40 दिन से धान बिक्री के इंतजार में किसान की मौत, सीएम के इस्तीफे को लेकर विधानसभा में हंगामा
धान किसान की मौत का मामला विधानसभा में गरमा गया. बीजू जनता दल के विधायकों ने जोरदार हंगामा किया और मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी से इस्तीफा मांगा है. वहीं, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष ने कहा कि लगभग 50 फीसदी किसानों को अपना धान 1,800 रुपये में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है.
ओडिशा में सरकारी खरीद केंद्र पर अपनी धान की बिक्री के लिए 40 दिनों से इंतजार कर रहे किसान त्रिलोचन नायक की मौत हो गई. किसान को खरीद केंद्र से चावल मिल भेजकर परेशान किया गया है और वहां बोरी उतराई 3000 हजार रुपये वसूले गए. जबकि, कटनी-छंटनी के नाम प्रति क्विंटल 6 किलो धान मिल मालिक ने काट ली थी. किसान की मौत के बाद से राज्य में कई जगह पर किसानों ने विरोध प्रदर्शन किया है. जबकि, विधानसभा में बीजू जनता दल के विधायकों ने सीएम मोहन चरन मांझी का इस्तीफा मांगा और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की. वहीं, कांग्रेस ने भाजपा शासित सरकार पर आरोप लगाया है कि किसानों को करीब 600 रुपये कम दाम पर बेचने का दबाव बनाया जा रहा है. धान किसान की मौत के बाद राज्य में सियासी पारा चढ़ गया है.
सरकारी खरीद केंद्र ने 40 दिन तक किसान को टरकाया
ओडिशा में केंद्रपाड़ा जिले के राजनगर ब्लॉक के जूनागड़ी गांव के 53 वर्षीय किसान त्रिलोचन नायक की कथित तौर पर धान बेचने के दौरान लंबे समय तक परेशान किए जाने के बाद दिल का दौरा पड़ने से 26 फरवरी को मौत हो गई. पीटीआई ने परिजनों के हवाले रिपोर्ट में लिखा है कि किसान को 16 जनवरी को एक मैसेज मिला था जिसमें उसे अपना धान लोकल मंडी में बेचने के लिए कहा गया था. इसके बाद किसान को लगभग 40 दिनों तक डांगमल प्राइमरी एग्रीकल्चर कोऑपरेटिव सोसाइटी (PACS) के बार-बार चक्कर लगाने पड़े और प्रक्रियागत दिक्कतों का सामना करना पड़ा.
चावल मिल ने भी 3 दिनों तक रोके रखा और बोरी उतराई 3 हजार रुपये लिए
सरकारी निर्देशों का पालन करने के बावजूद किसान त्रिलोचन को कथित तौर पर अपनी उपज को एक चावल मिल में ले जाने का निर्देश दिया गया. नौ क्विंटल धान लेकर किसान बिना ठीक से खाना-पानी के तीन दिनों तक मिल में इंतजार करता रहा. परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि मिलर ने “कटनी छंटनी” के नाम पर प्रति क्विंटल 6 किलो धान काट लिया, इसके अलावा तीन अतिरिक्त क्विंटल धान ले लिया. इतना ही नहीं धान उतारने के खर्च के लिए 3,000 रुपये भी किसान से वसूल लिए.
किसान ने अपनी धान फसल की कटाई और ट्रांसपोर्ट पर पहले ही करीब 18,000 रुपये खर्च कर चुका था. कथित कटौतियों और पैसे की तंगी से परेशान होकर त्रिलोचन घर लौट आया, जहां उसे कार्डियक अरेस्ट हुआ. उसके परिवार ने राइस मिलर और कोऑपरेटिव सोसाइटी के अधिकारियों पर लापरवाही और परेशान करने का आरोप लगाया है, और उन्हें उसकी मौत के लिए जिम्मेदार ठहराया है.
किसानों का जोरदार प्रदर्शन और खरीद प्रक्रिया पर उठाए सवाल
किसान की मौत का पता चलते ही अन्य किसानों ने हंगामा किया है और कई इलाकों में धान खरीद केंद्र पर विरोध प्रदर्शन किया है. केंद्रपाड़ा के कलेक्टर रघुराम आर अय्यर ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. इस बीच केंद्रपाड़ा जिले में चिंता बनी हुई है क्योंकि अभी भी हजारों धान के बोरे खुले मंडियों में पड़े हैं, और किसान अपनी उपज बेचने के लिए लंबे समय तक इंतजार कर रहे हैं. किसानों ने आरोप लगाया है कि मिलर अक्सर “कटनी छंटनी” की विवादित प्रथा का सहारा लेते हैं, जिसमें वे सिर्फ 80-90 फीसदी उपज खरीदते हैं और बाकी को रिजेक्ट कर देते हैं, जिससे पैसे का नुकसान होता है.
Bhubaneswar, Odisha: Pradesh Congress Committee (PCC) President Bhakta Charan Das says, “…Nearly 50% of the farmers were forced to sell their paddy at ₹1,800 instead of ₹2,100. There can be no greater injustice or wrongdoing than this. What kind of government is this?…” pic.twitter.com/TcCD5yiGPD
— IANS (@ians_india) February 21, 2026
किसान की मौत का मामला विधानसभा में गरमाया, विधायकों ने की नारेबाजी
धान किसान की मौत के बाद राज्य में धान खरीद को लेकर सियासत गरम हो गई है. बीजू जनता दल के विधायकों ने आज विधानसभा में जोरदार हंगामा किया और मुख्यमंत्री मोहन चरण मांझी से इस्तीफा मांगा है. बीजेडी विधायक हंगामा करते हुए वेल की तरफ एकजुट हो गए और नारेबाजी की. वहीं, ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने कहा कि लगभग 50 फीसदी किसानों को अपना धान 1,800 रुपये में बेचने के लिए मजबूर होना पड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों के साथ इससे बड़ा अन्याय या गलत काम और कुछ नहीं हो सकता.