Paddy Scam: हरियाणा में धान घोटाला, 5.80 करोड़ रुपये की खेप गायब.. FIR दर्ज
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में पेहोवा की चौधरी राइस मिल से 5.80 करोड़ रुपये की धान की खेप गायब मिली. MSP कमेटी के सदस्य गुणी प्रकाश ने कहा कि आढ़ती, मंडी अधिकारी और खरीद एजेंसियां फर्जी और आढ़ती किसान बनाकर करोड़ों का घोटाला कर रहे हैं. सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए.
Haryana News: हरियाणा में धान घोटाले के मामले कम होने के नाम नहीं ले रहे हैं. अब कुरुक्षेत्र पुलिस ने पेहोवा में एक चावल मिल के खिलाफ मामला दर्ज किया है, क्योंकि फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान लगभग 5.80 करोड़ रुपये की धान की खेप गायब मिली. एफआईआर एक DFSC अधिकारी की शिकायत पर दर्ज की गई है. 2025-26 खरीफ मौसम में चौधरी राइस मिल को 39,373.75 क्विंटल धान कस्टम मिलिंग के लिए आवंटित किया गया था. विभाग समय-समय पर स्टॉक की फिजिकल जांच करता रहा. पहली जांच 25 नवंबर को हुई थी, जिसमें स्टॉक पूरा पाया गया. इसके बाद FCI की टीम ने भी जांच की और स्टॉक ठीक पाया.
वहीं, एमएसपी कमेटी के सदस्य और भारतीय किसान यूनियन (मान) के पूर्व हरियाणा अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि आढ़ती, मंडी अधिकारी और खरीद एजेंसियां मिलकर कई सालों से धान घोटाला कर रहे थे, लेकिन यह मामला अब सामने आया है. उन्होंने आरोप लगाया कि फर्जी किसानों के नाम पर धान खरीद के नकली गेट पास और रसीदें बनाकर करोड़ों रुपये का घोटाला किया जाता था. उन्होंने कहा कि ऐसे घोटालों पर रोक लगाने के लिए सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. साथ ही, निजी कंपनियों को भी धान खरीद में शामिल करने की अनुमति देनी चाहिए, जिससे मंडियों में धान का भाव एमएसपी से ऊपर जा सकता है.
द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, 17 मार्च को की गई फिजिकल वेरिफिकेशन में लगभग 24,318.75 क्विंटल धान गायब पाया गया, जिसकी कीमत लगभग 5.80 करोड़ रुपये है. यह धान कस्टम मिलिंग के बाद FCI को सौंपा जाना था. पेहोवा सदर पुलिस स्टेशन में चावल मिलर भजन सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी और विश्वासघात के मामलों में एफआईआर दर्ज की गई है और जांच जारी है. इसी बीच जिला खाद्य और आपूर्ति नियंत्रक (DFSC) ने खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के एक निरीक्षक और सहायक अधिकारी (AFSO) को ड्यूटी में कथित लापरवाही के लिए नोटिस भेजा है.
चावल मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन रिपोर्ट जमा नहीं की
नोटिस के अनुसार, दोनों अधिकारियों ने चावल मिल की फिजिकल वेरिफिकेशन की पखवाड़ेवार रिपोर्ट जमा नहीं की, जो गंभीर लापरवाही मानी गई. DFSC ने अधिकारियों को 24 मार्च तक अपनी स्थिति स्पष्ट करने का निर्देश दिया है. अधिकारी ने कहा कि अगर अधिकारियों के जवाब संतोषजनक नहीं पाए गए, तो उनके खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी.
क्या बोले किसान नेता
इस बीच, भारतीय किसान यूनियन (पेहोवा) के प्रवक्ता प्रिंस वारैच ने कहा कि धान खरीद सीजन में हमने कुरुक्षेत्र में धान घोटाले का मुद्दा उठाया था. हमने कमीशन एजेंट, चावल मिलर और घोटाले में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. उन्होंने कहा कि फिजिकल वेरिफिकेशन के दौरान मिल से बड़ी मात्रा में धान गायब पाया गया, जिससे हमारी बात सही साबित हुई. वारैच ने आगे कहा कि हमें पता चला है कि नकली गेट पास जारी किए गए और अधिकारियों की इसमें भूमिका थी. विभाग को सभी चावल मिलों की जांच करनी चाहिए. सरकार को SIT बनाकर घोटाले में शामिल सभी लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए.
अनाज मंडी सचिव आशा रानी के ऊपर केस दर्ज
बता दें कि पिछले साल नवंबर महीने में भी करनाल जिले में धान खरीद के दौरान अनियमितताओं की खबर आने के बाद करनाल सिटी पुलिस थाने में अनाज मंडी सचिव आशा रानी, राजेंद्र कुमार, अमित कुमार और अजय कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी. यह शिकायत मंडी बोर्ड के जिला प्रबंधक (डीएमईओ) ईश्वर सिंह ने की थी. एफआईआर भारतीय दंड संहिता (BNS) की धारा 318(4) के तहत दर्ज की गई थी.