India US Trade Deal पर सियासत गरम, अमेरिकी दूध-दही-घी पर भारत की सख्ती बरकरार, विपक्ष ने दागे सवाल
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील पर सहमति बनी है, लेकिन भारत ने कृषि और डेयरी सेक्टर को पूरी तरह खोलने से इनकार किया है. सरकार का कहना है कि दूध-दही-घी जैसे उत्पाद करोड़ों किसानों की आजीविका से जुड़े हैं, इसलिए विदेशी सस्ते आयात से किसानों को कभी भी नुकसान नहीं होने दिया जाएगा .
India US Trade Deal: जब दो बड़े देश आपस में हाथ मिलाते हैं, तो बाजार में हलचल होना तय माना जाता है. बजट 2026-27 (Budget 2026-27) के बाद जब भारत और अमेरिका के बीच ऐतिहासिक ट्रेड डील की खबर सामने आई, तब चर्चा शुरू हो गई कि क्या अब अमेरिका का दूध, दही और घी भारत की दुकानों में बिकेगा.
इसी बीच इस डील को लेकर सियासत भी गरमा गई और कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार पर सवाल उठाए. हालांकि, तस्वीर इतनी सीधी नहीं है. ट्रेड डील जरूर हुई है और इसके कई फायदे भी बताए जा रहे हैं, लेकिन भारत ने साफ कर दिया है कि वह अपने किसानों के हितों से समझौता नहीं करेगा. इसी वजह से डेयरी और खेती सेक्टर को लेकर भारत का रुख अब भी सख्त बना हुआ है.
किसान बनाम सरकार की बहस
इस ट्रेड डील (India-US Trade Deal) पर राजनीति हसचल भी तेज हो गई है. कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला (Randeep Singh Surjewala) ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर अमेरिकी कृषि उत्पाद जीरो ड्यूटी पर भारत में आए, तो यह किसानों के साथ विश्वासघात होगा. उनका कहना है कि अमेरिका की कपास, मक्का, गेहूं और डेयरी उत्पाद अगर बिना शुल्क भारत में बिके, तो भारतीय किसान कैसे टिक पाएंगे. हालांकि सरकार का दावा है कि ऐसी कोई बात नहीं है और कृषि-डेयरी सेक्टर को अब भी संरक्षण मिलेगा.
#WATCH दिल्ली: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कहा, “…अमेरिका के कृषि मंत्री ने कहा है इस ट्रेड डील में अमेरिका का सारे खेती उत्पाद जीरो ड्यूटी पर भारत में बेचे जाएंगे। देश के किसान के लिए इससे बड़ा विश्वासघात हो ही नहीं सकता। अब अमेरिका की… pic.twitter.com/934LTqo4ZI
— ANI_HindiNews (@AHindinews) February 3, 2026
डील हुई, लेकिन दरवाजे पूरी तरह नहीं खुले
भारत और अमेरिका (India-US Trade) के बीच ट्रेड डील को लेकर सहमति जरूर बन गई है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर सेक्टर विदेशी कंपनियों के लिए खोल दिया गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने पहले जैसा ही रुख बनाए रखा है. यानी जो चीजें संवेदनशील मानी जाती हैं, जैसे कृषि और डेयरी, उन्हें बड़े पैमाने पर विदेशी प्रतिस्पर्धा के लिए नहीं खोला जाएगा. भारत इससे पहले भी ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत में यही नीति अपनाता रहा है. साफ शब्दों में कहें तो डील होगी, व्यापार बढ़ेगा, लेकिन किसान की कीमत पर नहीं.
दूध-दही-घी पर रोक क्यों जरूरी समझता है भारत?
भारत का डेयरी सेक्टर (Dairy Sector) करोड़ों छोटे किसानों की रोजी-रोटी है. गांव-गांव में लोग दो-चार गाय या भैंस पालकर अपने घर का खर्च चलाते हैं. अगर अमेरिका जैसे देश से सस्ता दूध पाउडर, चीज या घी भारत में आने लगे, तो स्थानीय किसानों को भारी नुकसान हो सकता है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सरकार मानती है कि विदेशी सस्ते आयात से दूध के दाम गिरेंगे और इसका सीधा असर किसानों की कमाई पर पड़ेगा. यही वजह है कि भारत डेयरी सेक्टर को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में शामिल करने से बचता रहा है. सरकार का साफ कहना है कि किसानों की आजीविका से कोई समझौता नहीं होगा.
टैरिफ कटौती पर काम जारी
इस डील के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि भारतीय सामानों पर टैरिफ 25 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किया जाएगा. इससे भारत के कई उत्पादों को अमेरिकी बाजार में फायदा मिल सकता है. फिलहाल दोनों देशों के अधिकारी इस समझौते को कानूनी रूप देने में जुटे हैं. अभी यह भी साफ नहीं है कि यह पूरा द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) है या सिर्फ पहला कदम. यानी आने वाले दिनों में इसकी शर्तें और असर धीरे-धीरे सामने आएंगे.