गेहूं खरीद सीजन शुरू, 303 लाख टन का लक्ष्य तय… कम मंडी भाव और मौसम बना बड़ी चुनौती

इस बार मौसम भी गेहूं खरीद के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है. कई इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और बढ़ते तापमान की वजह से फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. अगर फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो सरकार के लिए तय मानकों के अनुसार खरीद करना मुश्किल हो सकता है.

नई दिल्ली | Updated On: 1 Apr, 2026 | 03:44 PM

wheat procurement 2026: देश में गेहूं खरीद का नया सीजन शुरू हो गया है और इसके साथ ही सरकार ने बड़ा लक्ष्य भी तय किया है. इस साल केंद्र सरकार ने 303.36 लाख टन गेहूं खरीदने का लक्ष्य रखा है. हालांकि सीजन की शुरुआत धीमी रही है और शुरुआती आंकड़ों में करीब 17,883 टन गेहूं ही सरकारी भंडार में पहुंचा है.

बिजनेस लाइन की खबर के अनुसार, सरकार ने कुछ राज्यों में समय से पहले खरीद की अनुमति दी थी, जिसके चलते मार्च के आखिरी दिनों से ही खरीद शुरू हो गई थी. लेकिन अभी कई राज्यों में कटाई पूरी तरह शुरू नहीं हुई है, इसलिए खरीद की रफ्तार आने वाले दिनों में बढ़ने की उम्मीद है.

किन राज्यों से हो रही खरीद, क्या है लक्ष्य

सरकार ने अलग-अलग राज्यों के लिए खरीद का लक्ष्य तय किया है.

पिछले साल 2025-26 में सरकार ने कुल 300.35 लाख टन गेहूं खरीदा था, जो इस साल के लक्ष्य के लगभग बराबर है.

शुरुआती आंकड़े क्या बताते हैं

अब तक के आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान से 17,818 टन गेहूं की खरीद हो चुकी है. वहीं उत्तर प्रदेश से अभी सिर्फ 65 टन गेहूं खरीदा गया है, जिसमें 59 टन पश्चिमी यूपी और 6 टन पूर्वी यूपी से आया है. यह आंकड़े बताते हैं कि अभी खरीद प्रक्रिया शुरुआती दौर में है और जैसे-जैसे कटाई बढ़ेगी, वैसे-वैसे खरीद में भी तेजी आएगी.

बाजार भाव MSP से नीचे, बढ़ सकती है परेशानी

इस समय एक बड़ी चिंता यह है कि मंडियों में गेहूं के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे चल रहे हैं. MSP 2,585 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है, लेकिन कई जगहों पर किसान इससे कम दाम पर गेहूं बेचने को मजबूर हैं.

30 मार्च के आंकड़ों के अनुसार, देश में औसत मंडी भाव करीब 2,379 रुपये प्रति क्विंटल रहा. मध्य प्रदेश में यह 2,295 रुपये, उत्तर प्रदेश में 2,348 रुपये और राजस्थान में 2,502 रुपये रहा. हालांकि गुजरात में कीमत MSP से ऊपर 2,637 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई. कम कीमतों के कारण किसानों में चिंता बढ़ रही है और सरकार पर खरीद बढ़ाने का दबाव भी बन सकता है.

मौसम भी बन सकता है बड़ी चुनौती

इस बार मौसम भी गेहूं खरीद के लक्ष्य को प्रभावित कर सकता है. कई इलाकों में बारिश, ओलावृष्टि और बढ़ते तापमान की वजह से फसल की गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है. अगर फसल की गुणवत्ता प्रभावित होती है, तो सरकार के लिए तय मानकों के अनुसार खरीद करना मुश्किल हो सकता है. इससे कुल खरीद पर असर पड़ सकता है.

सरकार की तैयारियां और निर्देश

खाद्य मंत्रालय ने खरीद एजेंसियों को पहले से ही पूरी तैयारी करने के निर्देश दिए हैं. मंडियों में पर्याप्त स्टाफ, बोरियों (गननी), नमी मापने के उपकरण, वजन मशीन और भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है. इसके साथ ही किसानों को समय पर भुगतान, गेहूं की सुरक्षित ढुलाई और भंडारण पर भी खास ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं.

सरकार ने यह भी कहा है कि खरीद की प्रगति पर रोजाना नजर रखी जाए और सभी स्तरों पर जिम्मेदारी तय की जाए, ताकि लक्ष्य को समय पर पूरा किया जा सके.

नीति में बदलाव के संकेत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार सरकार ने खरीद लक्ष्य तय करने में नया तरीका अपनाया है. पहले जहां खुली खरीद (ओपन-एंडेड) होती थी, वहीं अब जरूरत और भंडारण क्षमता के हिसाब से लक्ष्य तय किया गया है. हालांकि यह बदलाव स्थायी होगा या नहीं, यह आने वाले समय में साफ होगा. अगर बाजार भाव ज्यादा गिरते हैं, तो सरकार पर अधिक खरीद करने का दबाव बढ़ सकता है.

वहीं आने वाले समय में गेहूं खरीद की रफ्तार, बाजार भाव और मौसम की स्थिति तीन बड़े कारक होंगे, जो यह तय करेंगे कि सरकार अपना लक्ष्य हासिल कर पाएगी या नहीं. अगर फसल अच्छी रहती है और खरीद व्यवस्था सुचारू रहती है, तो सरकार अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है. लेकिन अगर मौसम या बाजार में उतार-चढ़ाव रहा, तो यह लक्ष्य चुनौतीपूर्ण बन सकता है.

Published: 1 Apr, 2026 | 03:40 PM

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