अब छोटी नदियों पर फोकस! नमामि गंगे का नया प्लान बढ़ाएगा जल सुरक्षा और खेती की ताकत
देश की छोटी नदियों को पुनर्जीवित करने के लिए NMCG ने नया SRR ड्राफ्ट फ्रेमवर्क जारी किया है. इसमें स्थानीय भागीदारी, प्राकृतिक जल प्रवाह, जलग्रहण संरक्षण और गांवों की जरूरतों के अनुसार अलग रणनीति अपनाने पर जोर दिया गया है.
देश की हजारों छोटी नदियों को फिर से जीवंत बनाने की दिशा में राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) ने बड़ा कदम उठाया है. मिशन ने स्मॉल रिवर रीजुवनेशन (SRR) फ्रेमवर्क का ड्राफ्ट जारी किया है, जिसमें साफ कहा गया है कि छोटी नदियों की समस्याएं बड़ी नदियों से अलग हैं. इसलिए इनके संरक्षण और पुनर्जीवन के लिए अलग रणनीति अपनाई जाएगी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छोटी नदियां स्वस्थ रहेंगी तो गंगा, यमुना और अन्य बड़ी नदियों का जल प्रवाह भी मजबूत होगा. यही कारण है कि इस नई नीति में स्थानीय जरूरतों और प्राकृतिक परिस्थितियों को प्राथमिकता दी गई है.
गांवों की जरूरतों के हिसाब से बनेगी योजना
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान NMCG ने स्पष्ट किया कि नमामि गंगे कार्यक्रम का मॉडल छोटी नदियों पर सीधे लागू नहीं किया जाएगा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, NMCG के महानिदेशक राजीव कुमार मित्तल ने बताया कि जहां गंगा अभियान निर्मल गंगा और अविरल गंगा की अवधारणा पर आधारित है, वहीं छोटी नदियों के लिए अलग दृष्टिकोण अपनाना होगा. शहरों में छोटी नदियों के निर्बाध जल प्रवाह पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में जलग्रहण क्षेत्र का विकास, प्राकृतिक जल स्रोतों की कनेक्टिविटी बहाल करना और स्थानीय जल भंडारण क्षमता बढ़ाना प्राथमिकता होगी. इससे वर्षा जल का बेहतर उपयोग होगा और सूखे की स्थिति में भी जल उपलब्धता बनी रहेगी.
प्राकृतिक समाधान होंगे सबसे बड़ी ताकत
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, NMCG का मानना है कि छोटी नदियों का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं से संभव नहीं है. इसके लिए गांवों और स्थानीय समुदायों की सक्रिय भागीदारी जरूरी होगी. इसी सोच के तहत फ्रेमवर्क में नेचर-बेस्ड सॉल्यूशंस यानी प्राकृतिक समाधानों को सबसे अधिक महत्व दिया गया है. इसमें जलग्रहण क्षेत्र का संरक्षण, आर्द्रभूमियों (वेटलैंड्स) का विकास, बड़े पैमाने पर पौधारोपण, प्राकृतिक जल प्रवाह की बहाली और प्रदूषण नियंत्रण जैसे उपाय शामिल किए गए हैं. ये उपाय पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ कम लागत वाले भी माने जाते हैं, जिससे लंबे समय तक नदियों को संरक्षित रखने में मदद मिलेगी.
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कृषि और जल सुरक्षा को मिलेगा लाभ
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, NMCG ने बताया कि यह ड्राफ्ट पिछले डेढ़ साल में विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और विभिन्न संस्थानों के साथ हुई चर्चा के बाद तैयार किया गया है. अब इसे अंतिम रूप देने से पहले दिल्ली, पुणे और गुवाहाटी में क्षेत्रीय कार्यशालाएं आयोजित की जाएंगी, जहां राज्यों और विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएंगे. इन सुझावों के आधार पर अंतिम फ्रेमवर्क तैयार होगा. विशेषज्ञों का कहना है कि छोटी नदियां ही बड़ी नदियों की जीवनरेखा हैं. इनके संरक्षण से भूजल स्तर सुधरेगा, किसानों को सिंचाई के लिए अधिक पानी मिलेगा, ग्रामीण आजीविका मजबूत होगी और देश की जल सुरक्षा को भी नया आधार मिलेगा. यही वजह है कि छोटी नदियों के पुनर्जीवन की यह पहल आने वाले वर्षों में कृषि, पर्यावरण और जल प्रबंधन के लिए एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है.