Haryana Paddy Farming: हरियाणा में 15 जून से धान की रोपाई आधिकारिक रूप से शुरू गई. इसके साथ ही प्रदेश में कृषि गतिविधियों में तेजी आई है. किसान अपने खेतों में धान की पौध लगाना शुरू कर चुके हैं और अच्छी पैदावार की उम्मीद के साथ समय पर रोपाई पूरी करने में जुटे हैं. गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेत अब धीरे-धीरे हरे-भरे नजर आने लगे हैं. हालांकि, इस सीजन में धान के कुल रकबे का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा परंपरागत (परमल/PR) किस्मों के तहत रहेगा, जबकि बाकी 50 प्रतिशत क्षेत्र में बासमती धान की खेती की जाएगी. ऐसे राज्य सरकार ने इस सीजन में करीब 15.60 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य रखा है.
कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अनुसार, करनाल को सबसे अधिक 1.85 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य दिया गया है. इसके बाद कैथल (1.65 लाख हेक्टेयर), जींद (1.50 लाख हेक्टेयर), सिरसा (1.45 लाख हेक्टेयर), फतेहाबाद (1.35 लाख हेक्टेयर), कुरुक्षेत्र (1.20 लाख हेक्टेयर) और हिसार (1.05 लाख हेक्टेयर) का स्थान है. वहीं, यमुनानगर, अंबाला और सोनीपत में 90-90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की खेती का लक्ष्य निर्धारित किया गया है.
50 प्रतिशत क्षेत्र में बासमती धान की खेती
कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि इस सीजन में धान के कुल रकबे का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा परंपरागत (परमल/PR) किस्मों के तहत रहेगा, जबकि बाकी 50 प्रतिशत क्षेत्र में बासमती धान की खेती की जाएगी. परमल किस्मों की खरीद सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर करती है, जबकि बासमती की खरीद निजी व्यापारी निर्यात और घरेलू बाजार के लिए करते हैं. किसानों के बीच PR-114, PR-126 और PR-131 जैसी परमल किस्मों के साथ-साथ PR-7501 और PR-2222 जैसी हाइब्रिड किस्में लोकप्रिय हैं. वहीं, बासमती धान में पूसा बासमती-1509, पूसा-1121, पूसा-1718 और पूसा-1692 की मांग सबसे अधिक देखी जा रही है.
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वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को दे रहे जानकारी
वहीं, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अधिकारी और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के वैज्ञानिक गांव-गांव जाकर किसानों को फसल प्रबंधन, उर्वरकों व जैविक खाद के संतुलित उपयोग तथा जल संरक्षण के तरीकों की जानकारी दे रहे हैं. कृषि विभाग के उपनिदेशक (DDA) डॉ. वजीर सिंह ने ‘द ट्रिब्यून’ से कहा कि पूरे सीजन के दौरान किसानों की मदद के लिए विभागीय कर्मचारियों और तकनीकी विशेषज्ञों को तैनात किया गया है. उन्होंने कहा कि एसडीओ, ब्लॉक कृषि अधिकारी, कृषि विकास अधिकारी और अन्य विशेषज्ञ नियमित रूप से गांवों का दौरा कर किसानों को जरूरी सलाह और सहायता दे रहे हैं.
DSR तकनीक से किसान करे खेती
डॉ. सिंह ने कहा कि करनाल धान उत्पादन के मामले में हरियाणा के प्रमुख जिलों में शामिल है. पारंपरिक रोपाई के साथ-साथ किसान अब डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) तकनीक को भी तेजी से अपना रहे हैं. इस योजना के तहत अब तक करीब 16,000 एकड़ क्षेत्र को कवर किया जा चुका है. उन्होंने उम्मीद जताई कि इस बार धान की रोपाई सुचारु रूप से पूरी होगी और इससे हरियाणा के धान उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी होगी.