मक्का और मूंग की MSP में मामूली बढ़ोतरी पर भड़के राकेश टिकैत, बोले- किसानों के साथ हुआ अन्याय
सरकार पिछले कुछ वर्षों से मक्का उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है. पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए मक्का की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसके अलावा पोल्ट्री फीड और स्टार्च इंडस्ट्री में भी मक्का का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे में किसानों का सवाल है कि जब सरकार खुद मक्का को प्रमोट कर रही है, तो MSP में सिर्फ 10 रुपये की बढ़ोतरी क्यों की गई?
Rakesh Tikait MSP statement: केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2026-27 के लिए 14 फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य यानी MSP में बढ़ोतरी का ऐलान किया है. सरकार का कहना है कि यह फैसला किसानों की आय बढ़ाने और उन्हें बेहतर दाम देने के उद्देश्य से लिया गया है. लेकिन MSP बढ़ोतरी के बाद कई किसान संगठनों और खासकर मक्का और मूंग उगाने वाले किसानों में नाराजगी देखने को मिल रही है.
वजह यह है कि जहां सूरजमुखी, कपास, तिल और नाइजरसीड जैसी फसलों की MSP में सैकड़ों रुपये की बढ़ोतरी की गई, वहीं मक्का और मूंग की MSP में बेहद मामूली बढ़ोतरी हुई है. इसी मुद्दे पर किसान नेता राकेश टिकैत ने सरकार पर सवाल उठाए हैं.
मक्का में सिर्फ 10 रुपये की बढ़ोतरी
सरकारी घोषणा के मुताबिक मक्का की MSP को 2400 से बढ़ाकर 2410 रुपये प्रति क्विंटल किया गया है. यानी किसानों को सिर्फ 10 रुपये प्रति क्विंटल का फायदा मिलेगा. इसे अगर किलो के हिसाब से देखें तो यह बढ़ोतरी करीब 10 पैसे प्रति किलो बैठती है.
मक्का किसान इस बढ़ोतरी को बेहद कम मान रहे हैं. उनका कहना है कि खेती की लागत, मजदूरी, खाद, डीजल और सिंचाई का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन MSP में बढ़ोतरी उस हिसाब से नहीं की जा रही.
मूंग किसानों को भी नहीं मिली बड़ी राहत
मूंग की MSP में भी केवल 12 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है. पहले मूंग की MSP 8768 रुपये थी, जिसे बढ़ाकर 8780 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया गया है.
दूसरी फसलों में हुई बड़ी बढ़ोतरी
जहां मक्का और मूंग में मामूली बढ़ोतरी हुई, वहीं कई दूसरी फसलों की MSP में बड़ा इजाफा किया गया है. सूरजमुखी बीज की MSP में 622 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी हुई है. कपास में 557 रुपये, नाइजरसीड में 515 रुपये और तिल में 500 रुपये प्रति क्विंटल तक MSP बढ़ाई गई है. इसी वजह से मक्का और मूंग किसान खुद को नजरअंदाज महसूस कर रहे हैं.
मक्का को बढ़ावा देने की बात, लेकिन MSP कम
सरकार पिछले कुछ वर्षों से मक्का उत्पादन बढ़ाने की बात कर रही है. खासकर आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति और केंद्र सरकार ने एथेनॉल ब्लेंडिंग प्रोग्राम के तहत मक्का को अहम फसल बताया है.
पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने के लिए मक्का की मांग तेजी से बढ़ रही है. इसके अलावा पोल्ट्री फीड और स्टार्च इंडस्ट्री में भी मक्का का इस्तेमाल बढ़ रहा है. ऐसे में किसानों का सवाल है कि जब सरकार खुद मक्का को प्रमोट कर रही है, तो MSP में सिर्फ 10 रुपये की बढ़ोतरी क्यों की गई?
राकेश टिकैत ने उठाए सवाल
किसान नेता राकेश टिकैत ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कहा कि सरकार ने किसानों के साथ धोखा किया है. उन्होंने कहा कि मक्का में सिर्फ 10 रुपये और मूंग में 12 रुपये की बढ़ोतरी किसानों के साथ न्याय नहीं है.
टिकैत पहले भी MSP नीति को लेकर सरकार पर सवाल उठा चुके हैं. उनका कहना है कि किसानों की मांग स्वामीनाथन आयोग के C2+50 फीसदी फॉर्मूले के आधार पर MSP तय करने की है, लेकिन सरकार उस दिशा में गंभीर कदम नहीं उठा रही.
केंद्र सरकार के द्वारा आज खरीफ फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित किया गया यह देश के किसानों के साथ में धोखा है मक्का का मूल्य मात्र दस रूपये प्रति क्विंटल और मूंग का बारह रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाया गया है सरकार किसान मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है। @PMOIndia @OfficialBKU @ani pic.twitter.com/XLM0QcJIRo
— Rakesh Tikait (@RakeshTikaitBKU) May 13, 2026
किसानों की सबसे बड़ी चिंता
किसानों का कहना है कि सिर्फ MSP घोषित कर देना काफी नहीं होता. सबसे जरूरी बात यह है कि क्या सरकार MSP पर फसलों की खरीद की गारंटी दे पाएगी या नहीं. वहीं बाजार में MSP से कम दाम पर फसल बेचनी पड़ती है. अगर MSP में बढ़ोतरी भी मामूली हो और खरीद व्यवस्था भी मजबूत न हो, तो खेती से मुनाफा कमाना मुश्किल हो जाता है.