संसदीय समिति की सिफारिश: दलहन-तिलहन पर 100 फीसदी MSP खरीद की मांग, किसानों को मिलेगा बड़ा फायदा
MSP procurement: समिति ने साफ कहा है कि दलहन और तिलहन की 100 फीसदी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर की जानी चाहिए. अभी सरकार इन फसलों की सीमित मात्रा में ही खरीद करती है, जिससे कई किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता.
MSP procurement: देश में खेती और किसानों की आमदनी को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है. संसद की कृषि संबंधी स्थायी समिति ने सरकार को कई बड़े सुझाव दिए हैं, जिनका मकसद किसानों को बेहतर दाम दिलाना और देश को आयात पर निर्भरता से बाहर निकालना है.
बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, समिति ने साफ कहा है कि दलहन और तिलहन की 100 फीसदी खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर की जानी चाहिए. अभी सरकार इन फसलों की सीमित मात्रा में ही खरीद करती है, जिससे कई किसानों को अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता.
MSP पर पूरी खरीद क्यों जरूरी?
समिति की रिपोर्ट केअनुसार भारत आज भी खाद्य तेल के मामले में काफी हद तक विदेशों पर निर्भर है. देश में इस्तेमाल होने वाले कुल खाद्य तेल का लगभग 56 फीसदी हिस्सा आयात किया जाता है.
दालों के मामले में भी भारत हर साल करीब 21.3 लाख टन दालें बाहर से मंगाता है. इसका मतलब है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ती या घटती हैं, तो उसका असर सीधे भारत के किसानों और उपभोक्ताओं पर पड़ता है. इसी वजह से समिति ने सुझाव दिया है कि अगर सरकार तिलहन और प्रमुख दलहन फसलों जैसे अरहर, उड़द और मसूर की पूरी खरीद MSP पर करे, तो किसानों को स्थिर आय मिलेगी और देश का आयात भी कम होगा.
पाम ऑयल पर ड्यूटी लगाने का सुझाव
समिति ने यह भी कहा है कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाम ऑयल की कीमत 800 डॉलर प्रति टन से नीचे चली जाती है, तो उस पर 20 फीसदी की सेफगार्ड ड्यूटी लगाई जानी चाहिए. इसका मकसद यह है कि सस्ते आयात की वजह से भारत में कीमतें न गिरें और किसानों को नुकसान न हो. अगर विदेशी तेल सस्ता मिलेगा, तो घरेलू बाजार में किसानों की फसल का दाम गिर जाता है, जिसे रोकना जरूरी है.
नई तकनीक से बढ़ेगा उत्पादन
समिति ने खेती में नई तकनीकों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है. इसमें CRISPR-Cas9 और Marker Assisted Selection (MAS) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल शामिल है. इन तकनीकों से ऐसी फसलें तैयार की जा सकती हैं, जो ज्यादा उत्पादन दें, कम पानी में भी उग सकें और कीटों से सुरक्षित रहें.
समिति ने सुझाव दिया है कि 2028 तक अलग-अलग क्षेत्रों के अनुसार नई किस्में तैयार की जाएं और 2030 तक हर जिले में बीज हब बनाए जाएं, ताकि किसानों को अच्छी गुणवत्ता के बीज आसानी से मिल सकें.
बीज और सिस्टम में सुधार जरूरी
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बीज व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और मजबूत बनाया जाए. इसके लिए SATHI पोर्टल को “नेशनल सीड ग्रिड” में बदलने का सुझाव दिया गया है. इससे बीज की सप्लाई का पूरा सिस्टम जुड़ जाएगा और QR कोड के जरिए बीज की ट्रैकिंग भी हो सकेगी.
इसके अलावा नकली बीजों की समस्या को खत्म करने के लिए सख्त कानून बनाने और एक राष्ट्रीय संस्था बनाने की जरूरत बताई गई है, जो बीजों की कीमत तय करे और किसानों को नुकसान होने पर मुआवजा दिलाए.
सिंचाई और नई फसलों पर जोर
समिति ने यह भी कहा है कि पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में दलहन और तिलहन की खेती को बढ़ावा दिया जाए. इसके लिए सिंचाई सुविधाओं को बेहतर बनाना जरूरी है.
“पर ड्रॉप मोर क्रॉप” योजना के तहत माइक्रो इरिगेशन, फार्म पॉन्ड और आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ाने की बात कही गई है, ताकि बारिश पर निर्भर किसानों को राहत मिल सके.
किसानों की आय बढ़ाने के लिए नए उपाय
किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए समिति ने कई सुझाव दिए हैं. इसमें किसान उत्पादक संगठनों (FPO) को मजबूत करना, प्रोसेसिंग यूनिट्स लगाना और ‘भारत दाल’ जैसी योजनाओं को बढ़ावा देना शामिल है.
इसके साथ ही ‘भारत ऑयल’ नाम से सस्ते खाद्य तेल का नया ब्रांड शुरू करने का भी सुझाव दिया गया है, जिससे आम लोगों को सस्ता तेल मिल सके और किसानों को बेहतर बाजार मिले.