बासमती एक्सपोर्ट को बड़ा झटका! शिपिंग चार्ज में बढ़ोत्तरी से व्यापारियों कॉस्ट में इजाफा, घटा मुनाफा

ईरान युद्ध के चलते शिपिंग चार्ज अचानक बढ़ गए हैं, जिससे बासमती चावल के निर्यातकों को भारी नुकसान हो रहा है. बिना जानकारी शुल्क बढ़ने और रूट बदलने से व्यापार प्रभावित हुआ है. छोटे व्यापारी सबसे ज्यादा परेशान हैं और सरकार से तुरंत राहत की मांग कर रहे हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 29 Apr, 2026 | 06:00 AM

Basmati Export: ईरान और पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव का असर अब भारत के बासमती चावल व्यापार पर साफ दिखने लगा है. अचानक बढ़े शिपिंग चार्ज और नए-नए शुल्क लगने से एक्सपोर्टर्स परेशान हैं. हालात ऐसे हो गए हैं कि कई व्यापारियों के लिए विदेशों में चावल भेजना घाटे का सौदा बनता जा रहा है. बासमती राइस फार्मर्स एंड एक्सपोर्टर्स डेवलपमेंट फोरम (BRFEDF) ने केंद्र सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. ऐसे में निर्यातकों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान नहीं हुआ, तो भारत के समुद्री व्यापार पर इसका गलत असर पड़ सकता है.

बढ़ते शिपिंग चार्ज ने बढ़ाई मुश्किल

बासमती चावल  के निर्यातकों का कहना है कि जहाज कंपनियां अचानक वॉर-रिस्क चार्ज लगा रही हैं. ये चार्ज एक कंटेनर पर करीब 75 हजार रुपये से लेकर 5 लाख 65 हजार रुपये तक पहुंच गया है. सबसे बड़ी समस्या ये है कि ये शुल्क पहले से नहीं बताए जाते, बल्कि बाद में जोड़ दिए जाते हैं. कई बार तो ऐसा भी हुआ है कि माल भेजने के बाद चार्ज बढ़ा दिया गया. इससे व्यापारियों का बजट बिगड़ जाता है और उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ता है. कुछ मामलों में तो कुल चार्ज माल की कीमत का 60-70 फीसदी तक पहुंच गया है, जो किसी भी व्यापार के लिए बहुत बड़ा झटका है.

बिना जानकारी लिए बदले जा रहे रूट

निर्यातकों ने ये भी बताया कि शिपिंग कंपनियां  बिना पूछे ही माल के रूट बदल रही हैं. जहाजों को जिबेल अली, सोहर और सलालाह जैसे पोर्ट्स पर भेजा जा रहा है. कई बार कंटेनर बीच रास्ते में ही रोक दिए जाते हैं और आगे कब जाएंगे, इसकी कोई जानकारी नहीं दी जाती. कुछ मामलों में तो कंटेनर वापस भारत भी भेज दिए गए हैं. इन सभी फैसलों में व्यापारियों की कोई भूमिका नहीं होती, लेकिन खर्च उन्हें ही उठाना पड़ता है. इससे उनका भरोसा भी कमजोर हो रहा है और व्यापार में अनिश्चितता बढ़ रही है.

छोटे व्यापारियों पर सबसे ज्यादा असर

इस पूरे मामले में छोटे निर्यातक सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. बड़े शिपिंग कंपनियों के सामने उनकी कोई खास ताकत नहीं होती, इसलिए वे इन चार्जेस का विरोध भी नहीं कर पाते. कई छोटे व्यापारियों ने बताया कि लगातार बढ़ते खर्च की वजह से उन्हें अपना माल छोड़ने तक का विचार करना पड़ा. यानी नुकसान इतना ज्यादा हो रहा है कि माल बेचने से बेहतर उसे छोड़ देना लग रहा है. इससे न सिर्फ व्यापारियों को नुकसान  हो रहा है, बल्कि देश के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है.

सरकार से सख्त कदम उठाने की मांग

बासमती राइस फार्मर्स एंड एक्सपोर्टर्स डेवलपमेंट फोरम (BRFEDF) ने सरकार से इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप की मांग की है. उनका कहना है कि शिपिंग चार्ज केवल दी गई सेवाओं के हिसाब से ही लिए जाने चाहिए. इसके अलावा, कंटेनर रिलीज करने को किसी विवादित फीस से नहीं जोड़ा जाना चाहिए और ऐसे हालात में साफ नियम बनाए जाने चाहिए. फोरम ने ये भी बताया कि डायरेक्टरेट जनरल ऑफ शिपिंग ने शिकायतों को दर्ज कर लिया है, लेकिन जमीन पर अभी भी स्थिति बहुत कठिन बनी हुई है.

भविष्य में व्यापार पर पड़ सकता है असर

निर्यातकों का कहना है कि अगर जल्द ही इस समस्या का समाधान  नहीं हुआ, तो भारत के समुद्री व्यापार पर इसका गलत असर पड़ सकता है. व्यापारियों का भरोसा टूटेगा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की छवि भी प्रभावित हो सकती है. फिलहाल, सभी की नजर सरकार के फैसले पर टिकी है. अगर समय रहते कदम उठाए गए, तो व्यापार को राहत मिल सकती है, वरना आने वाले समय में यह समस्या और भी गंभीर बन सकती है.

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Published: 29 Apr, 2026 | 06:00 AM
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