धान खरीद विवाद के बीच सरकार का बड़ा फैसला, टोकन की वैधता अब 15 दिन और बढ़ी

सरकार का कहना है कि धान खरीद पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है. मंडियों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं. टोकन प्रणाली को व्यवस्थित करने और किसानों को समय पर सूचना देने के लिए तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 26 Feb, 2026 | 11:15 AM

Odisha paddy procurement: ओडिशा में धान खरीद को लेकर पिछले कुछ दिनों से सियासी और सामाजिक माहौल गरमाया हुआ है. मंडियों में अव्यवस्था, टोकन की समय सीमा और भुगतान में देरी जैसे मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा था. इसी बीच राज्य के खाद्य आपूर्ति और उपभोक्ता कल्याण मंत्री के सी पात्रा ने विधानसभा में स्पष्ट घोषणा करते हुए कहा कि सरकार 31 मार्च तक सभी पंजीकृत किसानों से धान खरीदेगी. इस बयान के बाद किसानों और जनप्रतिनिधियों के बीच चल रही अनिश्चितता को कुछ हद तक विराम मिला है.

विधानसभा में सरकार का भरोसा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में धान खरीद में कथित कुप्रबंधन को लेकर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान मंत्री के सी पात्रा ने कहा कि सरकार पूरी तरह से किसानों के साथ खड़ी है और खरीफ विपणन सत्र खत्म होने तक एक भी पंजीकृत किसान का धान बिना खरीदे नहीं छोड़ा जाएगा. उन्होंने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि किसानों को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है, जबकि वास्तविकता यह है कि खरीद प्रक्रिया लगातार जारी है.

मंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि 31 मार्च तक सभी पंजीकृत किसानों को अपना धान बेचने का अवसर मिलेगा. उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार की प्राथमिकता किसानों को समय पर भुगतान और पारदर्शी खरीद व्यवस्था उपलब्ध कराना है.

पिछले साल का रिकॉर्ड और इस साल की स्थिति

सरकार ने पिछले वर्ष के आंकड़े भी साझा किए. वर्ष 2024-25 में राज्य ने 19.73 लाख किसानों से 92.64 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद की थी. इसके बदले किसानों को 28,619 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया. सरकार का दावा है कि यह भुगतान सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजा गया, जिससे बिचौलियों की भूमिका कम हुई.

चालू सत्र में भी बड़ी संख्या में किसानों ने पंजीकरण कराया है. मंत्री के अनुसार इस बार 19.68 लाख से अधिक किसानों ने धान बेचने के लिए पंजीकरण किया है. अब तक 64 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान की खरीद हो चुकी है. सरकार का लक्ष्य है कि शेष धान की खरीद भी तय समय सीमा के भीतर पूरी कर ली जाए.

विपक्ष के आरोप और सरकार की सफाई

धान खरीद को लेकर विधानसभा में तीखी बहस भी देखने को मिली. कांग्रेस सदस्य ताराप्रसाद बहिनीपति ने सरकार पर किसानों की समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि मंडियों में अव्यवस्था और टोकन प्रणाली की खामियों के कारण किसान परेशान हो रहे हैं.

सरकार की ओर से जवाब देते हुए मंत्री के सी पात्रा ने कहा कि धान खरीद प्रक्रिया की निगरानी लगातार की जा रही है. उन्होंने यह भी कहा कि पिछली बीजद सरकार के दौरान भी किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ा था, इसलिए वर्तमान सरकार पर ही दोष मढ़ना उचित नहीं है.

खरीद प्रक्रिया को लेकर क्या कदम

सरकार का कहना है कि धान खरीद पूरी पारदर्शिता के साथ की जा रही है. मंडियों में व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए जिला प्रशासन को निर्देश दिए गए हैं. टोकन प्रणाली को व्यवस्थित करने और किसानों को समय पर सूचना देने के लिए तकनीकी माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी किसान को धान बेचने में दिक्कत आती है तो उसकी शिकायत का समाधान प्राथमिकता से किया जाएगा. भुगतान प्रक्रिया को तेज करने के लिए बैंकिंग व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है, ताकि किसानों को लंबा इंतजार न करना पड़े.

किसानों की उम्मीदें और आगे की राह

धान ओडिशा के किसानों की प्रमुख फसल है और राज्य की अर्थव्यवस्था में इसकी अहम भूमिका है. ऐसे में धान खरीद को लेकर किसी भी तरह की अनिश्चितता किसानों के लिए चिंता का विषय बन जाती है. मंत्री की घोषणा के बाद किसानों में उम्मीद जगी है कि उनका धान समय पर खरीदा जाएगा और उन्हें उचित भुगतान मिलेगा.

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