अचार-मसाले से शुरू करें अपना कारोबार! PMFME में अब मिल सकती है 10 लाख से ज्यादा मदद

खाद्य प्रसंस्करण बिजनेस शुरू करने वालों के लिए बड़ी खबर है. PMFME योजना को पांच साल बढ़ाने का प्रस्ताव है. साथ ही 10 लाख रुपये की मौजूदा सब्सिडी सीमा बढ़ाने पर विचार हो रहा है. अब तक 2.06 लाख सूक्ष्म इकाइयों को 6,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी मिल चुकी है.

नोएडा | Updated On: 23 Aug, 2026 | 08:08 PM

Food Processing Business: छोटे स्तर पर अचार, मसाले, मिलेट, फल-सब्जी, तेल और अन्य खाद्य प्रसंस्करण कारोबार शुरू करने की योजना बना रहे उद्यमियों के लिए बड़ी राहत की खबर है. केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम उन्नयन (PMFME) योजना को पांच साल आगे बढ़ाने का प्रस्ताव रखा है. इसके साथ ही बैंक ऋण पर मिलने वाली 35 फीसदी क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये से बढ़ाने पर भी विचार किया जा रहा है. यदि प्रस्ताव मंजूर होता है, तो लाखों सूक्ष्म उद्यमियों को अधिक वित्तीय सहायता मिल सकेगी.

2020 में शुरू हुई योजना, अब 5 साल विस्तार की तैयारी

PMFME योजना  की शुरुआत वर्ष 2020-21 में 10,000 करोड़ रुपये के बजट के साथ की गई थी. फिलहाल यह योजना 30 सितंबर 2026 तक लागू है. मंत्रालय के संयुक्त सचिव देवेश देवल ने बताया कि सरकार योजना को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने के प्रस्ताव पर काम कर रही है. योजना का उद्देश्य ग्रामीण और छोटे उद्यमियों को खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में आर्थिक, तकनीकी और व्यावसायिक सहायता देना है, ताकि स्थानीय कृषि उत्पादों से मूल्य संवर्धन कर किसानों और उद्यमियों की आय बढ़ाई जा सके.

नए प्लांट और विस्तार दोनों पर मिलती है 35 फीसदी सब्सिडी

PMFME योजना के तहत कोई भी पात्र उद्यमी 30 लाख रुपये तक के निवेश से नया खाद्य प्रसंस्करण व्यवसाय  शुरू कर सकता है या अपनी मौजूदा इकाई का विस्तार कर सकता है. वर्तमान नियमों के अनुसार, बैंक ऋण पर 35 प्रतिशत तक की क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी मिलती है, जिसकी अधिकतम सीमा 10 लाख रुपये है. मंत्रालय अब इसी सीमा को बढ़ाने पर विचार कर रहा है. प्रस्ताव में सूक्ष्म उद्यमों के लिए वित्तपोषण बढ़ाने और अधिकतम सब्सिडी राशि में वृद्धि शामिल है, जिससे छोटे उद्योगों को बड़े स्तर पर विस्तार का अवसर मिल सकता है.

2.06 लाख इकाइयों को मिला लाभ, महिलाओं की मजबूत भागीदारी

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, अब तक 2.06 लाख सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को इस योजना का लाभ मिल चुका है. लाभार्थियों को कुल 6,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी प्रदान की गई, जिससे खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लगभग 20,400 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित हुआ. योजना की एक बड़ी उपलब्धि महिलाओं की भागीदारी भी है. कुल लाभार्थियों में 40 प्रतिशत से अधिक महिला उद्यमी हैं, जो ग्रामीण स्वरोजगार  और महिला सशक्तिकरण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

बिहार सबसे आगे, इन कारोबारों को मिलता है सबसे ज्यादा फायदा

PMFME योजना का सबसे अधिक लाभ बिहार ने उठाया है. इसके बाद महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश का स्थान है. यह योजना मुख्य रूप से अनाज, तिलहन, खाद्य तेल, फल, सब्जी, मसाले और अन्य कृषि उत्पादों  के प्रसंस्करण से जुड़े सूक्ष्म उद्योगों पर केंद्रित है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि योजना का पांच साल का विस्तार और बढ़ी हुई सब्सिडी मंजूर होती है, तो ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों नए खाद्य प्रसंस्करण उद्यम स्थापित होंगे. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा, कृषि उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलेगा और किसानों के साथ-साथ छोटे उद्यमियों की आय में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.

Published: 23 Aug, 2026 | 09:22 PM

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