PKVY Scheme: कम लागत में करें जैविक खेती, सरकार दे रही 50 हजार रुपये, जानें कैसे मिलेगा फायदा

Government Schemes: परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत केंद्र सरकार किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये तक की सहायता देती है. योजना में आर्थिक मदद के साथ मुफ्त प्रशिक्षण, PGS सर्टिफिकेशन, जैविक उत्पादों की मार्केटिंग और बाजार तक पहुंच की सुविधा भी मिलती है.

नोएडा | Updated On: 30 Jul, 2026 | 07:26 PM

PKVY Scheme: रासायनिक खाद और कीटनाशकों के लगातार बढ़ते इस्तेमाल से खेती की लागत बढ़ रही है और मिट्टी की उर्वरता भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है. दूसरी ओर, बाजार में जैविक (ऑर्गेनिक) फल, सब्जियों और अनाज की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में किसानों को प्राकृतिक और टिकाऊ खेती अपनाने के लिए केंद्र सरकार परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) चला रही है.

इस योजना के तहत किसानों को सिर्फ आर्थिक मदद ही नहीं, बल्कि जैविक खेती का प्रशिक्षण, सर्टिफिकेशन और अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने में भी सहायता दी जाती है. कम लागत में खेती करने वालों के लिए यह योजना बेहद फायदेमंद साबित हो सकती है.

क्या है परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY)?

परंपरागत कृषि विकास योजना का मुख्य उद्देश्य किसानों को रासायनिक खेती से हटाकर जैविक खेती की ओर बढ़ावा देना है. इस योजना के जरिए मिट्टी की सेहत सुधारने, पर्यावरण को सुरक्षित रखने और लंबे समय तक टिकाऊ खेती को बढ़ावा दिया जाता है.

यह योजना क्लस्टर मॉडल पर काम करती है. यानी इसमें कम से कम 50 किसानों का एक समूह बनाया जाता है, जिसकी कुल खेती 20 हेक्टेयर या उससे अधिक होनी चाहिए. इससे बड़े स्तर पर जैविक खेती को बढ़ावा मिलता है और किसानों को सामूहिक रूप से कई सुविधाएं मिलती हैं.

कितनी मिलती है आर्थिक सहायता?

PKVY के तहत किसानों को तीन साल में प्रति हेक्टेयर 50,000 रुपये की सहायता दी जाती है. इसमें से 31,000 रुपये सीधे किसानों को जैविक खाद, जैविक कीटनाशक, बीज और अन्य जरूरी सामग्री खरीदने के लिए दिए जाते हैं. बाकी राशि का उपयोग प्रशिक्षण, क्लस्टर विकास, जैविक सर्टिफिकेशन, मिट्टी और फसल की जांच तथा मार्केटिंग जैसी गतिविधियों पर किया जाता है. सरकार यह पूरी सहायता डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए किसानों के बैंक खाते में भेजती है.

PGS सर्टिफिकेशन से क्या फायदा होगा?

जैविक खेती करने के बाद उसका प्रमाणपत्र बनवाना भी जरूरी होता है, ताकि यह साबित हो सके कि, फसल पूरी तरह जैविक तरीके से उगाई गई है. इससे किसानों को बाजार में अपने उत्पाद की बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ जाती है. इस योजना के तहत किसानों को पार्टिसिपेटरी गारंटी सिस्टम (PGS) के जरिए जैविक प्रमाणपत्र दिलाया जाता है. प्रमाणपत्र मिलने के बाद किसान अपने उत्पादों पर ‘जैविक भारत’ (Jaivik Bharat) का लोगो लगा सकते हैं. इससे ग्राहकों को भी भरोसा रहता है कि वे असली जैविक उत्पाद खरीद रहे हैं.

किसानों को मिलता है मुफ्त प्रशिक्षण

योजना के तहत कृषि विशेषज्ञ किसानों को आधुनिक जैविक खेती की पूरी जानकारी देते हैं. प्रशिक्षण में किसानों को सिखाया जाता है कि:

इस प्रशिक्षण से किसान कम लागत में बेहतर उत्पादन लेने की तकनीक सीखते हैं.

जैविक खेती से किसानों को क्या फायदा?

जैविक खेती अपनाने से कई तरह के लाभ मिलते हैं. सबसे बड़ा फायदा यह है कि, मिट्टी की उर्वरता लंबे समय तक बनी रहती है. रासायनिक खाद और कीटनाशकों पर खर्च कम होने से खेती की लागत घटती है. इसके अलावा जल स्रोत और पर्यावरण भी सुरक्षित रहते हैं. आजकल बाजार में जैविक उत्पादों की मांग लगातार बढ़ रही है, इसलिए किसानों को अपनी उपज का बेहतर दाम मिलने की संभावना भी अधिक रहती है.

कौन उठा सकता है योजना का लाभ?

इस योजना का लाभ वे किसान उठा सकते हैं जो जैविक खेती शुरू करना चाहते हैं और समूह बनाकर खेती करने के लिए तैयार हैं. योजना में शामिल होने के लिए किसान अपने जिला कृषि अधिकारी, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) या राज्य कृषि विभाग से संपर्क कर सकते हैं. वहां से उन्हें योजना में पंजीकरण और आगे की प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिल जाएगी.

क्यों खास है यह योजना?

खेती की बढ़ती लागत और मिट्टी की खराब होती सेहत के बीच परंपरागत कृषि विकास योजना किसानों के लिए एक बेहतर विकल्प बनकर सामने आई है. यह योजना केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि किसानों को जैविक खेती सीखने, प्रमाणन हासिल करने और बाजार तक पहुंच बनाने में भी मदद करती है. अगर किसान इस योजना का सही तरीके से लाभ उठाएं, तो वे कम लागत में सुरक्षित, टिकाऊ और ज्यादा मुनाफे वाली खेती कर सकते हैं. इससे उनकी आय बढ़ने के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी सुरक्षित और बेहतर क्वालिटी वाले जैविक उत्पाद मिल सकते हैं.

Published: 31 Jul, 2026 | 06:00 AM

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