Wheat procurement: देश में रबी सीजन की फसल कटाई से पहले ही सरकार ने गेहूं खरीद की तैयारियां तेज कर दी हैं. केंद्र सरकार ने वर्ष 2026-27 के रबी मार्केटिंग सीजन के लिए किसानों से 3.03 करोड़ टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य तय किया है. यह खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने वाले नए विपणन सीजन के दौरान की जाएगी और इसे देश के केंद्रीय भंडार (सेंट्रल पूल) के लिए खरीदा जाएगा.
सरकार का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में गेहूं खरीदने से किसानों को उनकी फसल का सही दाम मिलेगा और साथ ही देश की खाद्य सुरक्षा भी मजबूत बनी रहेगी. खास बात यह है कि इस बार का लक्ष्य लगभग पिछले साल के बराबर ही रखा गया है, जिससे यह संकेत मिलता है कि सरकार गेहूं की खरीद व्यवस्था को स्थिर बनाए रखना चाहती है.
अगर पिछले सीजन की बात करें तो 2025-26 के रबी मार्केटिंग सीजन में देशभर के करीब 26 लाख किसानों ने अपनी फसल सरकारी एजेंसियों को बेची थी.
खाद्य मंत्रालय की बैठक में लिया गया फैसला
गेहूं खरीद के इस लक्ष्य को तय करने के लिए खाद्य मंत्रालय में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई थी. इस बैठक में अलग-अलग राज्यों के प्रतिनिधि और भारतीय खाद्य निगम (FCI) के अधिकारी शामिल हुए. बैठक के दौरान गेहूं खरीद की तैयारियों के अलावा भंडारण, परिवहन और वितरण व्यवस्था पर भी विस्तार से चर्चा की गई. अधिकारियों ने इस बात पर भी जोर दिया कि मंडियों में किसानों को किसी तरह की परेशानी न हो और खरीद प्रक्रिया सुचारु रूप से चल सके.
चावल और मोटे अनाज की खरीद पर भी ध्यान
सरकार केवल गेहूं ही नहीं बल्कि अन्य खाद्यान्नों की खरीद पर भी ध्यान दे रही है. 2025-26 के रबी खरीद सीजन के लिए सरकार ने लगभग 76 लाख टन चावल खरीदने का लक्ष्य तय किया है. इसके साथ ही राज्यों को निर्देश दिया गया है कि वे किसानों से करीब 7.7 लाख टन मोटे अनाज (मिलेट्स) की भी खरीद करें. मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा और रागी को बढ़ावा देने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है क्योंकि ये पोषण से भरपूर होते हैं और कम पानी में भी उगाए जा सकते हैं.
बेहतर गुणवत्ता वाले चावल पर नया प्रयोग
सरकार खाद्यान्न वितरण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए एक नया प्रयोग भी कर रही है. इसके तहत पांच राज्यों में बेहतर गुणवत्ता वाले चावल की आपूर्ति का पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है. इस योजना के तहत ऐसे चावल की आपूर्ति की जा रही है जिसमें अधिकतम 10 प्रतिशत तक टूटे हुए दाने शामिल हो सकते हैं. सरकार ने राज्यों से इस योजना के अनुभव और सुझाव मांगे हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर इसे पूरे देश में लागू किया जा सके.
किसानों और उपभोक्ताओं दोनों को फायदा
सरकार की यह खरीद नीति किसानों और आम लोगों दोनों के लिए फायदेमंद साबित होती है. एक ओर किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य मिलता है, वहीं दूसरी ओर सरकारी भंडार में पर्याप्त मात्रा में अनाज जमा रहता है. इसी अनाज को बाद में पीडीएस के जरिए करोड़ों लोगों तक सस्ती दरों पर पहुंचाया जाता है, जिससे देश में खाद्य सुरक्षा बनी रहती है.
सरकार का मानना है कि आने वाले रबी सीजन में भी किसानों की उपज की खरीद सुचारु रूप से की जाएगी और उन्हें उनकी मेहनत का उचित मूल्य दिलाने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जाएंगे.