पंजाब में गेहूं खरीद से पहले सिस्टम की पोल खुली, 5 करोड़ बोरियों की कमी से गेहूं खरीद पर खतरा

इस समस्या का सबसे ज्यादा असर किसानों पर ही पड़ेगा. अगर खरीद में देरी होती है, तो उन्हें भुगतान मिलने में भी देरी होगी. कई किसान अपनी अगली फसल या अन्य खर्चों के लिए इसी पैसे पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में देरी होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है.

नई दिल्ली | Updated On: 27 Mar, 2026 | 10:30 AM

Punjab wheat procurement 2026: पंजाब में इस साल गेहूं की फसल काफी अच्छी होने की उम्मीद है. मौसम अनुकूल रहा है और खेतों में फसल भी अच्छी दिखाई दे रही है. लेकिन इसी खुशी के बीच एक बड़ी समस्या सामने आ गई है, जिसने किसानों, व्यापारियों और मंडी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है. राज्य में गेहूं खरीद से पहले गननी बैग यानी बोरियों की भारी कमी हो गई है. अगर यह समस्या समय रहते दूर नहीं हुई, तो खरीद प्रक्रिया में बड़ी बाधा आ सकती है.

1 अप्रैल से शुरू होनी है खरीद

बिजनेस स्टैंडर्ड की खबर के अनुसार, हर साल की तरह इस बार भी पंजाब में गेहूं की सरकारी खरीद 1 अप्रैल से शुरू होने वाली है. आमतौर पर अप्रैल के पहले सप्ताह से मंडियों में गेहूं की आवक शुरू हो जाती है और 15–20 दिनों के भीतर यह तेजी पकड़ लेती है. इसी दौरान सबसे ज्यादा बोरियों की जरूरत होती है, क्योंकि बड़ी मात्रा में गेहूं मंडियों में आता है और उसे तुरंत पैक करके स्टोर करना जरूरी होता है. ऐसे में अगर बोरियां कम पड़ गईं, तो पूरी व्यवस्था गड़बड़ा सकती है.

5 करोड़ बोरियों की कमी

पंजाब के आढ़तिया (कमीशन एजेंट) संघ के मुताबिक, इस साल करीब 13 मिलियन टन गेहूं की खरीद का अनुमान है. इसके लिए लगभग 260 मिलियन गननी बैग की जरूरत होगी, जिसमें हर बोरी में करीब 50 किलो गेहूं भरा जाता है. लेकिन अभी तक जो स्टॉक उपलब्ध है, वह जरूरत से करीब 50 मिलियन यानी 5 करोड़ बोरियां कम है. इतनी बड़ी कमी से साफ है कि खरीद प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ सकता है.

बंपर फसल से और बढ़ेगा दबाव

इस साल पंजाब में गेहूं की खेती करीब 3.5 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में की गई है. मौसम भी अब तक फसल के लिए अनुकूल रहा है, इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि उत्पादन 13 मिलियन टन से ज्यादा भी हो सकता है. ऐसे में जहां एक तरफ अच्छी पैदावार किसानों के लिए खुशी की बात है, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा उत्पादन का मतलब है कि मंडियों पर और ज्यादा दबाव पड़ेगा. और अगर बोरियां ही कम हों, तो समस्या और बढ़ सकती है.

मंडियों में लग सकता है जाम

अगर समय पर बोरियों की व्यवस्था नहीं हुई, तो मंडियों में गेहूं का ढेर लग सकता है. किसान अपनी फसल लेकर आएंगे, लेकिन उसे पैक करने के लिए पर्याप्त बोरी नहीं होगी. इससे मंडियों में भीड़ बढ़ेगी, अव्यवस्था फैलेगी और खरीद प्रक्रिया धीमी पड़ जाएगी. कई बार ऐसी स्थिति में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है.

किसानों पर पड़ सकता है सीधा असर

इस समस्या का सबसे ज्यादा असर किसानों पर ही पड़ेगा. अगर खरीद में देरी होती है, तो उन्हें भुगतान मिलने में भी देरी होगी. कई किसान अपनी अगली फसल या अन्य खर्चों के लिए इसी पैसे पर निर्भर रहते हैं. ऐसे में देरी होने से उनकी आर्थिक स्थिति पर असर पड़ सकता है. इसके अलावा, ज्यादा देर तक खुले में पड़ी फसल खराब भी हो सकती है, जिससे नुकसान और बढ़ सकता है.

फंड होने के बावजूद समस्या

सबसे हैरानी की बात यह है कि केंद्र सरकार पहले ही पंजाब को गेहूं खरीद के लिए करीब 33,000 करोड़ रुपये जारी कर चुकी है. इसके बावजूद बोरियों की कमी सामने आना योजना और प्रबंधन में कमी को दर्शाता है. व्यापारियों और विशेषज्ञों का कहना है कि अगर समय पर तैयारी की जाती, तो इस तरह की स्थिति से बचा जा सकता था.

समाधान की जरूरत

अब सबसे जरूरी है कि सरकार और संबंधित एजेंसियां जल्दी से जल्दी इस समस्या का समाधान निकालें. बोरियों की सप्लाई बढ़ाई जाए और मंडियों में पर्याप्त व्यवस्था की जाए. अगर समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो बंपर फसल भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकती है.

Published: 27 Mar, 2026 | 10:27 AM

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