प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने इटली के रोम स्थित अपने मुख्यालय में वर्ष 2026 का ‘एग्रीकोला मेडल’ देकर सम्मानित किया. यह सम्मान उन्हें खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में उनके योगदान और नेतृत्व के लिए दिया गया. इस मौके पर पीएम मोदी ने कहा कि आज तकनीक भारतीय कृषि के लिए एक नई ताकत बनकर उभर रही है. खेती अब धीरे-धीरे पारंपरिक तरीके से आगे बढ़कर डिजिटल और स्मार्ट सिस्टम की ओर जा रही है.
पीएम मोदी ने कहा कि एग्री स्टैक जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई आधारित सलाह प्रणाली, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और सेंसर आधारित मशीनें किसानों को डेटा के आधार पर खेती करने में मदद कर रही हैं. इससे खेती ज्यादा सटीक और आसान होती जा रही है. उन्होंने कहा कि आज गांव का छोटा किसान भी मोबाइल फोन के जरिए मौसम की जानकारी, फसल से जुड़ी सलाह और बाजार के दाम आसानी से जान पा रहा है. इससे किसानों को सही समय पर फैसले लेने में मदद मिल रही है और खेती अधिक आधुनिक बन रही है.
पुरस्कार देश के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया
खास बात यह है कि सम्मान प्राप्त करने के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने यह पुरस्कार देश के किसानों और कृषि वैज्ञानिकों को समर्पित किया. उन्होंने कहा कि यह सम्मान भारत की मानव कल्याण, सतत विकास और वैश्विक खाद्य सुरक्षा के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय कृषि को देश की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा बताते हुए कहा कि खेती भारत में धरती माता और लोगों के बीच एक पवित्र रिश्ता है. उन्होंने कहा कि देश का कृषि क्षेत्र अब विज्ञान, तकनीक, नवाचार और जलवायु के अनुकूल खेती की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, ताकि भविष्य के लिए टिकाऊ कृषि व्यवस्था तैयार की जा सके.
माइक्रो इरिगेशन योजनाओं को बढ़ावा
प्रधानमंत्री ने ‘पर ड्रॉप मोर क्रॉप’, प्रिसिजन फार्मिंग और माइक्रो इरिगेशन जैसी योजनाओं को कृषि नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, एआई आधारित सलाह प्रणाली, ड्रोन, रिमोट सेंसिंग और सेंसर आधारित मशीनों के बढ़ते उपयोग से खेती अधिक आधुनिक हो रही है और किसानों की आय बढ़ाने में मदद मिल रही है.
3,000 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में विकसित
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि पिछले दस वर्षों में भारत ने करीब 3,000 जलवायु-अनुकूल फसल किस्में विकसित की हैं. उन्होंने बताया कि विज्ञान और तकनीक आधारित कृषि मॉडल न केवल भारत की खाद्य सुरक्षा को मजबूत कर रहा है, बल्कि ग्लोबल साउथ के कई देशों की खाद्य जरूरतों में भी योगदान दे रहा है. प्रधानमंत्री ने खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के साथ भारत के पुराने संबंधों का भी उल्लेख किया और अंतरराष्ट्रीय मिलेट वर्ष मनाने में सहयोग के लिए संगठन का आभार जताया. उन्होंने कहा कि इससे पौष्टिक अनाज और स्वस्थ खानपान को बढ़ावा मिला है. FAO मुख्यालय की प्रधानमंत्री मोदी की यह यात्रा भी खास रही, क्योंकि पिछले 30 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली यात्रा थी.