सरकारी आदेश- 7 दिन में हर शिकायत की जांच पूरी करनी होगी, घटिया खाद-बीज बिक्री नहीं चलेगी

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों की शिकायतों के निपटारे के लिए नई व्यवस्था लागू की है. अब खराब बीज, खाद और कीटनाशकों से जुड़ी हर शिकायत की जांच सात दिनों में होगी. दोषी कंपनियों और विक्रेताओं पर कार्रवाई होगी, जबकि तकनीकी विशेषज्ञ पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे.

नोएडा | Updated On: 19 Jul, 2026 | 01:26 PM

महाराष्ट्र सरकार ने खरीफ सीजन में किसानों को राहत देने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब बीज, उर्वरक (खाद) और कीटनाशकों की गुणवत्ता से जुड़ी किसानों की शिकायतों की जांच अधिकतम सात दिनों के भीतर पूरी की जाएगी. इसके लिए राज्य सरकार ने तहसील (तालुका) स्तर पर शिकायत निवारण समितियों का दोबारा गठन किया है. सरकार का उद्देश्य किसानों को समय पर न्याय दिलाना, जांच प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और दोषी कंपनियों व विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करना है.

7 दिन के भीतर होगा खेत का निरीक्षण और जांच

कृषि विभाग की ओर से जारी नए सरकारी आदेश के अनुसार, जैसे ही किसी किसान की शिकायत दर्ज  होगी, संबंधित तालुका शिकायत निवारण समिति को सात दिनों के भीतर खेत का निरीक्षण करना होगा. निरीक्षण के बाद तय प्रारूप में विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. सरकार का कहना है कि इस नई व्यवस्था से शिकायतों के निपटारे में होने वाली देरी कम होगी और किसानों को जल्द राहत मिल सकेगी.

तकनीकी विशेषज्ञों की मौजूदगी से होगी निष्पक्ष जांच

नई व्यवस्था के तहत तहसील कृषि अधिकारी समिति के अध्यक्ष होंगे. समिति में कृषि विश्वविद्यालय, कृषि अनुसंधान केंद्र या कृषि विज्ञान केंद्र  के प्रतिनिधि, महाबीज के अधिकारी और कृषि विभाग के अन्य विशेषज्ञ अधिकारियों को भी शामिल किया जाएगा. सरकार का मानना है कि तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी से जांच वैज्ञानिक आधार पर होगी और सही कारणों का पता लगाने में आसानी होगी. इससे किसानों और कंपनियों, दोनों के साथ निष्पक्ष व्यवहार सुनिश्चित किया जा सकेगा.

कंपनी और विक्रेता की मौजूदगी में होगी पूरी प्रक्रिया

शिकायत की जांच के दौरान संबंधित बीज, खाद या कीटनाशक कंपनी  के प्रतिनिधि और विक्रेता की मौजूदगी भी अनिवार्य होगी. किसान द्वारा प्रस्तुत खरीद रसीद (बिल) का सत्यापन किया जाएगा. इसके बाद निर्धारित प्रारूप में पंचनामा तैयार होगा और संबंधित बीज या उत्पाद के बैच का नमूना लेकर मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजा जाएगा. लैब रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि शिकायत सही है या नहीं और आगे क्या कार्रवाई की जाएगी.

दोषी कंपनियों पर होगी सख्त कार्रवाई,

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कृषि मंत्री दत्तात्रेय भरणे ने कहा कि नई व्यवस्था का मकसद किसानों की शिकायतों का निष्पक्ष और समयबद्ध समाधान करना है. यदि जांच में किसी निर्माता कंपनी या विक्रेता की गलती सामने आती है तो नियमों के अनुसार उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई  की जाएगी. उन्होंने बताया कि अगर किसी तालुका में शिकायतों की संख्या 100 से अधिक हो जाती है तो वहां अतिरिक्त शिकायत निवारण समितियां भी बनाई जाएंगी, ताकि मामलों का जल्द निपटारा हो सके.

राज्य सरकार ने सभी जिला अधीक्षक कृषि अधिकारियों को जरूरत पड़ने पर तुरंत अतिरिक्त समितियां गठित करने के निर्देश दिए हैं. साथ ही कृषि विभाग सभी शिकायतों की नियमित निगरानी करेगा. सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से किसानों को समय पर राहत मिलेगी, घटिया गुणवत्ता वाले बीज, खाद और कीटनाशकों की बिक्री पर रोक लगेगी और कृषि क्षेत्र में पारदर्शिता तथा किसानों का भरोसा दोनों मजबूत होंगे.

Published: 19 Jul, 2026 | 01:23 PM

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