देशभर के किसान इन दिनों नैनो यूरिया की जबरन बिक्री से परेशान हैं. एक तरफ खेती की लागत बढ़ती जा रही है, दूसरी तरफ उर्वरक विक्रेता किसानों को मजबूर कर रहे हैं कि वे न चाहते हुए भी नैनो यूरिया और बायो स्टिमुलेंट्स की बोतलें खरीदें. अब इस मुद्दे पर किसान संगठनों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधा हस्तक्षेप करने की अपील की है.
“घर में बोतलों के ढेर लग गए हैं”
बिजनेस लाइन की खबर के मुताबिक, किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने पीएम को लिखे पत्र में कहा है कि ग्रामीण इलाकों में किसानों के घरों में नैनो यूरिया की बोतलों के ढेर लग चुके हैं. किसानों को जबरन ये बोतलें खरीदने के लिए कहा जाता है, भले ही उन्हें इसकी जरूरत न हो.
रामपाल जाट ने आरोप लगाया कि सहकारी संस्थाएं और लाइसेंसधारी खुदरा विक्रेता सब्सिडी वाले यूरिया और डीएपी के साथ नैनो उर्वरकों की जबरन टैगिंग (जोड़कर बेचना) कर रहे हैं.
सरकारी सर्कुलर ने पुष्टि की
21 जुलाई को उर्वरक विभाग द्वारा जारी एक सर्कुलर में माना गया है कि कंपनियों द्वारा नैनो यूरिया की जबरन बिक्री की शिकायतें लगातार मिल रही हैं. हालांकि, किसान नेता जाट का कहना है कि शिकायतें मिलने के बावजूद अब तक किसी भी कंपनी पर कार्रवाई नहीं की गई है. उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अक्टूबर 2022 में उन्होंने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) में शिकायत की थी, लेकिन आज तक कोई जांच शुरू नहीं हुई.
कृषि मंत्री ने की थी हेल्पलाइन की घोषणा
16 जुलाई को कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों की शिकायतों के लिए एक हेल्पलाइन शुरू करने का वादा किया था, ताकि टैगिंग जैसी समस्याओं पर सीधे कार्रवाई हो सके. लेकिन जमीन पर इसका कोई असर अब तक नहीं दिख रहा है.
उत्पादन बढ़ा, मांग नहीं
वर्तमान में देश में 7 नैनो यूरिया प्लांट चालू हैं, जिनकी सालाना क्षमता 27.22 करोड़ बोतल (500ml) है. इसके अलावा तीन नैनो डीएपी प्लांट भी चल रहे हैं, और तीन और प्लांट बनने की प्रक्रिया में हैं. इससे कुल उत्पादन क्षमता बढ़कर 51.86 करोड़ बोतल सालाना हो जाएगी. सरकार राज्यों से कह रही है कि वे किसानों को नैनो उर्वरकों के फायदे बताएं, लेकिन जबरन बिक्री से किसानों का भरोसा डगमगा रहा है.
क्या चाहिए किसानों को?
- नैनो उर्वरकों की जबरन बिक्री रोकी जाए
- दोषी खुदरा विक्रेताओं पर सख्त कार्रवाई हो
- किसानों को निःशुल्क विकल्प और जानकारी दी जाए
- हेल्पलाइन और निगरानी तंत्र जल्द चालू किया जाए