Rajasthan News: राजस्थान के किसानों के लिए इस समय राहत और उम्मीद की एक बड़ी खबर सामने आई है. लंबे समय तक दामों की मार झेलने के बाद अब प्रदेश का प्याज एक बार फिर चमकने लगा है. नेपाल और बांग्लादेश में राजस्थान के प्याज की जबरदस्त मांग देखने को मिल रही है. जैसे ही सीमा पार व्यापार के रास्ते खुले, वैसे ही विदेशी बाजारों तक राजस्थान का प्याज पहुंचने लगा और इसका सीधा असर कीमतों पर भी दिखाई देने लगा है. खासकर अलवर जिले की प्याज मंडी इन दिनों कारोबार का बड़ा केंद्र बन गई है.
अलवर मंडी में रिकॉर्ड आवक
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अलवर की प्याज मंडी पिछले दो महीनों से पूरी तरह गुलजार नजर आ रही है. यहां नवंबर और दिसंबर के दौरान करीब 12 लाख से ज्यादा कट्टों की आवक दर्ज की गई है. हालात ऐसे हैं कि रोजाना हजारों किसान और व्यापारी मंडी पहुंच रहे हैं. हाल ही में एक दिन में ही करीब 50 हजार कट्टों की आवक हुई, जिससे मंडी में चहल-पहल बनी रही. व्यापारी बताते हैं कि इतनी बड़ी मात्रा में प्याज आने के बावजूद बाजार में सुस्ती नहीं है, बल्कि खरीदारी लगातार बनी हुई है.
बॉर्डर खुलते ही विदेश पहुंचा राजस्थान का प्याज
सबसे अहम बदलाव सीमा पार व्यापार को लेकर देखने को मिला है. बॉर्डर खुलने के बाद राजस्थान का प्याज बांग्लादेश भेजा जा रहा है, वहीं नेपाल से भी लगातार मांग आ रही है. हालांकि इस बार रेल परिवहन के जरिए सप्लाई नहीं हो पाई, लेकिन सड़कों के माध्यम से प्याज की खेप लगातार बाहर जा रही है. बंगाल के रास्ते बांग्लादेश तक प्याज पहुंचाया जा रहा है, जिससे निर्यात को मजबूती मिली है.
देशभर में भी बढ़ी डिमांड, कई राज्यों तक सप्लाई
विदेशी मांग के साथ-साथ देश के अंदर भी राजस्थान के प्याज की खपत लगातार बढ़ रही है. उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, असम, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में अलवर का प्याज भेजा जा रहा है. व्यापारी बताते हैं कि राजस्थान का प्याज तीखा होने के कारण खास तौर पर नॉनवेज व्यंजनों और प्याज प्यूरी बनाने में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है. यही वजह है कि होटल और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री में इसकी मांग बनी रहती है.
दामों में आया उछाल, किसानों को राहत
शुरुआती दिनों में प्याज की गुणवत्ता औसत रहने के कारण बाजार में भाव काफी नीचे रहे. उस समय प्याज के दाम 200 से 500 रुपये प्रति मन तक सिमट गए थे, जिससे किसानों को नुकसान झेलना पड़ा. लेकिन अब जैसे-जैसे निर्यात बढ़ा और घरेलू मांग मजबूत हुई, वैसे-वैसे कीमतों में सुधार देखने को मिला है. फिलहाल मंडी में प्याज के भाव 300 रुपये से बढ़कर 850 रुपये प्रति मन तक पहुंच चुके हैं. इससे किसानों के चेहरे पर संतोष साफ नजर आ रहा है.
तीखे स्वाद के कारण खास पहचान
अलवर का प्याज अपने तीखे स्वाद के लिए जाना जाता है. यही वजह है कि नॉनवेज व्यंजनों में इसका ज्यादा उपयोग होता है. इसके अलावा सॉस और प्यूरी बनाने वाली कंपनियां भी इसी प्याज को प्राथमिकता देती हैं. मंडी से रोजाना करीब 130 छोटी-बड़ी गाड़ियां प्याज लेकर अलग-अलग राज्यों और पड़ोसी देशों के लिए रवाना हो रही हैं.
फरवरी तक बनी रहेगी आवक, बाजार में हलचल जारी
व्यापारियों और किसानों का मानना है कि प्याज की आवक फरवरी तक बनी रह सकती है. कई किसानों ने इस बार फसल को देर से निकाला है. जिन खेतों में प्याज में नमी ज्यादा है, वहां किसान उसे फिलहाल सुरक्षित रखे हुए हैं. जैसे-जैसे नमी कम होगी, वैसे-वैसे मंडी में और प्याज पहुंचेगा. कुल मिलाकर बॉर्डर खुलने और बढ़ते निर्यात ने राजस्थान के प्याज को नई पहचान दी है और किसानों को लंबे समय बाद बेहतर दाम मिलने की उम्मीद जगी है.