MSP में धोखाधड़ी पर कार्रवाई, हाई कोर्ट ने फसल खरीद में कच्ची पर्ची सिस्टम पर लगाई रोक

कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए और सरकार इस पर ठोस कदम उठाए. कोर्ट ने हरियाणा सरकार को 30 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर स्पष्ट आदेश जारी करने के लिए कहा, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके.

नई दिल्ली | Published: 2 Apr, 2026 | 01:48 PM

kacchi parchi ban: देश के किसानों के लिए एक अहम फैसला सामने आया है, जो सीधे उनकी कमाई और अधिकारों से जुड़ा है. पंजाब और हरियाणा की अनाज मंडियों में लंबे समय से चल रही ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली पर अब रोक लगा दी गई है. पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट के इस आदेश के बाद सरकार ने भी तुरंत कदम उठाते हुए इसे बंद करने के निर्देश जारी कर दिए हैं. माना जा रहा है कि इस फैसले से फसल खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता आएगी और किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सकेगा.

क्या होती थी ‘कच्ची पर्ची’?

मंडियों में जब किसान अपनी फसल बेचते थे, तो कई बार उन्हें सरकारी दस्तावेज की जगह एक साधारण हस्तलिखित पर्ची दी जाती थी, जिसे ‘कच्ची पर्ची’ कहा जाता है. यह कोई आधिकारिक रसीद नहीं होती थी और न ही सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज होती थी. यही वजह थी कि इस प्रणाली का दुरुपयोग भी काफी होता था.

कई मामलों में किसानों को इसी कच्ची पर्ची के आधार पर कम भुगतान किया जाता था, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में फसल की खरीद न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP पर दिखाई जाती थी. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था.

हाई कोर्ट का सख्त रुख

इस पूरे मामले को लेकर एक जनहित याचिका दायर की गई थी, जिसके बाद पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया. कोर्ट ने साफ निर्देश दिए कि इस व्यवस्था को तुरंत बंद किया जाए और सरकार इस पर ठोस कदम उठाए. कोर्ट ने हरियाणा सरकार को 30 दिनों के भीतर इस मुद्दे पर स्पष्ट आदेश जारी करने के लिए कहा, ताकि भविष्य में ऐसी अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके.

कच्ची पर्ची सिस्टम खत्म कर लागू होगा आधिकारिक जे-फॉर्म

सरकार ने दिए सख्त निर्देश

हाई कोर्ट के आदेश के बाद हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई की. 1 अप्रैल 2026 को प्रदेश की सभी मंडियों की मार्केट कमेटियों को निर्देश जारी किए गए कि अब कोई भी आढ़ती किसान को ‘कच्ची पर्ची’ नहीं देगा. अब फसल खरीद के बाद किसानों को केवल ‘जे-फॉर्म’ ही दिया जाएगा, जो एक आधिकारिक दस्तावेज होता है. इससे हर लेन-देन का रिकॉर्ड रहेगा और किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो जाएगी.

किसानों को हो रहा था बड़ा नुकसान

विशेषज्ञों का मानना है कि ‘कच्ची पर्ची’ प्रणाली के कारण किसानों को 30 से 40 प्रतिशत तक का नुकसान झेलना पड़ रहा था. उन्हें उनकी फसल का पूरा मूल्य नहीं मिल पाता था और कई बार वे ठगे जाते थे. इस प्रणाली के चलते सरकारी रिकॉर्ड और वास्तविक भुगतान में बड़ा अंतर भी सामने आता था, जिससे पारदर्शिता पूरी तरह खत्म हो जाती थी.

कानून की भावना के खिलाफ थी व्यवस्था

याचिका में यह भी कहा गया था कि ‘कच्ची पर्ची’ की व्यवस्था कृषि मंडी कानूनों की मूल भावना के खिलाफ है. इन कानूनों का उद्देश्य किसानों को पारदर्शी और सुरक्षित बाजार देना है, लेकिन यह प्रणाली उस मकसद को कमजोर कर रही थी. इसलिए इसे खत्म करना जरूरी माना गया, ताकि मंडियों में सही व्यवस्था लागू हो सके.

क्या होगा बदलाव?

इस फैसले के बाद उम्मीद की जा रही है कि मंडियों में फसल खरीद की प्रक्रिया ज्यादा साफ और पारदर्शी होगी. किसानों को उनकी फसल का पूरा पैसा मिलेगा और किसी तरह की धोखाधड़ी की गुंजाइश कम हो जाएगी.

सरकार और कोर्ट के इस कदम को किसानों के हित में एक बड़ा सुधार माना जा रहा है. आने वाले समय में इसका असर साफ दिखेगा, जब किसान बिना किसी डर के अपनी फसल बेच सकेंगे और उन्हें उनकी मेहनत का पूरा मूल्य मिल पाएगा.

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