बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की कटाई रुकी, मंडियों में कम पहुंच रही फसल, किसानों की चिंता बढ़ी
इस समय किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी फसल सही दाम पर बिक पाएगी या नहीं. नमी ज्यादा होने से कई बार फसल तुरंत खरीदी नहीं जाती, जिससे उन्हें इंतजार करना पड़ता है. इसके अलावा मौसम का डर भी बना हुआ है कि अगर फिर बारिश हुई, तो बची हुई फसल को और नुकसान हो सकता है.
Punjab wheat harvest: पंजाब के पटियाला जिले में इस बार गेहूं की कटाई का मौसम किसानों के लिए आसान नहीं रहा. जहां इस समय खेतों में तेजी से कटाई होनी चाहिए थी, वहीं बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि ने पूरी प्रक्रिया को धीमा कर दिया है. इसका असर सिर्फ खेतों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि मंडियों में गेहूं की खरीद पर भी साफ दिखाई दे रहा है.
मौसम की मार से बिगड़ी खेती की रफ्तार
द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों से लगातार बदलते मौसम ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. कभी बारिश, कभी ओले और कभी तेज हवाओं ने फसल को झुकाकर गिरा दिया है. खेतों में पानी भर जाने से कई जगह कटाई का काम रुक गया है. किसानों का कहना है कि जो फसल पहले सीधी खड़ी थी, अब जमीन पर बिछ गई है, जिससे मशीन से कटाई करना भी मुश्किल हो गया है.
मंडियों में धीमी हुई आवक
पटियाला की मंडियों में इस बार गेहूं की आमद उम्मीद से काफी कम है. जिला खाद्य एवं आपूर्ति नियंत्रक रविंदर कौर के अनुसार, सोमवार शाम तक करीब 4,500 मीट्रिक टन गेहूं मंडियों में पहुंचा, जिसमें से 3,600 मीट्रिक टन की खरीद एजेंसियों द्वारा की जा चुकी है.
सरकार ने इस सीजन के लिए जिले में 108 मंडियां और 89 अस्थायी खरीद केंद्र बनाए हैं, ताकि किसानों को अपनी फसल बेचने में परेशानी न हो.
नमी बनी सबसे बड़ी चुनौती
बारिश के कारण गेहूं में नमी की मात्रा बढ़ गई है, जो खरीद के तय मानक 12 प्रतिशत से ज्यादा है. कई किसानों के अनुसार उनकी फसल में नमी 14 प्रतिशत तक पहुंच गई है.
द ट्रिब्यून के अनुसार,प टियाला के सलेरी खुर्द गांव के किसान देविंदर सिंह बताते हैं कि उन्होंने 300 क्विंटल गेहूं मंडी में लाया, लेकिन उसमें नमी ज्यादा होने के कारण उन्हें अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ रही है. वे पंखों की मदद से गेहूं को सुखाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि वह बिक्री के योग्य बन सके.
फसल को हुआ कितना नुकसान
अधिकारियों का कहना है कि हाल की बारिश और ओलावृष्टि से जिले में करीब 15 से 20 प्रतिशत गेहूं की फसल प्रभावित हुई है. वहीं कृषि विशेषज्ञों का अनुमान है कि उत्पादन में 10 से 15 प्रतिशत तक की गिरावट आ सकती है. साथ ही इस बार प्रति एकड़ उत्पादन करीब 20 क्विंटल हो रहा है, जो सामान्य से 2-3 क्विंटल कम है.
खरीद प्रक्रिया पर असर
हालांकि 1 अप्रैल से खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन धीमी आवक के कारण मंडियों में काम उम्मीद के मुताबिक नहीं चल पा रहा है. अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही मौसम साफ होगा, किसान तेजी से फसल लेकर मंडियों में पहुंचेंगे और खरीद प्रक्रिया भी तेज हो जाएगी.
किसानों की चिंता और उम्मीद
इस समय किसानों के सामने सबसे बड़ी चिंता यह है कि उनकी फसल सही दाम पर बिक पाएगी या नहीं. नमी ज्यादा होने से कई बार फसल तुरंत खरीदी नहीं जाती, जिससे उन्हें इंतजार करना पड़ता है. इसके अलावा मौसम का डर भी बना हुआ है कि अगर फिर बारिश हुई, तो बची हुई फसल को और नुकसान हो सकता है.
साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि अगर आने वाले दिनों में मौसम साफ रहता है, तो किसान अपनी फसल को सुखाकर मंडियों में ला सकेंगे और स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी. लेकिन अगर मौसम इसी तरह बदलता रहा, तो नुकसान और बढ़ सकता है और किसानों की मुश्किलें भी.