तमिलनाडु में बंधक बनाए गए मजदूरों को छुड़ाया, सरकार ने 30-30 हजार रुपये सहायता राशि को मंजूरी दी
Madhy Pradesh Laborers Rescued from Tamil Nadu: मध्य प्रदेश के 24 मजदूरों को तमिलनाडु में बंधक बनाए जाने के मामले ने तूल पकड़ लिया, जिसके बाद एक्शन में आए प्रशासनिक अधिकारियों ने बंधकों को छुड़ाने की प्रक्रिया शुरू. राज्य सरकार ने मजदूरों को सहायता राशि देने की घोषणा की है.
मध्य प्रदेश के गांव के ग्रामीण तमिलनाडु के इरोड जिले में कमाने गए थे, लेकिन उन्हें वहां बंधक बनाकर काम कराया जा रहा था. इसका पता चलने पर राज्य सरकार के निर्देश पर अधिकारी एक्टिव हुए और उन्हें छुड़वाने की प्रक्रिया शुरू की गई. मजदूरों ने कहा कि होली की छुट्टी में वह घर आने के लिए मालिक से कह चुके थे, लेकिन उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और जबरन काम कराया गया है. राज्य सरकार ने सभी मजदूरों के लिए 30-30 हजार रुपये की सहायता राशि मंजूर की है.
हरदा और बेतूल जिले के मजदूरों को तमिलनाडु से छुड़ाया गया
मध्य प्रदेश सरकार की ओर से जारी बयान के अनुसार तमिलनाडु में काम करने गए कुल 24 श्रमिकों में से 4 हरदा जिले और 20 बैतूल जिले के निवासी हैं. मजदूरों के साथ ही उनके बच्चे और महिलाएं भी हैं. बैतूल के सभी श्रमिक भीमपुर ब्लॉक के काबरा, बोरकुंड, बीरपुरा और बासिंदा ग्राम के रहने वाले हैं. हरदा जिले के चार श्रमिकों को सुरक्षित पहुंचाया गया है. राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग, जिला प्रशासन तथा वनवासी कल्याण आश्रम के त्वरित एवं समन्वित प्रयासों से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया गया. सभी श्रमिकों के बैतूल रेलवे स्टेशन पहुंचने पर स्थानीय कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी एवं पुलिस अधीक्षक वीरेंद्र जैन ने स्वागत किया.
प्रशासन ने श्रमिकों को घर पहुंचाया और मदद का भरोसा दिया
स्टेशन पर सभी श्रमिकों की पहचान की गई. कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी ने श्रमिकों से बात कर उन्हें आश्वस्त किया कि प्रशासन ने उनके घर सुरक्षित पहुंचाया. उन्होंने कहा कि भविष्य में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए राजस्व, पुलिस और श्रम विभाग निरंतर उनके संपर्क में रहेंगे. साथ ही श्रम पदाधिकारी को निर्देशित किया कि श्रमिकों से संपर्क बनाए रखते हुए आर्थिक सहायता स्वीकृति हेतु आवश्यक दस्तावेज प्राप्त किए जाएं. रेलवे स्टेशन से सभी श्रमिकों को उनके गृह ग्राम तक सुरक्षित पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की गई तथा भोजन की भी व्यवस्था की गई.
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होली पर छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर काम कराया
आधिकारिक बयान में जिला श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत ने कहा कि उक्त श्रमिक काम करने के लिए तमिलनाडु के इरोड जिले गए थे, जहां होली पर्व पर अवकाश मांगने पर उन्हें छुट्टी नहीं दी गई और बंधुआ बनाकर कार्य कराया जा रहा था. मामले की जानकारी राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के सदस्य श्री प्रकाश ऊईके के जरिए मिलते ही बैतूल जिला प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए श्रम, पुलिस एवं राजस्व विभाग के संयुक्त समन्वय से इरोड जिला प्रशासन से संपर्क स्थापित किया और सभी श्रमिकों को मुक्त कराया.
मध्य प्रदेश के मजदूरों को तमिलनाडु से छुड़ाया गया.
सरकार ने श्रमिकों को 30-30 हजार रुपये की सहायता दी
रेस्क्यू किए गए प्रत्येक श्रमिक को शासन द्वारा 30-30 हजार रुपये की आर्थिक सहायता स्वीकृत की जाएगी, जिससे वे अपने जीवन को फिर से व्यवस्थित कर सकें. जिला प्रशासन की ओर से उनके पुनर्वास एवं आवश्यक सहयोग सुनिश्चित करने की भी बात कही गई है.