कृषि मंत्री भागीरथ चौधरी ने लौटाई 99 लाख रुपये की सब्सिडी, संसद में सरकार ने दी जानकारी
Bhagirath Choudhary: केंद्र सरकार ने लोकसभा में बताया कि कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने खेत के लिए मिली 99 लाख रुपये की सब्सिडी वापस कर दी है. सरकार के अनुसार, यह राशि संबंधित बैंक को लौटा दी गई है, जिसे अब राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को भेजा जाएगा.
Bhagirath Choudhary Subsidy: केंद्र सरकार ने लोकसभा में जानकारी दी है कि कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने खेत के लिए मिली 99 लाख रुपये की सब्सिडी वापस कर दी है. यह जानकारी सरकार ने संसद में एक लिखित जवाब के जरिए दी. हाल ही में इस सब्सिडी को लेकर मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद मामला चर्चा में आ गया था. इसके बाद विपक्ष ने भी इस मुद्दे पर सवाल उठाए थे. सरकार के मुताबिक, सब्सिडी की राशि वापस करने के बाद अब संबंधित बैंक को यह रकम राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) को लौटाने के निर्देश दिए गए हैं.
संसद में सरकार ने क्या बताया?
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सांसद अभिषेक बनर्जी के सवाल के जवाब में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने बताया कि, भागीरथ चौधरी ने योजना के तहत मिली पूरी सब्सिडी संबंधित बैंक को वापस कर दी है. सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अब बैंक इस राशि को राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड के खाते में जमा करेगा. इसके साथ ही इस मामले पर सरकार की ओर से आधिकारिक स्थिति साफ हो गई है.
कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?
यह मामला तब सामने आया जब एक मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया कि, कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी ने अपने ही मंत्रालय की योजना के तहत 99 लाख रुपये की सब्सिडी प्राप्त की थी. रिपोर्ट के सामने आने के बाद इस पर राजनीतिक बहस शुरू हो गई और सवाल उठने लगे कि क्या पद पर रहते हुए मंत्री को इस तरह की सब्सिडी लेना उचित था. हालांकि, सरकार ने संसद में यह स्पष्ट कर दिया कि मंत्री ने अब पूरी राशि लौटा दी है.
मंत्री ने पहले क्या दी थी सफाई?
मीडिया रिपोर्ट आने के बाद भागीरथ चौधरी ने अपनी ओर से भी सफाई दी थी. उन्होंने कहा था कि, वह बचपन से किसान हैं और खेती करना उनका पारिवारिक पेशा रहा है. उन्होंने बताया कि, उन्होंने साल 2018 में पॉलीहाउस लगाने के लिए आवेदन किया था. उस समय वह अन्य पात्र किसानों की तरह इस योजना के लिए योग्य थे और नियमों के तहत ही उन्हें सब्सिडी मिली थी. भागीरथ चौधरी ने कहा था कि उन्होंने किसी भी तरह की जानकारी छिपाई नहीं. उनके खेत पर एक बोर्ड भी लगाया गया है, जिसमें लिए गए लोन और सब्सिडी का सारी डिटेल्स है.
किसानों को देते हैं आधुनिक खेती की जानकारी
भागीरथ चौधरी ने यह भी बताया था कि उनके खेत पर केवल खेती ही नहीं होती, बल्कि वहां किसानों को नई कृषि तकनीकों, पॉलीहाउस खेती और प्राकृतिक खेती की जानकारी भी दी जाती है. उनके मुताबिक, कई सरकारी अधिकारी और कृषि विशेषज्ञ समय-समय पर उनके खेत का दौरा कर चुके हैं. इसलिए इस पूरे मामले में कोई गोपनीयता या नियमों के उल्लंघन जैसी बात नहीं है.
पारदर्शिता पर बढ़ा जोर
जानकारों का मानना है कि सब्सिडी की राशि वापस करने का फैसला ऐसे समय में आया है, जब केंद्र सरकार अपने मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही और पारदर्शिता पर विशेष जोर दे रही है. हालांकि सरकार ने संसद में केवल इतना बताया है कि राशि वापस कर दी गई है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता, जवाबदेही और हितों के टकराव जैसे मुद्दों पर नई चर्चा जरूर शुरू कर दी है. अब यह मामला आधिकारिक रूप से संसद के रिकॉर्ड का हिस्सा बन चुका है और सरकार की ओर से भी इसकी पुष्टि कर दी गई है.