देश के प्रमुख गन्ना और चीनी उत्पादक राज्यों में शामिल कर्नाटक के गन्ना किसानों को राज्य सरकार ने प्रोत्साहन राशि देने का वादा पूरा किया है. राज्य के चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल विधानसभा में मंगलवार को बताया कि राज्य के किसानों को 100 रुपये प्रति टन के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दे दी गई है. यह राशि दो बार में किसानों को 50 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से दी गई है. इसके अलावा शुगर मिलर्स को भी प्रोत्साहन राशि भेजी गई है. उन्होंने बताया कि चीनी के एमएसपी में 7 साल से बढ़ोत्तरी नहीं हुई है. इससे चीनी मिलों पर वित्तीय बोझ बढ़ गया है. राज्य सरकार ने यह बोझ कम करने के लिए प्रोत्साहन राशि मिलर्स को दी है. लेकिन, उन्होंने कहा कि केंद्र को चीनी का एमएसपी बढ़ाना होगा, ताकि चीनी उद्योग को बिना नुकसान के चलाने में कोई दिक्कत न हो.
कर्नाटक ने गन्ना किसानों को 100 रुपये टन की मदद का वादा पूरा किया
कर्नाटक के चीनी मंत्री शिवानंद पाटिल ने विधान परिषद के शून्यकाल में सवालों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य सरकार ने गन्ने के किसानों की मदद के लिए कई कदम उठाए हैं और अतिरिक्त वित्तीय सहायता देने का अपना वादा पूरा किया है. उन्होंने जोर देकर कहा कि इस साल ज्यादातर किसान संतुष्ट हैं. उन्होंने कहा कि सरकार ने किसानों से जुड़ी कई मांगों पर पहले ही काम शुरू कर दिया है और किसानों और चीनी मिलों, दोनों के लिए और ज्यादा मदद के उपायों पर विचार कर रही है.
चीनी मिलर्स को 50 रुपये प्रति टन की प्रोत्साहन राशि दी
मंत्री ने कहा कि कर्नाटक के इतिहास में अगर किसी सरकार ने गन्ना किसानों की दो बार मदद की है, तो वह सिद्धारमैया की सरकार है. इस बार भी हमने सरकार की तरफ से 50 रुपये प्रति टन और मिल मालिकों की तरफ से 50 रुपये प्रति टन देने का वादा किया था, और हमने वह वादा पूरा किया है. उन्होंने कहा कि किसान किसी परेशानी में नहीं हैं. बल्कि, इस साल ज्यादा गन्ना किसान संतुष्ट हैं. उन्होंने आगे कहा कि सरकार उनकी भलाई पक्की करने के लिए अपने प्रयास जारी रखेगी.
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चीनी मिलों को राहत देने पर विचार चल रहा
मंत्री ने कहा कि सरकार ने चीनी मिल मालिकों की चिंताओं को दूर करने के लिए भी कदम उठाए हैं. चीनी मिलों के साथ सह उत्पादन (cogeneration) के लिए बिजली खरीद समझौते (PPAs) कुछ मामलों में पहले रिन्यू नहीं किए गए थे, क्योंकि उस समय सस्ती पवन और सौर ऊर्जा उपलब्ध थी. उन्होंने कहा कि कुछ PPAs रद्द कर दिए गए हैं, जबकि कुछ अभी भी जारी हैं. हम इसकी समीक्षा करने और शायद अगले साल नए PPAs करने पर विचार कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि ‘ओपन एक्सेस’ (खुली पहुंच) की सुविधा से मिलों को दूसरे राज्यों में बिजली बेचने की अनुमति मिल जाती है, जहां बिजली की दरें ज्यादा होती हैं.
चीनी के बिक्री मूल्य को बढ़ाए केंद्र सरकार
केंद्र सरकार के दखल की जरूरत वाले मुद्दों पर रोशनी डालते हुए पाटिल ने कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद 2019 के बाद से चीनी के लिए न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में कोई बदलाव नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि हमने अलग-अलग कीमतें तय करने का सुझाव दिया है कि एक जरूरी उपभोग के लिए और दूसरी औद्योगिक इस्तेमाल के लिए. उन्होंने इसके पीछे पेय पदार्थ बनाने वाली कंपनियों की ओर से चीनी के बड़े पैमाने पर इस्तेमाल का हवाला दिया.
इथेनॉल सब्सिडी देने से उत्पादन बढ़ा पर केंद्र खरीद कम कर रहा
इथेनॉल के बारे में उन्होंने कहा कि जहां छह फीसदी ब्याज सब्सिडी जैसे प्रोत्साहन दिए गए थे, वहीं उत्पादन क्षमता पर नियमों की कमी के कारण क्षमता से ज्यादा उत्पादन होने लगा है. उन्होंने कहा कि उत्पादन का केवल 10 से 13 फीसदी ही खरीदा जा रहा है, जिससे कारखाने आर्थिक रूप से घाटे में चल रहे हैं. मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने 6 और 8 नवंबर 2025 को केंद्र सरकार को पत्र लिखा था, और एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी से भी मुलाकात की थी, ताकि चीनी के MSP में संशोधन और इथेनॉल की ज्यादा खरीद या बेहतर कीमतों की मांग की जा सकें. उन्होंने कहा कि वह विपक्ष के सदस्यों सहित एक प्रतिनिधिमंडल के साथ इस मामले को केंद्र सरकार के सामने उठाया जा सके.