FAO Agricola Medal 2026: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इटली दौरे के दौरान भारत की खेती और पारंपरिक अनाजों की खास झलक देखने को मिली. FAO मुख्यालय में पीएम मोदी ने संगठन के प्रमुख को भारत के अलग-अलग राज्यों के मशहूर चावल और मोटे अनाज (मिलेट्स) उपहार में दिए. इन उपहारों के जरिए भारत ने दुनिया को अपनी पारंपरिक खेती, पोषण से भरपूर अनाज और कृषि संस्कृति के बारे में बताया. इसे भारत की कृषि ताकत और खाने-पीने की विविधता को दुनिया के सामने दिखाने की एक खास पहल माना जा रहा है.
भारत के अलग-अलग राज्यों के खास चावल बने आकर्षण
प्रधानमंत्री मोदी ने FAO महानिदेशक को देश के कई प्रसिद्ध और पारंपरिक चावल भेंट किए. इनमें:
- केरल का रेड राइस (मट्टा चावल)
- पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल
- इंडो-गंगा क्षेत्र का बासमती चावल
- असम का जोहा चावल
- उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल
शामिल थे.
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इन सभी चावलों की अपनी अलग पहचान, स्वाद और पोषण विशेषताएं हैं, जो भारत की कृषि विविधता को दर्शाती हैं.
केरल का रेड राइस और गोविंदभोग चावल क्यों खास?
केरल का रेड राइस अपने लाल-भूरे रंग और मोटे दानों की वजह से काफी मशहूर है. इसमें फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन B6 अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं, इसलिए इसे सेहत के लिए फायदेमंद माना जाता है. इस खास चावल को GI टैग भी मिला हुआ है.
वहीं, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल अपनी शानदार खुशबू और हल्की मिठास के लिए जाना जाता है. इसका दाना छोटा होता है और इसे खासकर पायेश, खिचड़ी और कई पारंपरिक बंगाली व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है.
बासमती और काला नमक चावल की वैश्विक पहचान
बासमती चावल अपनी खास खुशबू की वजह से पूरी दुनिया में बेहद मशहूर है. पकने के बाद इसके दाने लंबे और नरम हो जाते हैं, इसलिए इसे ‘खुशबू की रानी’ भी कहा जाता है. यही खासियत इसे विदेशों में भी काफी लोकप्रिय बनाती है. वहीं, उत्तर प्रदेश का काला नमक चावल, जिसे ‘बुद्धा राइस’ भी कहा जाता है, सेहत के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है. इसमें आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट अच्छी मात्रा में पाए जाते हैं. इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी कम होता है, इसलिए इसे स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर चावल माना जाता है.
मिलेट्स को भी मिला खास स्थान
PM मोदी को मिला FAO का ‘एग्रीकोला मेडल’
इस दौरान FAO ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को साल 2026 का प्रतिष्ठित ‘एग्रीकोला मेडल’ दिया. यह सम्मान खाद्य सुरक्षा, पोषण और लोगों के बेहतर जीवन के लिए किए गए खास कामों पर दिया जाता है.
प्रधानमंत्री मोदी ने यह सम्मान देश के किसानों, पशुपालकों, मछुआरों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की मजबूत खाद्य व्यवस्था और टिकाऊ विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता को दर्शाता है.
दुनिया के सामने मजबूत हुई भारत की कृषि पहचान
प्रधानमंत्री मोदी ने कृषि को “धरती मां और इंसान के बीच पवित्र रिश्ता” बताया. खास बात यह रही कि पिछले 30 सालों में पहली बार किसी भारतीय प्रधानमंत्री ने FAO मुख्यालय का दौरा किया है. इसे इस बात का संकेत माना जा रहा है कि भारत अब सिर्फ खेती में ही नहीं, बल्कि दुनिया की खाद्य सुरक्षा और पोषण से जुड़े मुद्दों में भी अहम भूमिका निभा रहा है.
FAO मुख्यालय में भारतीय चावल और मिलेट्स की प्रस्तुति ने दुनिया को भारत की कृषि विविधता और पौष्टिक अनाजों के बारे में बताया. वहीं पीएम मोदी को मिला ‘एग्रीकोला मेडल’ भारत की कृषि नीतियों, किसानों की मेहनत और खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए कामों को मिली बड़ी अंतरराष्ट्रीय पहचान माना जा रहा है.