खाद बांटने में DM की मनमानी पर हाईकोर्ट सख्त, DAP वितरण को लेकर दिया बड़ा फैसला!

DAP खाद की कमी से जूझ रही मिर्जापुर की कंपनी को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है. अदालत ने कहा कि डीएम को खाद वितरण की निगरानी का वैधानिक अधिकार नहीं है. 100 टन मांग पर सिर्फ 45 टन खाद मिलने के बाद कोर्ट ने बची DAP तुरंत देने का आदेश दिया.

नोएडा | Published: 31 Aug, 2026 | 11:56 AM

DAP Fertilizer: खाद वितरण की मौजूदा व्यवस्था और जिला प्रशासन की भूमिका को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. अदालत ने स्पष्ट किया है कि फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 के तहत जिला मजिस्ट्रेट यानी डीएम को खाद के वितरण की निगरानी करने वाली अथॉरिटी के रूप में काम करने का कोई कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं है. यह टिप्पणी न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने मिर्जापुर की मड़िहान एग्रो फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड की याचिका पर सुनवाई के दौरान की.

100 टन डीएपी मांगी, मिली सिर्फ 45 टन खाद

पूरा मामला खरीफ सीजन  में डीएपी खाद की कम आपूर्ति से जुड़ा है. याचिकाकर्ता कंपनी ने अपनी फसलों के लिए 100 टन डीएपी खाद की मांग की थी, लेकिन उसे केवल 45 टन डीएपी ही उपलब्ध कराई गई. कंपनी की ओर से अदालत में कहा गया कि खाद की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका है. याचिकाकर्ता ने हाईकोर्ट से मांग की थी कि उसे आवश्यक मात्रा में डीएपी खाद की आपूर्ति सुनिश्चित कराने के लिए उचित आदेश दिया जाए. मामले की सुनवाई के दौरान खाद वितरण में जिला प्रशासन की भूमिका भी अदालत के सामने आई.

डीएम ने हलफनामे में बताई अपनी कानूनी सीमा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार मामले में मिर्जापुर के जिला मजिस्ट्रेट ने अदालत में व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल किया. कोर्ट के अनुसार, डीएम ने अपने हलफनामे में स्वीकार किया कि फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर, 1985 के तहत उन्हें खाद के वितरण  की निगरानी करने या इस संबंध में कृषि उपनिदेशक को निर्देश देने का अधिकार नहीं है. हालांकि, डीएम ने बताया कि कृषि विभाग के प्रधान सचिव की ओर से जारी प्रशासनिक निर्देशों के आधार पर डीएम की अध्यक्षता में एक जिला स्तरीय समिति गठित की गई थी. इसी समिति के माध्यम से वह खाद वितरण से जुड़े कार्यों में भूमिका निभा रहे थे.

प्रशासनिक पत्रों की वैधानिकता पर कोर्ट ने उठाए सवाल

अदालत ने कृषि विभाग की ओर से 10 मार्च और 23 जुलाई 2026 को जारी किए गए पत्रों को भी प्रथम दृष्टया कानूनी अधिकार के बिना जारी माना. कोर्ट ने साफ किया कि केवल प्रशासनिक निर्देश या पत्र जारी होने से डीएम को फर्टिलाइजर (कंट्रोल) ऑर्डर के तहत खाद वितरण की निगरानी  करने की वैधानिक शक्ति हासिल नहीं हो जाती. इस टिप्पणी के साथ अदालत ने खाद वितरण व्यवस्था में प्रशासनिक अधिकार और कानूनी अधिकार के बीच अंतर को भी स्पष्ट किया है. मामले में डीएम की भूमिका को लेकर दाखिल हलफनामे को भी कोर्ट ने महत्वपूर्ण माना.

बची हुई डीएपी तुरंत देने का सख्त आदेश

हाईकोर्ट ने कृषि उपनिदेशक और जिला कृषि अधिकारी को निर्देश  दिया कि याचिकाकर्ता कंपनी को पहले उपलब्ध कराई गई मात्रा के बाद बची हुई डीएपी खाद की आपूर्ति तुरंत की जाए. अदालत ने कहा कि कंपनी को उसकी मांग के अनुरूप उपलब्ध शेष खाद देने की कार्रवाई की जानी चाहिए. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि संबंधित अधिकारी शेष डीएपी की आपूर्ति करने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें इस संबंध में हलफनामा दाखिल करना होगा और खाद उपलब्ध नहीं कराने के ठोस कारण बताने होंगे. इस मामले में हाईकोर्ट की टिप्पणी खाद वितरण व्यवस्था में अधिकारियों की कानूनी शक्तियों और प्रशासनिक निर्देशों की सीमा को लेकर महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

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