खाद सप्लाई पर ‘कन्फ्यूजन’, लेकिन सरकार का भरोसा- किसानों को नहीं होगी कमी

वित्त मंत्री के मुताबिक, रबी सीजन के लिए समय से पहले टेंडर निकालना जरूरी है, लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें साफ नहीं हैं. सप्लायर खुद तय नहीं कर पा रहे कि कीमतें कितनी रहेंगी.

नई दिल्ली | Updated On: 7 Apr, 2026 | 09:11 AM

देश में खेती के लिए खाद (उर्वरक) सबसे जरूरी चीजों में से एक है. ऐसे में जब रबी सीजन की तैयारी शुरू होने वाली है, तब उर्वरकों की खरीद को लेकर कुछ अनिश्चितताएं सामने आई हैं. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी माना है कि इस बार उर्वरक खरीद की प्रक्रिया आसान नहीं है और इसमें कई तरह की दिक्कतें आ सकती हैं. हालांकि उन्होंने साफ कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि सरकार हर हाल में खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करेगी.

उर्वरक खरीद में क्या हैं दिक्कतें

वित्त मंत्री के मुताबिक, रबी सीजन के लिए समय से पहले टेंडर निकालना जरूरी है, लेकिन इस बार हालात सामान्य नहीं हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उर्वरकों की कीमतें साफ नहीं हैं. सप्लायर खुद तय नहीं कर पा रहे कि कीमतें कितनी रहेंगी. इसके अलावा शिपमेंट को लेकर भी दिक्कतें हैं.

बीमा कंपनियां कुछ शिपमेंट को कवर करने से मना कर रही हैं, जिससे माल लाने में जोखिम बढ़ गया है. लॉजिस्टिक्स यानी ट्रांसपोर्ट और सप्लाई चेन भी प्रभावित हो रही है. इन सब कारणों से पहले से तैयारी करना मुश्किल हो रहा है.

खरीफ सीजन के लिए राहत की खबर

इन चुनौतियों के बीच सरकार ने एक राहत भरी बात भी कही है. खरीफ सीजन के लिए देश में पर्याप्त मात्रा में उर्वरक मौजूद है. इसका मतलब यह है कि फिलहाल किसानों को खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और खेती का काम सुचारू रूप से चलता रहेगा.

पश्चिम एशिया संकट का बढ़ता असर

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, वित्त मंत्री ने बताया कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष अब सिर्फ एक क्षेत्रीय समस्या नहीं रह गया है. इसका असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है. ऊर्जा सप्लाई, व्यापार और परिवहन पर इसका असर देखने को मिल रहा है, जिससे अनिश्चितता और बढ़ गई है. यही कारण है कि उर्वरकों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है.

दुनिया में बढ़ता कर्ज, लेकिन भारत मजबूत स्थिति में

उन्होंने यह भी बताया कि दुनिया भर में सरकारी कर्ज तेजी से बढ़ा है और यह अब लगभग 106 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जो वैश्विक जीडीपी का 95 प्रतिशत से भी ज्यादा है. अमेरिका और जापान जैसे देशों में कर्ज का स्तर काफी ऊंचा है. इसके मुकाबले भारत की स्थिति बेहतर है. भारत का कुल कर्ज-जीडीपी अनुपात करीब 81 प्रतिशत है और आने वाले वर्षों में इसके और घटने की संभावना है.

विदेशी कर्ज और भंडार से मिलती है मजबूती

भारत का बाहरी कर्ज भी सीमित है, जो जीडीपी का करीब 19.1 प्रतिशत है. इसके अलावा देश के पास 688 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे करीब 11 महीने के आयात को पूरा किया जा सकता है. यह स्थिति भारत को वैश्विक संकट के समय भी मजबूत बनाए रखती है.

सरकार के पास है राहत देने की क्षमता

वित्त मंत्री ने कहा कि भारत के पास पर्याप्त वित्तीय गुंजाइश है. इसका मतलब है कि सरकार जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों को मदद दे सकती है. सरकार अपने विकास कार्यों (कैपेक्स) को जारी रख सकती है और जरूरत के अनुसार राहत भी दे सकती है. साथ ही भारतीय रिजर्व बैंक के पास भी ब्याज दरों में बदलाव करके अर्थव्यवस्था को संभालने का विकल्प मौजूद है.

किसानों के लिए क्या है संदेश

सरकार का साफ संदेश है कि किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है. भले ही उर्वरक खरीद में कुछ दिक्कतें हैं, लेकिन सरकार हर संभव प्रयास कर रही है कि खेती पर इसका असर न पड़े. समय पर खाद उपलब्ध कराने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

Published: 7 Apr, 2026 | 09:45 AM

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