Punjab Wheat Farmers: अगले महीने से पंजाब में गेहूं की खरीद शुरू होने की संभावना है, लेकिन भंडारण को लेकर अभी से ही सरकार की चिंता बढ़ गई है. इसका मुख्य वजह पंजाब में पिछले साल की तरह अनाज भंडारण की कमी इस साल भी बनी हुई है. अगस्त 2025 से, फूड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (FCI) हर महीने 5 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चावल भंडार में भेज रही है. लेकिन 2026-27 की गेहूं की फसल के लिए पर्याप्त जगह सुनिश्चित करने के लिए, गेहूं का मासिक मूवमेंट कम से कम 15 लाख टन होना चाहिए. वहीं, चावल उद्योग भी गोदामों की कमी से जूझ रहा है. इस सीजन की फसल से पंजाब को 102 लाख टन चावल केंद्रीय पूल में देना है. इसमें से अब तक करीब 40 लाख टन चावल डिलीवर किया जा चुका है, जबकि लगभग 62 लाख टन चावल और धान मिलों में स्टॉक में है और FCI के गोदामों में भेजे जाने का इंतजार कर रहा है.
चावल मिलरों के अनुसार, फिलहाल पंजाब के कई गोदामों में लगभग 140 लाख टन चावल पहले से ही स्टॉक में रखा है, जिससे अतिरिक्त भंडारण की जगह लगभग नहीं बची है. खरीदी कार्य की निगरानी के लिए गठित मंत्रियों की बैठक में यह बात सामने आई कि FCI को राज्य से गेहूं का परिवहन बढ़ाना होगा. वर्तमान में प्रति माह 5 लाख टन गेहूं और 5 लाख टन चावल भेजे जाते हैं, जबकि अब कम से कम 15 लाख टन गेहूं प्रति माह भेजना आवश्यक है.
132 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य
द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब में गेहूं की कटाई आमतौर पर मार्च के अंत से अप्रैल की शुरुआत में शुरू होती है. राज्य सरकार 1 अप्रैल से आधिकारिक तौर पर खरीदारी शुरू करने की योजना बना रही है और लक्ष्य 132 लाख टन गेहूं खरीदने का है. फीरोजपुर के एक चावल मिलर के अनुसार, गेहूं की खरीदारी लगभग 30 दिनों में शुरू होने वाली है. बंपर फसल होने की वजह से स्टोरिंग का स्पष्ट इंतजाम नहीं है. केंद्र ने मिलरों के पास पड़ी चावल की अतिरिक्त स्टॉक के लिए अभी तक कोई नया भंडारण नहीं बनाया है. केवल मार्च में ही 4 लाख टन चावल का परिवहन हुआ. इस रफ्तार से बचे हुए चावल के स्टॉक को निकालने में लगभग 12 महीने लग जाएंगे.
31 मार्च तक चावल की 100 फीसदी डिलीवरी
राज्य की कस्टम मिलिंग नीति के अनुसार, चावल की 100 फीसदी डिलीवरी 31 मार्च तक पूरी हो जानी चाहिए. लेकिन वर्तमान उठाव की रफ्तार के हिसाब से केवल करीब 50 फीसदी ही डिलीवरी हो पाएगी और बाकी 50 फीसदी कब पहुंचेगी, इसका कोई स्पष्ट इंतजाम नहीं है. फीरोजपुर के एक मिलर ने कहा कि गर्मियों की शुरुआत में धीमी डिलीवरी से धान की गुणवत्ता खराब हो सकती है और टूटे हुए चावल की मात्रा बढ़ सकती है. जून में मॉनसून आने पर नुकसान और रंग बदलने का खतरा और बढ़ जाएगा, जिससे मिलरों को भारी आर्थिक नुकसान होगा. पिछले साल मिलिंग का काम 15 सितंबर तक चला और उद्योग को बड़ा घाटा हुआ.
चावल की आपूर्ति 20 लाख टन प्रति माह होनी चाहिए
हालांकि, राज्य सरकार इस मामले को केंद्रीय खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ उठा रही है. वहीं, चावल मिलर्स ने भी मांग की है कि राज्य से चावल की आपूर्ति कम से कम 20 लाख टन प्रति माह होनी चाहिए. इससे राज्य में पर्याप्त भंडारण की जगह बनेगी और बचे हुए चावल को मॉनसून शुरू होने से पहले केंद्रीय पूल में पहुंचाया जा सकेगा.
पंजाब में गेहूं की पैदावार और रकबा
ऐसे इस साल पंजाब में गेहूं की बंपर पैदावार होनी की उम्मीद है, क्योंकि मौसम अभी तक अनुकूल रहा है. खास बात यह है कि पंजाब में गेहूं की खेती के लिए क्षेत्रफल और उत्पादन दोनों ही दृष्टि से सबसे महत्वपूर्ण फसल है. वर्ष 2018-19 में पंजाब के अंदर गेहूं की खेती का क्षेत्रफल 35.2 लाख हेक्टेयर था और उत्पादन 182.6 लाख टन रहा था, जिसकी औसत उपज 5188 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर थी.