‘रेल रोको’ से पहले बड़ा संकेत, पंजाब में खराब गेहूं खरीदने पर विचार, FCI का प्रस्ताव तैयार
राज्य में 1 अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है. किसान आरोप लगा रहे हैं कि सख्त गुणवत्ता मानकों के कारण उनकी फसल को ‘निम्न गुणवत्ता’ बताकर खरीदा नहीं जा रहा. इसके चलते मंडियों में गेहूं के ढेर लग गए हैं और किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
Punjab wheat procurement: पंजाब में इन दिनों गेहूं खरीद को लेकर स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है. मंडियों में किसानों की लंबी कतारें लगी हैं, लेकिन सख्त गुणवत्ता मानकों के कारण उनकी फसल की खरीद नहीं हो पा रही है. इसी बीच किसानों ने ‘रेल रोको’ आंदोलन का ऐलान किया है. इस बढ़ते दबाव के बीच अब एक बड़ी राहत की उम्मीद सामने आई है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, भारतीय खाद्य निगम (FCI) के पंजाब जोनल कार्यालय ने गेहूं खरीद के गुणवत्ता मानकों में ढील देने की सिफारिश की है. यह फैसला बेमौसम बारिश से खराब हुई फसल को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.
किसानों के आंदोलन से पहले बड़ा संकेत
पंजाब में किसान 17 अप्रैल को दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक तीन घंटे का ‘रेल रोको’ आंदोलन करने जा रहे हैं. उनकी मुख्य मांग यही है कि गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी जाए, जैसा कि हरियाणा और राजस्थान में किया गया है.
FCI की यह सिफारिश किसानों की इसी मांग से जुड़ी हुई मानी जा रही है और इससे आंदोलन से पहले सरकार पर दबाव भी बढ़ा है.
1 अप्रैल से ठप पड़ी खरीद प्रक्रिया
राज्य में 1 अप्रैल से शुरू हुई गेहूं खरीद लगभग ठप जैसी स्थिति में पहुंच गई है. किसान आरोप लगा रहे हैं कि सख्त गुणवत्ता मानकों के कारण उनकी फसल को ‘निम्न गुणवत्ता’ बताकर खरीदा नहीं जा रहा. इसके चलते मंडियों में गेहूं के ढेर लग गए हैं और किसानों को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है.
देशभर में भी दिखा असर
पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश और राजस्थान देश के प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्य हैं. पंजाब में खरीद रुकने का असर पूरे देश पर पड़ा है. अप्रैल 2026 के पहले पखवाड़े में गेहूं खरीद में 69 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
FCI के आंकड़ों के अनुसार 1 अप्रैल से अब तक केवल 1.53 मिलियन टन गेहूं खरीदा गया है, जबकि इसी अवधि में पिछले साल 5.00 मिलियन टन खरीद हुई थी. इसी तरह मंडियों में आवक 3.5 मिलियन टन रही, जो पिछले साल 9.3 मिलियन टन थी.
गुणवत्ता मानकों में क्या बदलाव हो सकता है
सूत्रों के अनुसार FCI ने सिफारिश की है कि पंजाब में 20 प्रतिशत तक सिकुड़े या टूटे हुए दानों वाले गेहूं को बिना मूल्य कटौती के खरीदा जाए, जबकि अभी यह सीमा केवल 6 प्रतिशत है. इसके अलावा जिन दानों की चमक (लस्टर) कम हो गई है, उनमें 80 प्रतिशत तक ढील देने का सुझाव दिया गया है, जबकि अभी ऐसे गेहूं को स्वीकार नहीं किया जाता. साथ ही 6 प्रतिशत तक खराब या आंशिक रूप से खराब दानों को भी बिना कीमत घटाए खरीदने की सिफारिश की गई है.
हरियाणा और राजस्थान में पहले ही मिली राहत
कुछ दिन पहले ही केंद्र सरकार ने हरियाणा में गेहूं खरीद के नियमों में ढील दी थी. वहां 15 प्रतिशत तक टूटे या सिकुड़े दानों को स्वीकार करने की अनुमति दी गई है, जो पहले 6 प्रतिशत थी. साथ ही 70 प्रतिशत तक लस्टर लॉस वाले गेहूं को भी बिना कटौती के खरीदने का फैसला लिया गया है. इसी तरह की राहत पंजाब के किसान भी मांग रहे हैं.
अंतिम फैसला केंद्र सरकार के हाथ में
हालांकि FCI ने सिफारिश जरूर की है, लेकिन अंतिम निर्णय केंद्र सरकार को लेना है. खबर के अनुसार यह सिफारिश किसानों के गेहूं के नमूनों की जांच के आधार पर की गई है, जिससे यह स्पष्ट हुआ है कि बेमौसम बारिश के कारण फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है.
सरकार का बड़ा लक्ष्य और चुनौती
सरकार ने 2026-27 सीजन के लिए 30 मिलियन टन से ज्यादा गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा है. लेकिन मौजूदा हालात में अगर खरीद प्रक्रिया सुचारु नहीं होती, तो इस लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है.