खरीफ सीजन पर सरकार अलर्ट! 270 जिलों पर नजर, कम बारिश और अल नीनो को लेकर बड़ा एक्शन
Kharif Season 2026: खरीफ सीजन के बीच केंद्र सरकार ने मॉनसून, संभावित अल नीनो, कम बारिश, फसलों की बुवाई, उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता की समीक्षा की. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने 270 संवेदनशील जिलों पर विशेष निगरानी रखने और राज्यों के साथ लगातार तालमेल बनाए रखने के निर्देश दिए.
Kharif Crop Sowing: खरीफ सीजन के बीच केंद्र सरकार ने खेती की तैयारियों और मौजूदा हालात की समीक्षा की है. बैठक में मॉनसून की स्थिति, संभावित अल नीनो, कम बारिश, खरीफ फसलों की बुवाई, उर्वरकों और बीजों की उपलब्धता जैसे अहम मुद्दों पर राज्यों के साथ विस्तार से चर्चा हुई. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि, मौसम और खेती की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए. सरकार ने खास तौर पर उन जिलों पर ध्यान देने को कहा है, जहां बारिश कम हुई है या आने वाले दिनों में मौसम की वजह से खेती प्रभावित होने की आशंका है.
658 लाख हेक्टेयर से ज्यादा में हुई खरीफ बुवाई
बैठक में बताया गया कि 17 जुलाई 2026 तक देश में 658.19 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में खरीफ फसलों की बुवाई हो चुकी है. हालांकि पिछले साल की तुलना में कुल रकबा थोड़ा कम है, लेकिन कई राज्यों में धान, दलहन और दूसरी खरीफ फसलों की बुवाई अच्छी गति से आगे बढ़ रही है. कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि दलहन, तिलहन और कपास मिशन की राज्यों के साथ हर सप्ताह समीक्षा की जाए और किसानों से मिलने वाली जानकारी के आधार पर तुरंत जरूरी कदम उठाए जाएं.
270 संवेदनशील जिलों पर सरकार की खास नजर
बैठक में भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के पूर्वानुमान और संभावित अल नीनो की स्थिति पर भी विस्तार से चर्चा हुई. सरकार ने 270 ऐसे जिलों की पहचान की है, जहां कम बारिश या मौसम में बदलाव का असर खेती पर पड़ सकता है.
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फसलों की स्थिति जानने के लिए NDVI (नॉर्मलाइज्ड डिफरेंस वेजिटेशन इंडेक्स) समेत कई वैज्ञानिक संकेतकों का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसका उद्देश्य समय रहते किसानों को सही सलाह देना और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक कृषि योजना लागू करना है.
देश में 23 प्रतिशत कम हुई बारिश
समीक्षा बैठक में बताया गया कि 1 जून से 15 जुलाई 2026 के बीच देश में 227 मिमी बारिश दर्ज की गई, जबकि इस अवधि का सामान्य औसत 294.2 मिमी होता है. यानी इस बार अब तक 23 प्रतिशत कम वर्षा हुई है. सबसे ज्यादा 36 प्रतिशत बारिश की कमी पूर्व और पूर्वोत्तर भारत में दर्ज की गई. इसके अलावा दक्षिण भारत में 26 प्रतिशत, उत्तर-पश्चिम भारत में 19 प्रतिशत और मध्य भारत में 13 प्रतिशत कम बारिश हुई है. हालांकि, सरकार का कहना है कि 9 जुलाई तक दक्षिण-पश्चिम मॉनसून पूरे देश में पहुंच चुका है, जिससे कई इलाकों में खरीफ फसलों की बुवाई के लिए अनुकूल माहौल बना है.
उर्वरक और बीज की उपलब्धता पर भी हुई समीक्षा
बैठक में खरीफ सीजन के लिए यूरिया और दूसरे जरूरी उर्वरकों के साथ-साथ बीजों की उपलब्धता की भी समीक्षा की गई. अधिकारियों ने बताया कि किसानों की जरूरत के हिसाब से फिलहाल पर्याप्त मात्रा में उर्वरक और बीज उपलब्ध हैं. कृषि मंत्री ने निर्देश दिए कि कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके) और राज्य सरकारें जमीनी स्तर की स्थिति पर लगातार नजर रखें और समय-समय पर जानकारी देती रहें.
अगर किसी भी इलाके से उर्वरकों की कमी की शिकायत मिलती है, तो उसे तुरंत दूर किया जाए, ताकि किसानों को खेती के समय किसी तरह की परेशानी न हो और उन्हें जरूरी सामान समय पर मिल सके.
किसानों तक समय पर पहुंचे सही सलाह
बैठक के आखिर में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौसम में होने वाले हर बदलाव पर लगातार नजर रखी जाए और किसानों तक समय पर सही और वैज्ञानिक सलाह पहुंचाई जाए. उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर काम करें, आधुनिक खेती की तकनीकों को बढ़ावा दें और सरकारी योजनाओं का लाभ हर किसान तक पहुंचाएं. उन्होंने भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार किसानों के हितों की रक्षा करने, खेती को मजबूत बनाने और कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है.