यूएस ट्रेड डील के खिलाफ संयुक्त संघर्ष का ऐलान, 100 से ज्यादा किसान संगठन एक हुए.. 1 जुलाई को आंदोलन पर निर्णय होगा

farmer unions unite against india US trade deal : किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि देश की कृषि, पशुपालन, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि सरकार किसानों और मजदूरों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो संयुक्त मोर्चा देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 25 Jun, 2026 | 08:18 PM

किसान संगठनों ने भारता अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ लंबी लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है. भारतीय किसान यूनियन चढूनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष गुरनाम सिंह चढूनी के आह्वान पर और किसान मजदूर मोर्चा के नेतृत्व में देशभर के 100 से ज्यादा किसान संगठनों के नेताओं ने अपने मतभेद भुलाकर चंडीगढ़ के किसान भवन में एकजुट हुए. बैठक में किसानों नेताओं ने संयुक्त संघर्ष का ऐलान किया है. किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि देश की कृषि, पशुपालन, खाद्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि सरकार किसानों और मजदूरों को नजरअंदाज करती है, तो संयुक्त मोर्चा देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा.

अमेरिकी समझौते के खिलाफ संयुक्त संघर्ष का ऐलान

चंडीगढ़ के किसान भवन में देशभर के विभिन्न किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठन आपसी मतभेद भुलाकर इकट्ठा हुए. बैठक में भारत-अमेरिका प्रस्तावित ट्रेड डील के किसानों, मजदूरों, पशुपालकों, छोटे व्यापारियों तथा देश की खाद्य एवं आर्थिक संप्रभुता पर पड़ने वाले संभावित दुष्प्रभावों पर गंभीर चर्चा की गई. सभी संगठनों ने एकमत से निर्णय लिया कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील के खिलाफ व्यापक स्तर पर संयुक्त संघर्ष चलाया जाएगा.

किसानों की नहीं सुनी गई तो देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

वक्ताओं ने कहा कि यह डील देश के किसानों, पशुपालकों, मजदूरों, छोटे व्यापारियों तथा आम जनता के हितों के लिए गंभीर खतरा बन सकती है. इसलिए सभी संगठन अपने मतभेदों को भुलाकर एक मंच पर आकर इस लड़ाई को मजबूती से लड़ेंगे. किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा कि देश की कृषि, पशुपालन, रोजगार, खाद्य सुरक्षा तथा आर्थिक संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा. यदि सरकार किसानों और मजदूरों की चिंताओं को नजरअंदाज करती है, तो संयुक्त मोर्चा देशव्यापी आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए बाध्य होगा.

1 जुलाई को आंदोलन के साथ आगे की रणनीति पर निर्णय होगा

यह भी निर्णय लिया गया कि जो किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठन अथवा उनके प्रतिनिधि किसी कारणवश आज की बैठक में शामिल नहीं हो सके, वे सब 1 जुलाई 2026 की बैठक में जरूर पहुंचे ताकि अधिक से अधिक संगठनों को एक मंच पर लाकर व्यापक, मजबूत और प्रभावी संयुक्त संघर्ष की रणनीति तैयार की जा सके. बैठक में निर्णय लिया गया है कि 1 जुलाई को अगली बैठक में देशव्यापी आंदोलन पर निर्णय लिया जाएगा.

मतभेद भुलाकर एक मंच पर आए ये संगठन और नेता

बैठक में एसकेएम (गैर-राजनीतिक), एकेएमएम (गैर-राजनीतिक), ऑल इंडिया एमएसपी मोर्चा, आजाद किसान मोर्चा, किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा हरियाणा, किसान मजदूर मोर्चा (KMM), संयुक्त किसान मोर्चा (SKM), राष्ट्रीय किसान महासंघ, किसान महापंचायत, आजाद किसान मोर्चा, एसकेएम गैर राजनीतिक हरदो झंडे सहित विभिन्न किसान, मजदूर एवं सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.

बैठक में प्रमुख रूप से सरदार वी.एम. सिंह, डॉ. बलबीर सिंह राजेवाल, प्रकाश पोहरे, गुरनाम सिंह चढूनी, बिजू, अनिल तालियान, सुखविंदर सिंह खोसा, सुरजीत सिंह फूल, राजेश धाकड़, स्वामी हर्षानंद जी योगाचार्य, संत गोपालदास, जाट धर्मशाला प्रधान कृष्ण श्योकंद, टीम कक्का, एडवोकेट बलराज मलिक, रमिंदर सिंह (पटियाला), मनोज त्यागी सहित अनेक वरिष्ठ किसान, मजदूर, सामाजिक एवं जनआंदोलन से जुड़े नेता इकट्ठे हुए समझौते के विरोध को समर्थन दिया.

इसके अलावा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, महाराष्ट्र, केरल, ओडिशा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश सहित देश के अनेक राज्यों से किसान प्रतिनिधि बैठक में उपस्थित रहे.

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