15 सितंबर से बदल जाएगा कीटनाशक कारोबार! लाइसेंस से स्टॉक तक सब होगा ऑनलाइन

15 सितंबर से कीटनाशक कारोबार के नियम बदलने जा रहे हैं. निर्माताओं, आयातकों और डीलरों को लाइसेंस, स्टॉक और बिक्री का रिकॉर्ड डिजिटल रखना होगा. हर महीने ऑनलाइन रिटर्न भी जमा करना पड़ेगा. नए नियमों से पारदर्शिता बढ़ेगी, लेकिन छोटे ग्रामीण कारोबारियों के सामने डिजिटल चुनौतियां भी आएंगी.

नोएडा | Published: 12 Sep, 2026 | 12:50 PM

Pesticide Rules 202: देश में कीटनाशकों के निर्माण, बिक्री और वितरण से जुड़े कारोबार के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है. 15 सितंबर 2026 से Insecticides (Amendment) Rules, 2026 लागू होंगे. नए नियमों के तहत कीटनाशक निर्माताओं, आयातकों, विक्रेताओं और वितरकों के लिए लाइसेंस आवेदन, स्टॉक रिकॉर्ड और मासिक रिटर्न जैसी कई प्रक्रियाएं डिजिटल हो जाएंगी. द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का उद्देश्य कागजी काम कम करना और कीटनाशकों की पूरी सप्लाई चेन पर बेहतर निगरानी रखना है.

लाइसेंस के लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा

नए नियमों के लागू होने के बाद कीटनाशकों के निर्माण और बिक्री  से जुड़े लाइसेंस के लिए डिजिटल माध्यम से आवेदन करना होगा. निर्माण लाइसेंस के साथ कीटनाशकों को बेचने, स्टॉक रखने, बिक्री के लिए प्रदर्शित करने या वितरण करने के लाइसेंस के आवेदन भी ऑनलाइन जमा किए जाएंगे. इसके लिए Form II का इस्तेमाल किया जाएगा. नियमों के मुताबिक, निर्माण लाइसेंस की फीस प्रत्येक कीटनाशक के लिए 2,000 रुपये होगी. हालांकि, एक आवेदन में शामिल सभी कीटनाशकों के लिए अधिकतम फीस 20,000 रुपये तय की गई है. निर्धारित फीस का भुगतान भी डिजिटल माध्यम से किया जा सकेगा.

स्टॉक और बिक्री का रिकॉर्ड भी होगा डिजिटल

नए नियमों में सबसे बड़ा बदलाव रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था में किया गया है. अब कंपनियों और अन्य संबंधित कारोबारियों को कीटनाशकों  से जुड़े रिकॉर्ड इलेक्ट्रॉनिक तरीके से रखने होंगे. इसमें कीटनाशकों की बिक्री, वितरण, उत्पादन, आयात, खरीद और स्टॉक की जानकारी शामिल होगी. तकनीकी ग्रेड और तैयार उत्पाद यानी फॉर्मुलेटेड कीटनाशकों से जुड़े रिकॉर्ड भी डिजिटल रूप से दर्ज करने होंगे. इससे अधिकारियों को यह पता लगाने में आसानी होगी कि किसी कीटनाशक का उत्पादन या आयात कहां हुआ, वह किसके पास पहुंचा और उसका कितना स्टॉक उपलब्ध है.

हर महीने 15 दिन के अंदर देना होगा रिटर्न

निर्माताओं और आयातकों  के लिए मासिक इलेक्ट्रॉनिक रिटर्न जमा करना भी अनिवार्य किया गया है. उन्हें हर महीने की समाप्ति के 15 दिनों के भीतर संबंधित जानकारी ऑनलाइन देनी होगी. तकनीकी ग्रेड और फॉर्मुलेटेड कीटनाशकों के लिए अलग-अलग प्रारूप तय किए गए हैं. डिजिटल व्यवस्था का विस्तार निरीक्षण और कार्रवाई तक भी किया गया है. कीटनाशक निरीक्षकों को निरीक्षण, सैंपल लेने, स्टॉक जब्त करने और दूसरी नियामकीय कार्रवाई का रिकॉर्ड भी इलेक्ट्रॉनिक रूप से रखना होगा. परीक्षण और प्रयोगशाला जांच से जुड़ी जानकारी भी डिजिटल तरीके से भेजी जाएगी.

छोटे कारोबारियों के सामने आ सकती हैं चुनौतियां

सरकार का कहना है कि डिजिटल व्यवस्था से कागजी  काम कम होगा और कीटनाशक कारोबार में पारदर्शिता और निगरानी बेहतर होगी. साथ ही, कीटनाशकों के निर्माण, आयात और बिक्री की पूरी प्रक्रिया को ट्रैक करना आसान हो सकेगा. हालांकि, कृषि क्षेत्र के विशेषज्ञों ने छोटे निर्माताओं, ग्रामीण डीलरों और दुकानदारों को लेकर चिंता जताई है. द ट्रिब्यून के अनुसार, कई छोटे कारोबारी अभी भी कागजी रजिस्टर और मैनुअल प्रक्रियाओं पर निर्भर हैं. ऐसे में इंटरनेट की उपलब्धता, डिजिटल पोर्टल की जानकारी और तकनीकी क्षमता उनके लिए चुनौती बन सकती है. कृषि विश्लेषक आकाश जिंदल के मुताबिक, डिजिटल व्यवस्था के लिए छोटे कारोबारियों को पर्याप्त तैयारी और तकनीकी सहयोग की जरूरत होगी.

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