर ऐसे ही किसानों की अनदेखी होती रही तो फिर से आंदोलन के लिए किसान बाध्य होंगे.

धान किसान 27 फीसदी नुकसान झेलेंगे

भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने किसान इंडिया को बताया कि खाड़ी देशों में तनाव के चलते फसलों की उत्पादन लागत में 30 फीसदी से अधिक वृद्धि हुई है. लेकिन सरकार ने धान के दाम में 3 फीसदी की बढ़ोत्तरी की है. इसका मतलब है कि किसान 27 फीसदी नुकसान में है. उन्होंने धान के एमएसपी में बढ़ोत्तरी को हास्यास्पद बताया.

उन्होंने कहा कि वर्तमान स्थिति किसान के लिए भयावह है. खाड़ी देशों में तनाव के चलते कीटनाशक, पोषक तत्वों, खरपतवारनाशक आदि उत्पादों में 30 फीसदी वृद्धि हुई है. दूसरी तरफ जलवायु परिवर्तन, अलनीनों के प्रभाव के चलते 2026-27 में उत्पादन गिरने की भारी आशंका है. किसानों के लिए यह वृद्धि पर्याप्त नहीं है. इस फैसले से चावल उत्पादक किसानों पर कर्ज का भार बढ़ेगा. उन्होंने कहा कि भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक सरकार से इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करती है.

खेती के लिए बढ़ा जोखिम – राकेश टिकैत

भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि केंद्र सरकार की ओर से खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया है, यह देश के किसानों के साथ में धोखा है. मक्का का मूल्य मात्र 10 रुपये प्रति क्विंटल और मूंग का 12 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है. देश का किसान इसी बात से सोच सकता है कि सरकार फसलों को लेकर कितनी गंभीर है. बढ़ती लागत किसान के लिए चिंता का विषय है. ऐसे में यह फैसला खेती के लिए जोखिम भरा है.

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