कावेरी पानी पर कर्नाटक की चिंता बढ़ी, 9000 की जगह 2000 क्यूसेक छोड़ने की उठी मांग.. टेंशन में किसान

कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु आमने-सामने हैं. कर्नाटक में पानी की आवक 82 फीसदी घटने से सिंचाई संकट बढ़ गया है. राज्य ने पानी छोड़ने की मात्रा 9,000 से घटाकर 2,000 क्यूसेक करने की मांग की है. वहीं तमिलनाडु ने अगले 15 दिनों के लिए 20,370 क्यूसेक पानी की मांग रखी है.

नई दिल्ली | Published: 10 Sep, 2026 | 12:31 PM

कर्नाटक ने कावेरी नदी में पानी की कमी को लेकर चिंता जताई है. राज्य के मुताबिक, खरीफ सीजन में अब तक नहरों में सिर्फ 17.83 टीएमसी फीट पानी पहुंचा है, जबकि सूखे जैसे साल में भी 56.37 टीएमसी फीट पानी पहुंचा था. 7 सितंबर तक चार जलाशयों में 63.218 टीएमसी फीट पानी बचा था, लेकिन जरूरी इस्तेमाल के बाद सिंचाई के लिए सिर्फ 15.218 टीएमसी फीट पानी उपलब्ध रहेगा. इससे करीब 23.322 टीएमसी फीट पानी की कमी रह जाएगी.

कर्नाटक सरकार का कहना है कि 27 अगस्त को कावेरी बेसिन में पानी की आवक 26,930 क्यूसेक थी, जो 7 सितंबर को घटकर सिर्फ 4,823 क्यूसेक रह गई. यानी आवक में करीब 82 फीसदी की गिरावट आई है. राज्य का दावा है कि कावेरी बेसिन का करीब तीन-चौथाई हिस्सा सूखे से प्रभावित है. कर्नाटक ने कावेरी जल प्रबंधन समिति (CWRC) से पानी छोड़ने की मात्रा 9,000 क्यूसेक से घटाकर 2,000 क्यूसेक करने की मांग की है. राज्य का कहना है कि मौजूदा हालात में वह इससे ज्यादा पानी छोड़ने की स्थिति में नहीं है.

तमिलनाडु ने कावेरी से 20,370 क्यूसेक पानी छोड़ने की मांग की

तमिलनाडु ने कावेरी जल को लेकर कर्नाटक के दावे पर अपनी बात रखी है. राज्य ने कहा कि मेट्टूर बांध में करीब 55.4 टीएमसी फीट पानी है. यह पानी कावेरी डेल्टा में सांबा धान की खेती को करीब 45 दिनों तक चलाने के लिए जरूरी है. तमिलनाडु के मुताबिक, 7 सितंबर तक बिलिगुंडलु में सिर्फ 34.325 टीएमसी फीट पानी पहुंचा है, जबकि सूखे जैसे साल में भी उसे 50.337 टीएमसी फीट पानी मिलना चाहिए था.

दोनों राज्यों को पानी की कमी का असर साझा करना होगा

तमिलनाडु ने कर्नाटक में जल संकट की स्थिति को उतना गंभीर नहीं माना है. उसने कहा कि कर्नाटक के जलाशयों में 63.218 टीएमसी फीट पानी है और वहां सिंचाई के लिए पानी छोड़ा जा रहा है. तमिलनाडु का कहना है कि दोनों राज्यों को पानी की कमी का असर मिलकर झेलना चाहिए और कर्नाटक को सिंचाई के लिए छोड़े जा रहे पानी में कटौती करनी चाहिए. तमिलनाडु ने अगले 15 दिनों के लिए 20,370 क्यूसेक पानी की मांग की है. यह पहले तय 9,000 क्यूसेक से दोगुने से भी ज्यादा है. राज्य ने चेतावनी दी कि पानी मिलने में देरी से सांबा धान की खेती और कावेरी डेल्टा के किसानों की आजीविका प्रभावित हो सकती है.

कावेरी जल विवाद पर कर्नाटक नाराज

कर्नाटक के जल संसाधन मंत्री एन. चालुवरायस्वामी ने कावेरी जल प्रबंधन समिति (CWRC) के फैसले को अनुचित बताया है. उन्होंने कहा कि इससे राज्य की परेशानी और बढ़ेगी. मंत्री के मुताबिक, CWRC की बैठक में कर्नाटक के अधिकारियों ने राज्य के मौजूदा हालात की पूरी जानकारी दी थी. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु ने 17,000 क्यूसेक पानी की मांग की थी, लेकिन पिछले एक सप्ताह में कावेरी बेसिन में पानी की आवक काफी घट गई है. चालुवरायस्वामी ने कहा कि ऐसे संकट के समय कर्नाटक के लिए 6,000 क्यूसेक पानी छोड़ना भी संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि राज्य लगातार इस दिशा में काम कर रहा है कि उसे शून्य पानी छोड़ना पड़े.

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