सेब के बाग में फैला अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट बीमारी, पैदावार हो सकती है प्रभावित.. किसानों की बढ़ी टेंशन

हिमाचल प्रदेश में सेब बागों में अल्टरनेरिया और मार्सोनिना फंगल रोग बढ़ रहे हैं. किसानों को बीमारियों की पहचान, रोकथाम और प्रबंधन की जानकारी देने के लिए शिमला, किन्नौर, चंबा, कुल्लू और मंडी में आठ वैज्ञानिक टीमों द्वारा सप्ताह भर फील्ड जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है.

Kisan India
नोएडा | Published: 11 Feb, 2026 | 10:30 PM

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश में सेब के बागों में अल्टरनेरिया लीफ स्पॉट और मार्सोनिना लीफ ब्लॉच जैसी फंगल बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है. इससे पैदावार में गिरावट आने का डर सता रहा है. ऐसे में बागवानी विशेषज्ञों ने व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया है. यह अभियान मॉनसून से लगभग चार महीने पहले शुरू किया गया है, क्योंकि यह समय इन बीमारियों के फैलने के लिए सबसे अनुकूल होता है. यह सप्ताह भर चलने वाला अभियान शिमला, किन्नौर, चंबा, कुल्लू और मंडी जिलों में 19 फरवरी तक चलेगा. इसका उद्देश्य किसानों को बीमारियों की पहचान, रोकथाम और एकीकृत रोग प्रबंधन के बारे में जानकारी देना है, ताकि टिकाऊ सेब उत्पादन बढ़ाया जा सके और बागवानों की आमदनी सुरक्षित रहे.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल में शिमला सेब उत्पादनों  में सबसे बड़ा उत्पादक जिला है, इसके बाद किन्नौर का नंबर आता है. डॉ. वाईएस परमार विश्वविद्यालय ऑफ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री (UHF), नौन, क्षेत्रीय बागवानी अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र (KVKs) और राज्य बागवानी विभाग के विशेषज्ञों की कम से कम आठ वैज्ञानिक टीमों का गठन किया गया है. ये टीमें 19 फरवरी तक शिमला, कुल्लू, किन्नौर, चंबा और मंडी के प्रमुख सेब उत्पादक जिलों का दौरा करेंगी, जहां वे फील्ड विजिट, किसान बैठकें और ऑन-साइट डेमोंस्ट्रेशन आयोजित करेंगी.

फल छोटे होते हैं और उत्पादन में भारी कमी आती है

वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. उषा शर्मा ने कहा कि अल्टरनेरिया और मार्सोनिना फंगल बीमारियां विशेषकर जून से अगस्त के मॉनसून महीनों में बढ़ती गर्मी और आर्द्रता में सेब के पत्तों पर हमला करती हैं. हाल के वर्षों में ये बीमारियां हिमाचल, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड के सेब उत्पादक क्षेत्रों में गंभीर खतरा बन गई हैं, जिससे पत्तियां समय से पहले गिरती हैं, फल छोटे होते हैं और उत्पादन में भारी कमी आती है.

बढ़ी आर्द्रता फंगल रोग फैलने के लिए अनुकूल हो सकती है

सेब उत्पादक हरिचंद रूच ने कहा कि पिछले तीन साल में इन बीमारियों के तेजी से फैलने के कारण किसानों को भारी नुकसान हुआ है. खासकर जब तापमान 22°C से 28°C के बीच और बारिश के दौरान आर्द्रता अधिक होती है. उनका कहना है कि समय पर कीटनाशक छिड़काव, गुणवत्ता वाले फंगिसाइड और जैविक एंटी-फंगल उपाय ही इसका प्रभावी समाधान हैं. विशेषज्ञों ने कहा कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हाल ही में हुई भारी बर्फबारी ने मिट्टी में नमी बनाए रखने में मदद की है, जो पेड़ों की सेहत के लिए जरूरी है. लेकिन उन्होंने चेताया कि मौसम के बाद के दौर में बागों में बढ़ी आर्द्रता फिर से फंगल रोग फैलने के लिए अनुकूल हो सकती है.

चार टीमों ने फील्ड आउटरीच अभियान शुरू किया

शिमला जिले में ही मंगलवार को चार टीमों ने फील्ड आउटरीच अभियान शुरू किया. उन्होंने बाघी, रत्नारी, कालबोग, शीलघाट, नक्यारी, चियोग और कंडरू जैसे क्षेत्रों का दौरा किया, और आने वाले सप्ताह में और गांवों में भी दौरे किए जाएंगे. इसी तरह का कार्यक्रम किन्नौर के निचार और सुंगरा, चंबा के भरमौर, कुल्लू की गर्सा वैली और मंडी के सांगलवाड़ा में भी आयोजित किया गया, और आगे और दौरे तय हैं.

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Published: 11 Feb, 2026 | 10:30 PM

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