Kisan Credit Card scheme: खेती अब पहले जैसी आसान नहीं रही. बीज, खाद और दवाइयों के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, मौसम कब क्या करवट ले ले इसका भरोसा नहीं, और बाजार में फसल के दाम भी तय नहीं रहते. ऐसे हालात में किसान के लिए सबसे बड़ी जरूरत होती है समय पर और सही मात्रा में कर्ज मिलना, वो भी आसान शर्तों पर. इसी जरूरत को समझते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने किसान क्रेडिट कार्ड यानी KCC योजना को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया है.
6 फरवरी 2026 को रिजर्व बैंक ने अपनी विकासात्मक और नियामक नीतियों के तहत किसान क्रेडिट कार्ड के लिए नए और संशोधित नियमों का मसौदा जारी किया है. इसका मकसद खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों के लिए कर्ज की व्यवस्था को ज्यादा सरल, एक जैसी और आज की जरूरतों के मुताबिक बनाना है.
क्यों जरूरी हो गया केसीसी में बदलाव
बीते कुछ सालों में खेती का तरीका काफी बदल गया है. अब किसान सिर्फ गेहूं और धान तक सीमित नहीं हैं. वे सब्जी, फल, दलहन-तिलहन, पशुपालन, मत्स्य पालन और जैविक खेती जैसी गतिविधियों की ओर भी बढ़ रहे हैं. लेकिन किसान क्रेडिट कार्ड के पुराने नियम कई बार इन नई जरूरतों के हिसाब से नहीं थे. अलग-अलग बैंकों के नियम अलग होने से किसानों को बार-बार दिक्कतों का सामना करना पड़ता था. इसी परेशानी को दूर करने और खेती की बदलती तस्वीर के मुताबिक कर्ज व्यवस्था को ढालने के लिए केसीसी नियमों में बदलाव जरूरी हो गया था.
अब सभी बैंकों में लगभग एक जैसे नियम
नए मसौदे के तहत अब वाणिज्यिक बैंक, स्मॉल फाइनेंस बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक और ग्रामीण सहकारी बैंक सभी के लिए केसीसी के नियमों को एक जैसा करने का प्रस्ताव है. इसका सीधा फायदा किसानों को मिलेगा. वे किसी भी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड लें, उन्हें लगभग एक जैसी सुविधाएं, शर्तें और प्रक्रिया मिलेगी. इससे भ्रम कम होगा और कर्ज लेना आसान और भरोसेमंद बनेगा.
फसल के हिसाब से तय होगी कर्ज की अवधि
नई व्यवस्था में फसलों की अवधि को साफ तौर पर महीनों में बांटा गया है. कम समय में तैयार होने वाली फसलों के लिए 12 महीने और ज्यादा समय लेने वाली फसलों के लिए 18 महीने की अवधि तय की गई है. इससे कर्ज चुकाने का समय सीधे फसल के चक्र से जुड़ जाएगा. किसान को अब फसल बिकने से पहले कर्ज लौटाने का दबाव नहीं झेलना पड़ेगा.
किसान क्रेडिट कार्ड अब ज्यादा समय तक मान्य
लंबी अवधि वाली खेती और बागवानी को ध्यान में रखते हुए केसीसी की कुल अवधि बढ़ाकर छह साल करने का प्रस्ताव है. इससे किसानों को बार-बार कार्ड नवीनीकरण कराने या नए कागज बनवाने की झंझट से राहत मिलेगी. एक बार कार्ड मिलने के बाद किसान लंबे समय तक उसका इस्तेमाल कर सकेंगे.
खेती की असली लागत के अनुसार मिलेगा कर्ज
नए नियमों में इस बात पर खास ध्यान दिया गया है कि किसान को उसकी फसल की वास्तविक लागत के हिसाब से ही कर्ज मिले. इसके लिए केसीसी की सीमा को हर फसल मौसम के लिए तय ‘स्केल ऑफ फाइनेंस’ से जोड़ा गया है. इससे न तो किसान को कम कर्ज मिलने की परेशानी होगी और न ही जरूरत से ज्यादा उधार लेने का खतरा रहेगा.
आधुनिक खेती के खर्च भी होंगे शामिल
आज की खेती में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है. इसी को देखते हुए नई केसीसी योजना में मिट्टी जांच, मौसम की सटीक जानकारी, जैविक खेती या अच्छी कृषि पद्धतियों के प्रमाणन जैसे खर्चों को भी कर्ज में शामिल किया गया है. इन खर्चों को खेती से जुड़े संसाधनों की मरम्मत और रखरखाव के लिए तय 20 प्रतिशत अतिरिक्त राशि के भीतर रखा गया है. इससे किसान नई तकनीक अपनाकर बेहतर और टिकाऊ खेती कर सकेंगे.
किसानों को सुझाव देने का भी मौका
रिजर्व बैंक ने इन नियमों को अंतिम रूप देने से पहले सभी संबंधित पक्षों और आम लोगों से सुझाव मांगे हैं. किसान, बैंक या अन्य हितधारक 6 मार्च 2026 तक अपनी राय दे सकते हैं. इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल और ईमेल के जरिए फीडबैक भेजने की सुविधा दी गई है.
किसानों के लिए क्या बदलेगा
संशोधित किसान क्रेडिट कार्ड योजना से खेती को ज्यादा व्यवस्थित, आधुनिक और टिकाऊ बनाने में मदद मिलेगी. किसानों को समय पर पर्याप्त कर्ज मिलेगा, प्रक्रिया आसान होगी और तकनीक अपनाने में आर्थिक सहारा मिलेगा. कुल मिलाकर, यह बदलाव किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम कदम साबित हो सकता है.