कॉकरोच जनता पार्टी से लेकर करोड़ों के बिजनेस तक, आखिर क्यों दुनिया का ध्यान खींच रहे कॉकरोच

कॉकरोच अब सिर्फ घरों में दिखने वाला कीड़ा नहीं, बल्कि सोशल मीडिया और बिजनेस दुनिया का नया ट्रेंड बन गया है. कॉकरोच जनता पार्टी डिजिटल CJP आंदोलन के रूप में तेजी से वायरल हो रही है, वहीं कचरा प्रबंधन, प्रोटीन, रिसर्च और कॉस्मेटिक उद्योग में भी कॉकरोच का इस्तेमाल बढ़ता जा रहा है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 May, 2026 | 12:01 PM

कॉकरोच का नाम सुनते ही ज्यादातर लोग डर जाते हैं, लेकिन अब यही कॉकरोच सोशल मीडिया से लेकर बिजनेस दुनिया तक चर्चा का बड़ा विषय बन गया है. एक तरफ देश में कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janta Party) नाम से नया डिजिटल मूवमेंट तेजी से वायरल हो रहा है, जिसके इंस्टाग्राम फॉलोअर्स भाजपा से भी ज्यादा हो गए हैं. वहीं दूसरी तरफ चीन समेत कई देशों में कॉकरोच पालन करोड़ों का कारोबार बन चुका है. कचरा खत्म करने, दवाएं बनाने, कॉस्मेटिक और प्रोटीन प्रोडक्ट तैयार करने में इनका इस्तेमाल हो रहा है. भारत में भी अब इससे जुड़े स्टार्टअप और रिसर्च तेजी से बढ़ रहे हैं, जिससे यह अनोखा क्षेत्र लगातार सुर्खियों में बना हुआ है.

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही CJP

देश में इन दिनों कॉकरोच  जनता पार्टी (CJP) सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में है. इस डिजिटल आंदोलन से जुड़े लोगों को कॉकरोच कहा जा रहा है. दावा किया जा रहा है कि यह Gen Z और युवाओं की आवाज बनकर उभरी है, जो सिस्टम की कमियों पर सवाल उठा रही है. इंस्टाग्राम पर CJP के फॉलोअर्स 11 मिलियन तक पहुंच गए हैं, जो भाजपा के 8.7 मिलियन फॉलोअर्स से ज्यादा बताए जा रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की एक टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया पर ये अभियान तेजी से वायरल हुआ. हालांकि बाद में स्पष्ट किया गया कि बयान को गलत तरीके से पेश किया गया था. इसके बावजूद युवाओं के बीच कॉकरोच जनता पार्टी तेजी से एक ऑनलाइन ट्रेंड और आंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है.

कचरा खत्म करने में मददगार साबित हो रहे कॉकरोच

चीन जैसे ज्यादा आबादी वाले देश में हर दिन लाखों टन कचरा निकलता है. इस कचरे को खत्म करना बड़ी समस्या बन चुका है. ऐसे में कॉकरोच पालन  को एक सस्ता और आसान तरीका माना जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कॉकरोच खाने के कचरे को तेजी से खत्म कर देते हैं. इससे कचरे का ढेर कम होता है और पर्यावरण को ज्यादा नुकसान भी नहीं पहुंचता. विशेषज्ञ बताते हैं कि मशीनों से कचरा निपटाने में खर्च ज्यादा आता है और प्रदूषण भी बढ़ सकता है, जबकि कॉकरोच के जरिए यह काम काफी कम लागत में हो जाता है. चीन के शिचांग शहर में कॉकरोच फार्म बड़े पैमाने पर चल रहे हैं. यहां लकड़ी के बोर्ड से बने खास कमरों में लाखों कॉकरोच पाले जाते हैं. कमरे में हल्की नमी रखी जाती है ताकि उनका तेजी से विकास हो सके.

दवाओं, कॉस्मेटिक और प्रोटीन में हो रहा इस्तेमाल

कॉकरोच अब सिर्फ कीड़े नहीं माने जाते, बल्कि कई उद्योगों के लिए उपयोगी  बन चुके हैं. चीन में कॉकरोच से बने अर्क का इस्तेमाल दवाओं, घाव भरने वाले मलहम और ब्यूटी प्रोडक्ट्स में किया जा रहा है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि कॉकरोच से बने पदार्थ त्वचा की जलन, घाव और पेट से जुड़ी समस्याओं में मददगार हो सकते हैं. हालांकि इस पर अभी रिसर्च जारी है. इसके अलावा कई देशों में कॉकरोच को प्रोटीन का अच्छा स्रोत माना जा रहा है. इनसे पाउडर तैयार किया जाता है, जिसे प्रोटीन बार, ब्रेड और पशु आहार में इस्तेमाल किया जाता है. वैज्ञानिकों ने पैसिफिक बीटल प्रजाति के कॉकरोच में ऐसे प्रोटीन क्रिस्टल भी पाए हैं, जिन्हें कॉकरोच मिल्क कहा जाता है. माना जा रहा है कि यह काफी पौष्टिक हो सकता है और भविष्य में सुपरफूड के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है.

भारत में भी बढ़ रहा कॉकरोच पालन और रिसर्च

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में भी अब कॉकरोच पालन और इंसेक्ट फार्मिंग को लेकर काम शुरू हो चुका है. बेंगलुरु स्थित इंस्टीट्यूट फॉर स्टेम सेल बायोलॉजी एंड रीजनरेटिव मेडिसिन (inStem) में कॉकरोच की कुछ प्रजातियों पर रिसर्च की गई है. इसके अलावा कोलकाता और बेंगलुरु जैसे शहरों में कुछ कंपनियां ड्यूबिया और लॉबस्टर प्रजाति के कॉकरोच पाल रही हैं. इनका उपयोग मछलियों, छिपकलियों और दूसरे विदेशी पालतू जानवरों के भोजन के रूप में किया जाता है. भारत में GreenGrahi और Loopworm जैसे स्टार्टअप भी इंसेक्ट फार्मिंग पर काम कर रहे हैं. ये कंपनियां कीड़ों को प्रोटीन, पशु चारा और जैविक खाद में बदलने का काम कर रही हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में कॉकरोच पालन एक बड़े बिजनेस के रूप में उभर सकता है. कम लागत, पर्यावरण को फायदा  और कई उद्योगों में उपयोग होने की वजह से लोग अब इस अनोखे कारोबार में दिलचस्पी दिखाने लगे हैं.

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