मेकेदातु बांध विवाद: दो राज्यों के विरोध के बाद अब किसान संगठन ने भी खोला मोर्चा.. 20 से आंदोलन

Mekedatu Dam Karnataka: किसान नेता पीआर पांडियन ने कर्नाटक के राजनीतिक नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे स्थानीय विरोध के बावजूद फायदे के लिए मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि कावेरी नदी पर बनने वाला यह बांध किसानों को बर्बाद कर देगा.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 4 Sep, 2026 | 06:35 PM

कर्नाटक सरकार तमिलनाडु की सीमा से सटे इलाके से बहने वाली कावेरी नदी पर मेकेदातु बांध बनाना चाह रही है. कर्नाटक सरकार का कहना है कि इससे राज्य के किसानों को भरपूर सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और हर साल पेयजल संकट झेलने वाले बेंगलुरू को भरपूर पानी मिल सकेगा. वहीं, इससे लगभग 400 मेगावाट हाइड्रोइलेक्ट्रिक पॉवर भी जेनरेट की जा सकेगी. इस परियोजना को लेकर केंद्र से मंजूरी के लिए फाइल पहुंच चुकी है. लेकिन, तमिलनाडु और पुड्डूचेरी कावेरी नदी का पानी इस्तेमाल करते हैं और दोनों राज्यों ने बांध बनाने का विरोध किया है. इतना ही नहीं अब तमिलनाडु के सभी किसान संगठनों की समिति ने आंदोलन का ऐलान कर दिया है.

20 सितंबर से राज्यव्यापी आंदोलन का ऐलान

तमिलनाडु के सभी किसान संगठनों की समन्वय समिति ने शुक्रवार को घोषणा की कि वे कर्नाटक सरकार के मेकेदातु में कावेरी नदी पर बांध बनाने की कोशिश के विरोध में 20 सितंबर से पांच दिन का राज्यव्यापी अभियान चलाएंगे. किसान संगठन के अध्यक्ष पीआर पांडियन ने यह घोषणा गुरुग्राम में किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर के बीच पांच घंटे चली विस्तृत बैठक के बाद की. पांडियन ने कर्नाटक के राजनीतिक नेतृत्व पर आरोप लगाया कि वे स्थानीय विरोध के बावजूद राजनीतिक फायदे के लिए मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ा रहे हैं. उन्होंने कहा कि पूमपुहार से शुरू होने वाले इस अभियान के बाद अगर जरूरत पड़ी तो किसान अपनी मांगों को रखने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात का समय मांगेंगे.

केंद्र को भेजी गई बांध परियोजना किसानों के साथ धोखा

किसान नेता पीआर पांडियन ने कावेरी नदी पर प्रस्तावित बांध का कड़ा विरोध किया. उन्होंने कर्नाटक द्वारा केंद्रीय जल आयोग को सौंपी गई विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को धोखा और कानूनी रूप से अमान्य बताया. उन्होंने कहा कि डीपीआर में तमिलनाडु, पुडुचेरी और कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण की जरूरी मंजूरी नहीं है. उन्होंने केंद्र सरकार से इस परियोजना के लिए कोई भी पर्यावरण या वन मंजूरी न देने का आग्रह किया है.

मेकेदातु बांध से खेती बर्बाद हो जाएगी

उन्होंने चेतावनी दी कि यह बांध तमिलनाडु और कर्नाटक दोनों राज्यों के किसानों के लिए नुकसानदायक होगा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक के किसान भी मानते हैं कि इस बांध से उन्हें कोई फायदा नहीं होगा. क्योंकि यह कृष्णराजासागर बांध के नीचे की ओर घने जंगलों वाले इलाके में स्थित है, उन्होंने कहा कि पानी की कमी के समय पीने के पानी की जरूरतों के बहाने मेकेदातु में पानी जमा करने के लिए बांध बनाना मंजूर नहीं है और इससे खेती बर्बाद हो जाएगी.

रासिमानल में बांध क्यों नहीं बनाती सरकार

किसान नेता पीआर पांडियन ने विकल्प के तौर पर तमिलनाडु में रासिमानल में बांध बनाने का प्रस्ताव रखा. उन्होंने दावा किया कि 2024 में हुई एक संयुक्त बैठक में दोनों राज्यों के किसान रासिमानल के स्थान पर सहमत हुए थे. पी आर पांडियन ने रासिमानल में बांध बनाने के लिए केंद्र सरकार से इसके निर्माण की मंजूरी देने का आग्रह किया. उन्होंने कहा कि इससे दोनों राज्यों के किसानों को नुकसान होने से बच जाएगा.

स्वामीनाथन रिपोर्ट के आधार पर एमएसपी लागू करने की मांग

पीआर पांडियन ने केंद्र सरकार से न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी देने वाला कानून बनाने और इस संबंध में एम.एस. स्वामीनाथन समिति की सिफारिशों को लागू करने का आग्रह किया. उन्होंने विद्युत नियामक आयोग अधिनियम को वापस लेने, स्मार्ट मीटर लगाने की अनिवार्यता खत्म करने और भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन करने की मांग की. पांडियन ने बताया कि मंत्री ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि इन मुद्दों पर संबंधित विभागों के साथ चर्चा की जाएगी और इन्हें प्रधानमंत्री के संज्ञान में लाया जाएगा.

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