UP में बारिश से गेहूं, आलू की फसल बर्बाद, सरसों में बढ़ा फंगस का खतरा.. नुकसान का होगा सर्वे
उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश और तेज हवाओं से रबी फसलों को नुकसान हुआ है. गेहूं, सरसों और आलू की फसलें प्रभावित हैं. कृषि विभाग ने किसानों को जल्दी कटाई और सुरक्षित भंडारण की सलाह दी है. प्रभावित जिलों में फसल सर्वे कर मुआवजा देने की योजना बनाई जा रही है.
Uttar Pradesh Agriculture News: उत्तर प्रदेश में बेमौसम बारिश, तेज हवाओं और ओलावृष्टि के चलते रबी फसलों को बड़े स्तर पर नुकसान पहुंचा है. ऐसे में किसानों की चिंता बढ़ गई है. कहा जा रहा है कि खड़ी और कटाई के लिए तैयार गेहूं, सरसों और आलू की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचा है. मेरठ, प्रयागराज, वाराणसी और बुंदेलखंड में बारिश से किसान ज्यादा प्रभावित हुए हैं. कई जिलों से रिपोर्ट मिली है कि दिनभर चली हल्की-तेज बारिश और तेज हवाओं ने फसल कटाई के काम को बाधित किया. इससे पैदावार व गुणवत्ता पर असर पड़ने की संभावना बढ़ गई है. साथ ही सरसों की फसल में फंगस लगने की संभावना बढ़ गई है.
कृषि विभाग के अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और किसानों को जल्दी कटाई करने और फसल को सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है. कृषि विभाग के प्रधान सचिव रविंदर कुमार ने हिन्दुस्तान टाइम्स से कहा कि बेमौसम बारिश के कारण फसल को नुकसान होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि अभी ज्यादा नुकसान नहीं दिखता, लेकिन गेहूं जैसी फसलें जो कटाई के लिए तैयार हैं, बारिश लगातार रही तो नुकसान हो सकता है.
नुकसान का आंकलन करने के लिए होगा फील्ड सर्वे
कृषि निदेशक पंकज त्रिपाठी ने कहा कि पश्चिम, पूर्व और मध्य उत्तर प्रदेश के जिले सबसे ज्यादा प्रभावित हैं. उन्होंने कहा कि फसलों पर बारिश के संभावित असर की रिपोर्टें जिलों से एकत्र की जा रही हैं. प्रभावित जिलों में नुकसान का आंकलन करने के लिए हम फील्ड सर्वे कराएंगे, उसके बाद बीमा कंपनियां बीमित किसानों को मुआवजा देंगी.
आलू की 80 फीसदी फसल पहले ही कोल्ड स्टोरेज में रखी जा चुकी है
बागवानी निदेशक भानु प्रकाश राम ने कहा कि आलू की 80 फीसदी फसल पहले ही कोल्ड स्टोरेज में रखी जा चुकी है. बाकी 20 फीसदी आलू अगर अभी भी खेतों में हैं, तो पानी भरने की स्थिति में नुकसान हो सकता है. उन्होंने यह भी कहा कि आम की फसल पर कोई नुकसान नहीं होने की संभावना है. वहीं, पूर्वी उत्तर प्रदेश में गेहूं और सरसों की फसलें कटाई के लिए लगभग तैयार हैं, लेकिन अनियमित मौसम किसानों की महीनों की मेहनत पर संकट ला रहा है.
उत्तर प्रदेश में गेहूं का उत्पादन लगभग 441 लाख मीट्रिक टन रहा
अधिकारियों के मुताबिक, गेहं की फसल तेज हवा बहने के चलते खेतों में बिछ गई है, जबकि सरसों की फसल में फली फटने और फंगस लगने का खतरा बढ़ गया है. उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गेहूं उत्पादक राज्य है, जो भारत की कुल उत्पादन का लगभग 32 फीसदी देता है. राज्य में रबी फसल लगभग 129 लाख हेक्टेयर में बोई जाती है, जिसमें गेहूं का सबसे बड़ा हिस्सा है. 2025 में उत्तर प्रदेश में गेहूं का उत्पादन लगभग 441 लाख मीट्रिक टन रहा, जो इसे राज्य की मुख्य रबी फसल के रूप में स्थापित करता है.
नमी सरसों के दाने कमजोर कर सकती है
वाराणसी के चोलापुर इलाके में किसान ने कहा कि इस समय थोड़ी भी बारिश हानिकारक हो सकती है, जिससे कटाई में लगभग एक हफ्ते की देरी हो सकती है और फसल बारिश बढ़ने पर और खतरे में आ जाएगी. एक और किसान ने कहा कि गेहूं को नुकसान हुआ है और नमी सरसों के दाने कमजोर कर सकती है तथा फंगस लगने का खतरा बढ़ा सकती है. प्रयागराज में किसानों का कहना है तेज हवाओं के कारण गेहूं की फसलें झुक गई हैं, जिससे पैदावार और दाने की गुणवत्ता दोनों पर असर पड़ रहा है. सरसों और मटर की फसलें भी प्रभावित हुई हैं, जबकि खेतों में पानी जमा होने से आलू की सड़न का खतरा बढ़ गया है.