भारत-चीन में बड़ा ट्रेड विवाद! GMOs के आरोप से हिला चावल एक्सपोर्ट, 70 खेप रिजेक्ट
India-China Rice Dispute: भारत और चीन के बीच चावल को लेकर एक नया विवाद सामने आया है. चीन भारत से भेजे जा रहे नॉन-बासमती चावल की कई खेपों को यह कहकर वापस कर रहा है कि उनमें GMO (जेनेटिकली मॉडिफाइड) होने का शक है. हालांकि ICAR और भारत सरकार ने साफ किया है कि देश में GM चावल की खेती नहीं होती.
Non-Basmati Rice Export: भारत से भेजे जा रहे नॉन-बासमती चावल को लेकर चीन और भारत के बीच तनाव बढ़ गया है. चीन कई बार भारतीय चावल की खेप यह कहकर वापस कर रहा है कि उनमें GMOs (जेनेटिकली मॉडिफाइड चीजें) होने का शक है. हाल ही में चीन ने 4-5 और शिपमेंट भी इसी वजह से रिजेक्ट कर दी हैं. इससे पहले मार्च में भी 3 खेप वापस भेजी गई थीं. अब तक करीब 70 भारतीय चावल की खेप चीन द्वारा अस्वीकार की जा चुकी हैं, जिससे निर्यात कारोबार पर असर पड़ रहा है.
भारत का स्पष्ट जवाब
मार्च में चीन ने भारत से भेजी गई तीन चावल की खेपों को यह कहकर वापस कर दिया था कि उनमें GMO होने का शक है. इसके बाद 30 अप्रैल को पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने एक आधिकारिक नोट जारी कर साफ किया कि भारत में किसी भी जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल को मंजूरी नहीं दी गई है. वहीं 23 अप्रैल को ICAR (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) ने भी पुष्टि की है कि देश में जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल की खेती नहीं होती. उन्होंने बताया कि कृषि मंत्रालय ने देश में किसी भी GM चावल की व्यावसायिक खेती की अनुमति नहीं दी है.
चीन पर उठे सवाल
बिजनेस लाइन की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि चीन इस तरह के आरोप जानबूझकर लगा रहा है ताकि भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नुकसान पहुंचाया जा सके. यह भी बताया जा रहा है कि चीन खुद जेनेटिकली मॉडिफाइड चावल की खेती करता है, लेकिन भारत के उत्पादों पर सवाल उठा रहा है, जिससे इस विवाद पर और सवाल खड़े हो रहे हैं.
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व्यापार पर दिखने लगा असर
इस विवाद का असर भारत के चावल निर्यात पर भी साफ दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अब तक करीब 70 भारतीय चावल की खेपों को चीन ने वापस कर दिया है. खास बात यह है कि इन शिपमेंट्स की जांच चीन की सरकारी कंपनी चाइना सर्टिफिकेशन एंड इंस्पेक्शन ग्रुप की भारत में मौजूद एजेंसी पहले ही कर चुकी थी. लगातार हो रही कार्रवाई के बाद कई निर्यातक सतर्क हो गए हैं और करीब 200 कंटेनरों की शिपमेंट फिलहाल रोक दी गई है. मार्च में चीन ने GMO होने के आरोप में भारत की तीन कंपनियों के आयात लाइसेंस भी सस्पेंड कर दिए थे.
विशेषज्ञों की अलग-अलग राय
विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला सिर्फ तकनीकी नहीं है, इसके पीछे व्यापार से जुड़ी रणनीति भी हो सकती है. कुछ व्यापारियों का मानना है कि चीन भारत की बढ़ती कृषि प्रतिस्पर्धा को कम करने की कोशिश कर रहा है. वहीं कुछ विशेषज्ञ इसे भविष्य की व्यापार बातचीत में दबाव बनाने की रणनीति भी मानते हैं.
भारत और चीन के बीच इस मुद्दे पर बातचीत भी हुई है, लेकिन अभी तक चीन यह स्पष्ट नहीं कर पाया है कि वह किस आधार पर भारतीय चावल को जेनेटिकली मॉडिफाइड बता रहा है. इससे स्थिति और जटिल होती जा रही है.