बादलों के ऊपर बसा गांव, जहां बारिश छू भी नहीं पाती धरती… फिर भी होती है शानदार खेती

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां बारिश न होने के बावजूद खेती की जाती है. गांव के लोग पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाते हैं. पानी के लिए वे आधुनिक साधनों पर नहीं, बल्कि पारंपरिक समझ और अनुभव पर निर्भर हैं. ओस, धुंध और पहाड़ों से बहकर आने वाले पानी को इकट्ठा करके फसलों की सिंचाई की जाती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 12 Feb, 2026 | 04:43 PM

 Al Hutaib Village: दुनिया में बारिश को जीवन का आधार माना जाता है, लेकिन क्या आप यकीन करेंगे कि धरती पर एक ऐसा गांव भी है जहां बारिश कभी नहीं होती? यहां के लोग छत पर खड़े होकर नीचे घाटियों में गिरती बारिश को देखते हैं, बिजली चमकती है, बादल गरजते हैं, मगर उनके अपने गांव की मिट्टी तक पानी नहीं पहुंचता. यह किसी कहानी या कल्पना का हिस्सा नहीं, बल्कि हकीकत है. यह अनोखा गांव है अल हुतैब गांव, जो अपनी अजीबोगरीब भौगोलिक बनावट की वजह से पूरी दुनिया को चौंकाता है.

पहाड़ों की चोटी पर बसा एक अलग संसार

अल हुतैब गांव यमन की राजधानी सना के नजदीक ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों पर बसा हुआ है. समुद्र तल से करीब 3200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह गांव ऐसा महसूस कराता है मानो आसमान के बेहद करीब हो. यहां से नीचे झांकने पर गहरी घाटियां दिखती हैं, जिनके ऊपर बादलों की मोटी चादर छाई रहती है. गांव की ऊंचाई ही इसकी सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ा रहस्य है.

जब बारिश गांव से नीचे गिरती है

आमतौर पर बारिश वाले बादल 1500 से 2000 मीटर की ऊंचाई पर बनते हैं. अल हुतैब इससे कहीं ऊपर बसा है. नतीजा यह होता है कि जब बादल बनते हैं तो वे गांव की ऊंचाई तक पहुंच ही नहीं पाते. वे नीचे घाटियों में ही बरस जाते हैं. इसीलिए यहां के लोग कहते हैं कि “हम बारिश को देखते हैं, महसूस नहीं करते.” यह दुनिया की उन गिनी-चुनी जगहों में से एक है जहां इंसान सचमुच मौसम के ऊपर रहता है.

दिन में कई रंग बदलता मौसम

बारिश न होने का असर यहां के मौसम पर साफ दिखाई देता है. सुबह के वक्त यहां ठंड इतनी तेज होती है कि गर्म कपड़ों के बिना बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है. जैसे-जैसे सूरज ऊपर आता है, तापमान तेजी से बढ़ता है. दोपहर में यहां तेज धूप पड़ती है क्योंकि बादलों की कोई परत सूरज को रोक नहीं पाती. शाम होते-होते फिर ठंड लौट आती है. एक ही दिन में ठंड और गर्मी का यह खेल अल हुतैब को और भी अलग बनाता है.

आस्था का मजबूत केंद्र

अल हुतैब गांव सिर्फ मौसम की वजह से ही खास नहीं है, बल्कि इसका धार्मिक महत्व भी बहुत बड़ा है. यह बोहरा समुदाय के लिए एक प्रमुख तीर्थ स्थल माना जाता है. यहां तीसरे दाई अल मुतलक सैयदना हातिम बिन इब्राहिम अल हमीदी की दरगाह मौजूद है. भारत, पाकिस्तान और दक्षिण एशिया के कई देशों से श्रद्धालु कठिन रास्तों के बावजूद यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ऊंचे पहाड़ों के बीच बसा यह गांव आस्था और विश्वास का प्रतीक बन चुका है.

बिना बारिश के भी हरियाली

सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यहां बारिश न होने के बावजूद खेती की जाती है. गांव के लोग पहाड़ी ढलानों पर सीढ़ीदार खेत बनाते हैं. पानी के लिए वे आधुनिक साधनों पर नहीं, बल्कि पारंपरिक समझ और अनुभव पर निर्भर हैं. ओस, धुंध और पहाड़ों से बहकर आने वाले पानी को इकट्ठा करके फसलों की सिंचाई की जाती है. यही वजह है कि कठिन हालात के बावजूद यहां खेती जीवित है.

यमनी कॉफी की खास पहचान

अल हुतैब और इसके आसपास का इलाका अपनी बेहतरीन यमनी कॉफी के लिए जाना जाता है. यहां उगाई जाने वाली कॉफी अपने गहरे स्वाद और खुशबू के कारण दुनियाभर में पसंद की जाती है. बिना बारिश और सीमित संसाधनों के बावजूद यह इलाका क्वालिटी कॉफी उत्पादन का उदाहरण है.

कुदरत का अनोखा सबक

अल हुतैब गांव यह सिखाता है कि प्रकृति के नियम हर जगह एक जैसे नहीं होते. कहीं बारिश जीवन देती है, तो कहीं उसकी गैरमौजूदगी भी जीवन को आगे बढ़ने से नहीं रोक पाती. बादलों के ऊपर बसा यह गांव आज भी दुनिया के लिए एक रहस्य, एक चमत्कार और इंसानी जिद का प्रतीक बना हुआ है.

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