किसानों को राहत! सरकार ने बढ़ाया प्याज खरीद रेट.. अब 2125 रुपये क्विंटल मिलेगा भाव

सरकार ने प्याज की खरीद कीमत में 13 फीसदी की बढ़ोतरी कर इसे 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया है. इस फैसले से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और बफर स्टॉक मजबूत होगा. उत्पादन स्थिर है, लेकिन बाजार में हल्के उतार-चढ़ाव और मौसमी प्रभाव देखने को मिल सकते हैं.

नोएडा | Updated On: 4 Jul, 2026 | 03:39 PM

Onion Price Hike: देश के प्याज किसानों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है. सरकार ने मूल्य स्थिरीकरण बफर के तहत प्याज की खरीद कीमत में 13 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी है. अब प्याज की खरीद दर 1,875 रुपये प्रति क्विंटल से बढ़कर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल हो गई है. यह नया रेट 4 जुलाई 2026 से लागू हो गया है. इस फैसले से किसानों को बेहतर दाम मिलने की उम्मीद है और सरकारी बफर स्टॉक को भी मजबूती मिलेगी.

किसानों को मिलेगा सीधा फायदा, बढ़ी खरीद कीमत लागू

सरकार के इस फैसले से प्याज उत्पादक किसानों  को सीधा लाभ मिलेगा. NAFED और NCCF के माध्यम से प्याज की खरीद जारी रहेगी. बढ़ी हुई कीमत के चलते किसानों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा, जिससे उनकी आय में सुधार होने की उम्मीद है. सरकार का कहना है कि यह कदम किसानों को बाजार में उतार-चढ़ाव से सुरक्षा देने के लिए लिया गया है.

उत्पादन स्थिर, लेकिन उपलब्धता को लेकर चिंता नहीं

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग  के अनुसार वर्ष 2025-26 में प्याज का उत्पादन 307.37 लाख मीट्रिक टन रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष के 307.67 लाख मीट्रिक टन के लगभग बराबर है. इसका मतलब है कि उत्पादन स्तर स्थिर है और देश में प्याज की कुल उपलब्धता फिलहाल चिंता का विषय नहीं है. हालांकि मौसम और बाजार के कारण हल्की कीमतों में उतार-चढ़ाव संभव है.

बाजार में आवक मजबूत, कीमतों में स्थिरता का संकेत

अखिल भारतीय स्तर पर प्याज की दैनिक मंडी आवक 50,000 मीट्रिक टन से अधिक बनी हुई है, जबकि महाराष्ट्र में यह 30,000 मीट्रिक टन से ऊपर है. खुदरा बाजार में औसत कीमत लगभग 18 रुपये प्रति किलो दर्ज की जा रही है. वहीं अखिल भारतीय औसत खुदरा मूल्य करीब 31 रुपये प्रति किलो है. विशेषज्ञों का मानना है कि पर्याप्त स्टॉक  और नियमित आवक से बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है.

निर्यात और बुवाई पर असर, लेकिन स्थिति नियंत्रण में

जून 2026 में लगभग 1.50 लाख मीट्रिक टन प्याज का निर्यात  हुआ है. हालांकि आने वाले समय में निर्यात की गति थोड़ी धीमी हो सकती है, क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान और चीन की फसलें प्रतिस्पर्धी दरों पर उपलब्ध हैं. वहीं महाराष्ट्र के नासिक क्षेत्र में खरीफ बुवाई में लगभग 15 दिन की देरी देखी गई है, जबकि कर्नाटक के कुछ हिस्सों में बुवाई लगभग 60% तक पूरी हो चुकी है. इसके बावजूद विशेषज्ञों का कहना है कि स्थिति नियंत्रण में है और आपूर्ति व्यवस्था पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा.

Published: 4 Jul, 2026 | 02:16 PM

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