मध्य प्रदेश के कई जिले जो जल संकट के चलते किसानों के लिए मुसीबत बने हुए थे, उन्हें भरपूर पानी मिलना शुरू हो गया है. यह सफलता मिली है राज्य की छोटी-बड़ी 250 नदियों के पुनर्जीवन और नदी जोड़ो परियोजना के जरिए. इसके नतीजे में राज्य का सिंचाई रकबा 3 साल में 8 गुना से ज्यादा बढ़ गया है. इससे बंजर और सूखे पड़े खेत भी अच्छी पैदावार देने लगे हैं, जो किसानों को आर्थिक रूप समेत मजबूत बनाने में मददगार साबित हुए हैं.
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इंदौर में बलराम कृषि महोत्सव में संबोधन के दौरान कहा कि मध्यप्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध राज्य है. प्रदेश की 250 से अधिक नदियां लाखों लोगों के जीवन को समृद्ध बनाती हैं. उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों ने नर्मदा जैसी जीवनदायिनी नदी के जल का समुचित उपयोग नहीं किया, जबकि पीएम मोदी के नेतृत्व में नर्मदा घाटी परियोजनाओं को नई गति मिली. उन्होंने कहा कि अनेक योजनाओं ने मालवा और चंबल अंचल को सिंचाई और पेयजल उपलब्ध कराया है.
8 गुना बढ़ा फसल सिंचाई क्षेत्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि नदी जोड़ो परियोजनाओं और नदियों के पुनर्जीवन देने के बाद सिंचाई रकबे में तेज बढ़ोत्तरी देखी गई है. साल 1956 से लेकर 2003 तक प्रदेश में केवल 7.5 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध थी. जबकि, बीते 3 साल में सिंचाई क्षेत्र का रकबा बढ़कर 65 लाख हेक्टेयर पहुंचा है, जो लगभग 8 गुना से ज्यादा बढ़त को दर्शाता है. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य के सिंचाई रकबे को 100 लाख हेक्टेयर पहुंचाने के लिए तेज गति से काम किया जा रहा है और जल संकट निपटारे के लिए बारिश के पानी को संचय करने के साथ ही जलाशयों, नदियों का पुनरुद्धार जारी है.
नदी जोड़ों परियोजनाओं से 13 जिलों को लाभ
मुख्यमंत्री ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना और पार्वती-कालीसिंध-चंबल (पीकेसी) परियोजना मध्यप्रदेश के जल इतिहास को बदलने का काम कर रही हैं. लगभग एक लाख करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से श्योपुर, मुरैना, भिंड, ग्वालियर, राजगढ़, शाजापुर, देवास, उज्जैन, नीमच, मंदसौर सहित 13 जिलों को सिंचाई और पेयजल का लाभ मिलेगा. इससे पश्चिमी मध्यप्रदेश और मालवा क्षेत्र को भी बड़ी राहत मिलेगी.
उपज को खेत से बाजार तक ले जाने की तैयारी
सिंचाई सुविधाएं बेहतर होने से खेती का रकबा भी बढ़ा है और बंजर, सूखी धरती भी अनाज उगल रही है. मुख्यमंत्री डॉ यादव ने कहा कि सरकार खेती को केवल उत्पादन तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि खेत से कारखाने और कारखाने से बाजार तक संपूर्ण कृषि अर्थव्यवस्था विकसित की जा रही है. प्रदेश में तेजी से फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाई जा रही हैं. हाल ही में उज्जैन में 1250 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित आलू प्रॉसेसिंग यूनिट लगाई गई है, जिससे 32 जिलों के किसानों की आलू खरीद की जाएगी. इसी तरह इंदौर, आगर, उज्जैन सहित अनेक जिलों में कृषि आधारित उद्योग स्थापित किए जा रहे हैं.