Expected increase in wheat production this qutar or year: देश का गेहूं उत्पादन 2026-27 के लिए बढ़कर रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने का अनुमान है. क्योंकि, इस बार गेहूं फसल के लिए मौसम अनुकूल रहा है और गेहूं के एमएसपी में बढ़ोत्तरी किए जाने से किसानों को ज्यादा भाव मिलने की संभावना के चलते जमकर बुवाई की गई है. वहीं, बुवाई के समय खेत में पर्याप्त नमी बनी रहने से किसान गेहूं की बुवाई के लिए प्रेरित हुए हैं. इसके चलते गेहूं का रकबा बीते साल की तुलना में 24 लाख हेक्टेयर बढ़ गया है. मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों में भी गेहूं का रकबा बढ़ा है. इसके चलते एक्सपर्ट उम्मीद कर रहे हैं कि गेहूं का कुल उत्पादन 1200 लाख टन के पार जा सकता है.
साल 2026-27 के लिए गेहूं बुवाई का रकबा कितना है, राज्यों में भी बढ़ा क्षेत्रफल
देशभर में इस सीजन जमकर किसानों के गेंहू की बुवाई की है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार 20 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय स्तर पर गेहूं का कुल रकबा 344.17 लाख हेक्टेयर (Wheat Acreage 2026-27) दर्ज किया गया है, जो बीते साल की समान अवधि में 328.04 लाख हेक्टेयर की तुलना में 24 लाख हेक्टेयर अधिक है. मध्य प्रदेश में गेहूं का रकबा इस सीजन 8 लाख हेक्टेयर बढ़ा है और राजस्थान में लगभग 4 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गेहूं की फसल ज्यादा बोई गई है. वहीं, उत्तर प्रदेश, पंजाब और बिहार में भी गेहूं की खूब बुवाई किए जाने से राष्ट्रीय स्तर पर कुल रकबे में बढ़ोत्तरी की गई है.
गेहूं उत्पादन रिकॉर्ड 1200 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंचने की संभावना
देशभर में 24 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में अधिक गेहूं की बुवाई किसानों ने की है. ऐसे में इस बार गेहूं का उत्पादन (Wheat Production) भी नए रिकॉर्ड पर पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार पिछले सीजन में अधिक बुवाई के चलते पर रिकॉर्ड 1179.4 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उत्पादन हुआ था. इस बार रकबा उससे भी ज्यादा है, जिस वजह से गेहूं का उत्पादन 1200 लाख मीट्रिक टन के पार पहुंचने की उम्मीद जताई जा रही है.
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अनुकूल मौसम के चलते गेहूं उत्पादन बढ़ने की संभावनाएं मजबूत
एक्सपर्ट के अनुसार मॉनसूनी सीजन में भरपूर बारिश होने के चलते प्रमुख गेहूं उत्पादक राज्यों को बुवाई के समय मिट्टी में पर्याप्त नमी मिली है. इसके चलते गेहूं की खूब बुवाई भी हुई है. अब फरवरी में पंजाब, हरियाणा जैसे जल्दी बुवाई वाले राज्यों में फसल पकने के चरण में है. जबकि, उत्तर प्रदेश, बिहार में गेहूं फसल में दाना भरने के चरण में है. मौसम विज्ञानियों के अनुसार जनवरी के अंतिम दिनों में हुई बारिश से गेहूं की फसल को फायदा पहुंचा है. मौसम विभाग के अनुसार फरवरी और मार्च में गेहूं के लिए सटीक मौसम रहने की संभावना है. फसल अनुकूल मौसम रहने के चलते उत्पादन ज्यादा होने को बल मिला है.
गेहूं के भाव में बढ़ोत्तरी और बोनस की घोषणाएं
केंद्र सरकार ने मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 160 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है, जो पिछले साल 2425 प्रति क्विंटल था. मध्य प्रदेश सरकार ने पिछले साल गेहूं किसानों को बोनस (Wheat Bonus) दिया था. इस बार भी मध्य प्रदेश के किसानों को ज्यादा 2600 रुपये प्रति क्विंटल का भाव (Wheat Mandi Rates) मिलेगा. इसी तरह छत्तीसगढ़, राजस्थान, ओडिशा समेत कई राज्य अपने किसानों को गेहूं की खरीद पर बोनस देते हैं. ऐसे में पहले केंद्र से एमएसपी बढ़ोत्तरी और फिर राज्यों से बोनस मिलने की सकारात्मक स्थितियों ने किसानों को गेहूं उगाने के लिए प्रोत्साहित किया है.
पिछले साल गेहूं, चावल और दालों के उत्पादन आंकड़े
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने 2024-25 के फसल उत्पादन के अंतिम आंकड़े जारी करते हुए कहा कि इस साल देश में खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है. उन्होंने कहा कि इसी तरह गेहूं का उत्पादन भी बढ़कर 1179.45 लाख टन तक पहुंच गया, जो पिछले साल से 1,133 लाख मीट्रिक टन से 46.53 लाख मीट्रिक टन अधिक है. मंत्री ने कहा कि पिछले 10 सालों में खाद्यान्न उत्पादन में सबसे बड़ी वृद्धि दर्ज हुई है. 2015-16 के 2515.4 लाख टन से बढ़कर अब यह 3577.3 लाख टन हो गया है.
चावल का उत्पादन बढ़कर 1501.84 लाख टन हो गया, जो पिछले साल से 123.59 लाख टन ज्यादा है. उन्होंने कहा कि इसके अलावा मूंग का उत्पादन 42.44 लाख टन, सोयाबीन 152.68 लाख टन और मूंगफली 119.42 लाख टन तक पहुंच गया है. जबकि, मक्का और श्री अन्न (मिलेट्स) का उत्पादन भी बढ़कर क्रमशः 434.09 लाख टन और 185.92 लाख टन होने का अनुमान है, जो पिछले साल से काफी ज्यादा है.