युद्ध के हालातों से पशुचारा क्षेत्र को 250 करोड़ का नुकसान! शिपमेंट ट्रांजिट टाइम बढ़ने से गहराता जा रहा संकट

एपीडा के आंकड़े बताते हैं कि भारत का लाइवस्टॉक (पशुधन) और पशु उत्पाद निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में 12.56 फीसदी बढ़त के साथ 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया. इसमें से काफी हिस्सा खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है. लेकिन, मौजूदा युद्ध हालात ने निर्यातकों की परेशानी बढ़ा रखी है.

नोएडा | Published: 12 Mar, 2026 | 04:38 PM

ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच बढ़ते युद्ध और तनाव का असर लाइव स्टॉक सेक्टर यानी पशुधन चारा क्षेत्र पर बुरी तरह पड़ रहा है. इसके अलावा पोल्ट्री सेक्टर भी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है. क्योंकि यह काफी हद तक मक्का, सोयाबीन, ईंधन, खाद और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर निर्भर करता है. वहीं, युद्ध का मैदान बने खाड़ी देशों से आने वाली यूरिया में देरी से पशु चारा फसलें उगाने में देरी और उत्पादन में कमी का कारण बन सकती है. भारतीय पशुधन चारा निर्माता संघ (CLFMA) का अनुमान है कि इस इलाके में लाइवस्टॉक एक्सपोर्ट का अनुमान 230-250 करोड़ रुपये है, यह सेक्टर वेस्ट एशिया में स्टेबिलिटी से करीब से जुड़ा हुआ है, जो मौजूदा हालातों से खतरे में है. एक्सपर्ट ने कहा है कि भारतीय निर्यातकों को असली चिंता महंगे फ्यूल, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टक कॉस्ट को लेकर सता रही है.

42 हजार करोड़ के एनिमल प्रोडक्ट निर्यात पर संकट गहराया

कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़े बताते हैं कि भारत का लाइवस्टॉक (पशुधन) और पशु उत्पाद निर्यात तेजी से बढ़ रहा है, जो पिछले वित्त वर्ष यानी 2024-25 में 12.56 फीसदी बढ़त के साथ 42 हजार करोड़ रुपये से अधिक दर्ज किया गया. इसमें से काफी हिस्सा खाड़ी देशों में निर्यात किया जाता है. वहीं, साल 2025-26 में इस निर्यात का आंकड़ा 50 हजार करोड़ रुपये के भी पार जाने का अनुमान लगाया गया था. लेकिन, मौजूदा के युद्ध हालातों ने निर्यात को लेकर चिंता बढ़ा दी है. APEDA के अनुसार भारत भैंस के मांस (Carabeef) का दुनिया में सबसे बड़ा निर्यातक है. प्रमुख निर्यात उत्पादों में मांस, डेयरी उत्पाद, खाल और जीवित भेड़-बकरी शामिल हैं.

80 फीसदी एनिमल प्रोडक्ट निर्यात खाड़ी देशों को

भारतीय पशुधन चारा निर्माता संघ (CLFMA ) के चेयरमैन दिव्या कुमार गुलाटी ने किसान इंडिया को बताया कि “इजराइल और ईरान के बीच चल रहे झगड़े से भारत के लाइवस्टॉक सेक्टर की लागत बढ़ने और एक्सपोर्ट की रफ्तार धीमी होने की आशंका है. हमारे 80 फीसदी से ज्यादा एनिमल प्रोडक्ट एक्सपोर्ट खासकर भैंस का मीट, खाड़ी और बड़े मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका ( MENA ) इलाके की ओर जाता है, जिसमें यूनाइटेड अरब अमीरात और सऊदी अरब जैसे मार्केट अहम भूमिका निभाते हैं. इसके अलावा भारत से अंडे UAE और ओमान को एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं और अगर कोई बढ़ोतरी शिपिंग लेन में रुकावट डालती है या फ्यूल की कीमतें बढ़ाती है तो इन शिपमेंट पर भी जरूर असर पड़ेगा.

लाइवस्टॉक एक्सपोर्ट अनुमान खतरे में

FY25 में इस इलाके में लाइवस्टॉक एक्सपोर्ट का अनुमान 230-250 करोड़ रुपये है, यह सेक्टर वेस्ट एशिया में स्टेबिलिटी से करीब से जुड़ा हुआ है. हालांकि डायरेक्ट मीट ट्रेड जियोपॉलिटिकल टेंशन का पहला शिकार नहीं हो सकता है, लेकिन फीड, फर्टिलाइजर, एनर्जी और लॉजिस्टिक्स पर इसके असर से असली दबाव महसूस होगा. लाइवस्टॉक सेक्टर अनाज और फर्टिलाइजर की कीमतों को लेकर बहुत सेंसिटिव है. ईरान यूरिया का एक बड़ा ग्लोबल एक्सपोर्टर है और मार्केट की घबराहट भी कीमतों को बढ़ा सकती है. अगर कीमतें 50-60 डॉलर प्रति टन भी बढ़ती हैं तो चारे की खेती के लिए इनपुट कॉस्ट बढ़ जाएगी.

इसके अलावा अगर शिपमेंट को पहले रेड सी में हुई रुकावटों की तरह दूसरी जगह भेजा जाता है, तो ट्रांजिट टाइम 15–20 दिन बढ़ सकता है, जिससे फ्रेट, इंश्योरेंस और वर्किंग कैपिटल कॉस्ट बढ़ सकती है. जिंदा जानवरों के एक्सपोर्ट के लिए लंबी यात्राओं का मतलब है ज्यादा चारे की जरूरत और ज्यादा स्ट्रेस से जुड़े रिस्क.

एक्सपोर्टर्स की असली – चिंता महंगा फ्यूल, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टक कॉस्ट

एक्सपोर्टर्स के लिए अभी की चिंता डिमांड में कमी नहीं है, बल्कि बढ़े हुए फ्यूल, फर्टिलाइजर और लॉजिस्टिक्स कॉस्ट की वजह से मार्जिन में कमी है. अगर टेंशन बनी रहती है, तो इसका असर इंडिया से आगे बढ़कर एशिया और अफ्रीका के जानवरों और चारे के मार्केट पर पड़ेगा. पॉलिसी बनाने वालों और इंडस्ट्री के स्टेकहोल्डर्स को एक्सपोर्ट कॉम्पिटिटिवनेस को बनाए रखने और सप्लाई चेन स्टेबिलिटी पक्का करने के लिए स्थिति पर करीब से नजर रखनी चाहिए.”

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