वैश्विक संकट के बीच खरीफ के लिए खाद का पर्याप्त भंडार, सरकार ने किसानों को दिया भरोसा

सरकार ने उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पहले से ही आयात की योजना पर काम शुरू कर दिया था. फरवरी 2026 तक भारत ने करीब 98 लाख मीट्रिक टन तैयार उर्वरकों का आयात कर लिया है. इसके अलावा आने वाले तीन महीनों के भीतर 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों के आयात की भी व्यवस्था कर ली गई है.

नई दिल्ली | Published: 7 Mar, 2026 | 08:19 AM

India fertilizer stock: भारत में खरीफ सीजन शुरू होने से पहले किसानों के बीच उर्वरकों की उपलब्धता को लेकर जो चिंता और चर्चाएं चल रही थीं, उन्हें सरकार ने दूर करने की कोशिश की है. पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन में आई बाधाओं के बीच उर्वरक विभाग ने साफ कहा है कि देश में खाद का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले खरीफ सीजन के दौरान किसानों को किसी भी प्रकार की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा.

सरकार के अनुसार, उर्वरकों का मौजूदा भंडार पिछले साल की तुलना में काफी अधिक है और इसकी वजह से अंतरराष्ट्रीय बाजार में आने वाली किसी भी अस्थिरता का असर देश के किसानों तक नहीं पहुंचेगा. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसानों की जरूरतें सरकार की प्राथमिकता हैं और खाद की आपूर्ति को हर हाल में सुचारु रखा जाएगा.

खरीफ से पहले मजबूत हुआ उर्वरक भंडार

PIB की रिपोर्ट के अनुसार, उर्वरक विभाग द्वारा जारी आंकड़ें बताते हैं कि इस समय देश में कुल उर्वरक भंडार 177.31 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. पिछले साल 6 मार्च 2025 को यह भंडार 129.85 लाख मीट्रिक टन था. इस तरह एक साल में उर्वरकों के भंडार में करीब 36.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

सरकार के अनुसार, यह बढ़ोतरी रणनीतिक भंडारण और पहले से की गई तैयारी का परिणाम है. खरीफ सीजन से पहले सरकार ने खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पहले ही बड़े पैमाने पर स्टॉक तैयार कर लिया है.

अगर अलग-अलग उर्वरकों की बात करें तो देश में डीएपी (DAP) का भंडार करीब 25.13 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. वहीं एनपीके (NPK) उर्वरकों का भंडार बढ़कर 55.87 लाख मीट्रिक टन हो गया है. इसके अलावा यूरिया, जो भारत में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाला उर्वरक है, उसका भंडार भी बढ़कर 59.30 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया है. इन आंकड़ों से साफ है कि देश में किसानों के लिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की गई है.

समय से पहले आयात कर बनाई गई रणनीति

सरकार ने उर्वरकों की आपूर्ति बनाए रखने के लिए पहले से ही आयात की योजना पर काम शुरू कर दिया था. फरवरी 2026 तक भारत ने करीब 98 लाख मीट्रिक टन तैयार उर्वरकों का आयात कर लिया है. इसके अलावा आने वाले तीन महीनों के भीतर 17 लाख मीट्रिक टन से अधिक उर्वरकों के आयात की भी व्यवस्था कर ली गई है. इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खरीफ सीजन के दौरान किसानों को खाद की कमी महसूस न हो. सरकार का कहना है कि यह कदम वैश्विक बाजार में संभावित अस्थिरता को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है ताकि देश के कृषि क्षेत्र पर इसका असर न पड़े.

लंबी अवधि के समझौते से मजबूत हुई आपूर्ति

उर्वरकों की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति समझौते भी किए हैं. खासतौर पर फॉस्फोरस और पोटाश आधारित उर्वरकों (P&K Fertilizers) के लिए यह समझौते महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. इन समझौतों की वजह से भारत को अंतरराष्ट्रीय कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव और सप्लाई की अनिश्चितता से काफी हद तक सुरक्षा मिलती है.

गैस आपूर्ति पर भी सरकार की नजर

उर्वरक उत्पादन के लिए प्राकृतिक गैस एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है. हाल के दिनों में वैश्विक ऊर्जा बाजार में आई अस्थिरता को देखते हुए सरकार ने इस विषय पर भी विशेष ध्यान दिया है. उर्वरक विभाग में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में यह स्पष्ट किया गया कि उर्वरक उद्योग को गैस की आपूर्ति सरकार की प्राथमिकता में शामिल है. सरकार ने यह भी कहा कि किसानों के हितों से किसी भी स्थिति में समझौता नहीं किया जाएगा.

कंपनियों ने भी बदली रणनीति

उर्वरक कंपनियों ने भी मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए अपनी रणनीति में बदलाव किया है. आमतौर पर इस समय उर्वरक संयंत्रों में मरम्मत और रखरखाव का काम किया जाता है, क्योंकि इस अवधि में मांग कम रहती है. इस बार कई कंपनियों ने अपने मेंटेनेंस शेड्यूल को पहले ही पूरा करने का फैसला किया है, ताकि खरीफ सीजन के दौरान उत्पादन पूरी क्षमता से किया जा सके.

किसानों को घबराने की जरूरत नहीं

सरकार ने किसानों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों या अटकलों से प्रभावित न हों. देश में उर्वरकों का पर्याप्त भंडार मौजूद है और आने वाले खरीफ सीजन के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है. सरकार का कहना है कि उर्वरकों की उपलब्धता पर लगातार नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे. इस तरह किसानों को आश्वस्त किया गया है कि आगामी खरीफ सीजन में उन्हें खाद की कमी का सामना नहीं करना पड़ेगा और खेती की तैयारियां बिना किसी चिंता के जारी रखी जा सकती हैं.

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