भारत-यूके व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू, 95 फीसदी कृषि और खाद्य उत्पादों पर नहीं लगेगा शुल्क

India-UK Free Trade Agreement: भारत और ब्रिटेन के बीच नया व्यापार समझौता 15 जुलाई से लागू होगा. इसके तहत भारत से ब्रिटेन जाने वाले 95 फीसदी से ज्यादा कृषि और खाद्य उत्पादों पर टैक्स नहीं लगेगा, जिससे मसाले, कॉफी, झींगा, अंगूर, शहद और अन्य उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा मिलेगा.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 11:47 AM

India-UK Trade Deal: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लंबे समय से चर्चा में रहा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे किसानों, मजदूरों, स्टार्टअप्स और नवाचार से जुड़े लोगों के लिए बड़ा अवसर बताया है. सरकार का कहना है कि यह समझौता ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा.

इसके लागू होने के बाद दोनों देशों के बीच व्यापार करना आसान होगा और कई उत्पादों पर लगने वाले आयात-निर्यात शुल्क (टैक्स) कम या पूरी तरह खत्म हो जाएंगे. इससे कारोबार बढ़ने और नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है.

भारतीय किसानों और खाद्य निर्यातकों को बड़ा लाभ

इस समझौते का सबसे बड़ा लाभ भारतीय कृषि और खाद्य उत्पादों के निर्यातकों को मिलने की उम्मीद है. समझौते के तहत भारत से ब्रिटेन भेजे जाने वाले 95 फीसदी से अधिक कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर आयात शुल्क नहीं लगेगा. इससे भारतीय मसाला उद्योग को बड़ी राहत मिलेगी. काली मिर्च, इलायची जैसे प्रमुख मसाले अब बिना अतिरिक्त शुल्क के ब्रिटेन के बाजार तक पहुंच सकेंगे. वहीं, भारतीय कॉफी को भी टैक्स-फ्री पहुंच मिलेगी, जिससे वह वहां के बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बन सकेगी और निर्यात बढ़ने की संभावना रहेगी.

समुद्री उत्पादों और फलों के लिए खुलेगा बड़ा बाजार

इस समझौते से भारतीय समुद्री खाद्य उद्योग को भी बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है. झींगा, टूना और कट्टलफिश जैसे समुद्री उत्पाद अब ब्रिटेन के बाजार में बिना किसी आयात शुल्क के पहुंच सकेंगे.

इसके अलावा ताजे अंगूर, प्याज, शहद, सब्जियां, मेवे और बेकरी उत्पादों पर भी शुल्क नहीं लगेगा. इससे भारतीय किसानों, मछली पालन से जुड़े कारोबारियों और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग को नए बाजार मिल सकते हैं. साथ ही उनके उत्पादों की मांग बढ़ने और बेहतर कीमत मिलने की संभावना भी है.

भारतीय उपभोक्ताओं को भी मिलेगा फायदा

यह समझौता सिर्फ निर्यातकों के लिए ही नहीं, बल्कि भारतीय उपभोक्ताओं के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है. इसके तहत ब्रिटेन से आने वाले कई उत्पादों पर लगने वाले आयात शुल्क को कम किया जाएगा. सैल्मन और अन्य समुद्री मछलियों पर लगने वाला 33 फीसदी शुल्क तुरंत हटा दिया जाएगा. वहीं, स्कॉच व्हिस्की पर मौजूदा 150 फीसदी शुल्क को घटाकर 75 फीसदी किया जाएगा, जिसे अगले 10 साल में 40 फीसदी तक लाने की योजना है. इसके अलावा चॉकलेट, बिस्कुट और अन्य खाद्य उत्पादों पर लगने वाले शुल्क भी धीरे-धीरे खत्म किए जाएंगे.

कस्टम प्रक्रिया होगी आसान

इस समझौते की एक बड़ी खासियत यह है कि, भारत और ब्रिटेन के बीच कस्टम (सीमा शुल्क) की प्रक्रिया को आसान बनाया जाएगा. नई व्यवस्था के तहत सामान पहुंचने के 48 घंटे के भीतर उसे मंजूरी देने का लक्ष्य रखा गया है. इससे ताजे फल, सब्जियां और समुद्री खाद्य पदार्थ जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पाद बिना ज्यादा देरी के बाजार तक पहुंच सकेंगे. इससे उनकी ताजगी बनी रहेगी और व्यापारियों को खराब होने की वजह से होने वाले नुकसान में भी कमी आएगी.

व्यापार और अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति

यह समझौता सिर्फ टैक्स में छूट देने तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को और आसान बनाने का भी काम करेगा. इससे भारत के बड़े उपभोक्ता बाजार और ब्रिटेन के अच्छे उत्पादों के बीच बेहतर जुड़ाव बनेगा. कुल मिलाकर, यह समझौता किसानों, निर्यातकों, कारोबारियों और आम ग्राहकों सभी के लिए नए मौके लेकर आ सकता है. इससे दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और मजबूत होंगे, साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को भी आगे बढ़ने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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