कृषि मंत्री बोले- बिहार में नहीं है उर्वरक की कमी, जमाखोरी के खिलाफ सख्त एक्शन.. 115 FIR दर्ज
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि वर्ष 2025-26 में (20 मार्च 2026 तक) उर्वरक से जुड़ी गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई की गई है. इस दौरान 115 उर्वरक दुकानों पर एफआईआर दर्ज की गई और 449 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं. कालाबाजारी रोकने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक उड़नदस्ता टीम बनाई गई है.
Bihar News: बिहार के किसानों को उर्वरक को लेकर कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है. राज्य सरकार का कहना है कि प्रदेश में किसी तरह की खाद की कोई किल्लत नहीं है. अभी सरकार के पास प्रयाप्त मात्रा में यूरिया, डीएमपी, एमपीके, एमओपी और एसएसपी मौजूद हैं. इसलिए प्रदेश के किसान खाद को लेकर निश्चिंत रहें. प्रदेश के कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि बिहार सरकार उर्वरकों की कालाबाजारी, जमाखोरी और ज्यादा कीमत पर बिक्री को रोकने के लिए पूरी तरह सख्त है. उन्होंने साफ किया कि राज्य के किसी भी जिले में खाद की कमी नहीं है और किसानों को पर्याप्त मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया जा रहा है.
कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने बताया कि वर्ष 2025-26 में (20 मार्च 2026 तक) उर्वरक से जुड़ी गड़बड़ियों पर सख्त कार्रवाई की गई है. इस दौरान 115 उर्वरक दुकानों पर एफआईआर दर्ज की गई और 449 प्रतिष्ठानों के लाइसेंस रद्द किए गए हैं. कालाबाजारी रोकने के लिए मुख्यालय स्तर पर एक उड़नदस्ता टीम बनाई गई है, जो शिकायत मिलने पर लगातार छापेमारी कर रही है. उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में पर्याप्त उर्वरक स्टॉक उपलब्ध है.
स्टॉक में अभी कितनी बची है कौन सी खाद
- यूरिया- 2.45 लाख मीट्रिक टन
- डीएपी- 1.46 लाख मीट्रिक टन
- एनपीके- 2.05 लाख मीट्रिक टन
- एमओपी- 0.41 लाख मीट्रिक टन
- एसएसपी- 1.03 लाख मीट्रिक टन
जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई
कृषि मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हर प्रखंड की जरूरत के हिसाब से उर्वरक का सही वितरण किया जाए, ताकि कहीं भी कमी न हो. उन्होंने कहा कि दुकानों में पॉस मशीन पर दर्ज स्टॉक और असली स्टॉक का नियमित मिलान किया जाए. अगर किसी तरह की गड़बड़ी मिलती है, तो जीरो टॉलरेंस नीति के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी.
सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है
मंत्री ने सभी जिलों में जांच टीमें बनाकर नियमित छापेमारी और निरीक्षण करने के निर्देश दिए हैं. खासकर सीमा से सटे जिलों में कार्रवाई तेज करने और सशस्त्र सीमा बल के साथ मिलकर उर्वरक तस्करी रोकने को कहा गया है. उन्होंने कहा कि सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है और किसी भी गड़बड़ी को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
बिहार में हर साल करीब 40 लाख टन खाद की जरूरत
बता दें कि बिहार में हर साल करीब 40 लाख टन खाद की जरूरत होती है, जिसमें लगभग 30 लाख टन सिर्फ यूरिया की खपत होती है. खासकर रबी सीजन में गेहूं, मक्का और खरीफ सीजन के लिए धान, मक्का दोनों में ही यूरिया, डीएपी और एमओपी जैसे उर्वरकों की काफी ज्यादा मांग रहती है. इस जरूरत को पूरा करने के लिए केंद्र सरकार एकीकृत उर्वरक निगरानी प्रणाली (iFMS) के जरिए सप्लाई पर नजर रखती है. रबी सीजन (अक्टूबर से मार्च) में खासकर गेहूं की खेती के लिए यूरिया की सबसे ज्यादा खपत होती है, जबकि खरीफ सीजन (अप्रैल से सितंबर) में धान की रोपाई के कारण यूरिया और डीएपी दोनों की मांग लगभग उतनी ही बनी रहती है. समय पर खाद की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार नियमित रूप से साप्ताहिक समीक्षा भी करती है.