India US Trade Deal: संयुक्त किसान मोर्चा का देशव्यापी विरोध-प्रदर्शन का ऐलान, केंद्रीय मंत्री ने बताया था ‘छोटा गुट’

Samyukta Kisan Morcha: संयुक्त किसान मोर्चा ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के खिलाफ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है और इसके संबंध में अपने सभी प्रदेशों, जिलों के प्रभारियों को लेटर भेजा गया है. राकेट टिकैत ने कहा कि किसानों की सहमति और संरक्षण के बिना किया गया कोई भी समझौता किसान हित में नहीं हो सकता.

नोएडा | Updated On: 9 Feb, 2026 | 02:44 PM

India US Trade Deal : भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में खेती के लिए घरेलू बाजार खोले जाने पर किसान संगठनों ने नाराजगी जताई है. संयुक्त किसान मोर्चा ने पहले सरकार को किसानों को बर्बाद नहीं करने के लिए समझौते का विरोध किया था. बीते दिन केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एसकेएम के विरोध प्रदर्शन के ऐलान पर संगठन को किसानों का ‘छोटा गुट’ कहा था. अब 9 फरवरी को ऐलान करते हुए संयुक्त किसान मोर्चा ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने की घोषणा की है और इसके संबंध में अपने सभी प्रदेशों, जिलों के प्रभारियों को लेटर भेजा गया है. वहीं, राकेश टिकैत (Rakesh Tikait) ने कहा है कि किसानों का अहित नहीं होने देंगे. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 2020 और 2023 का किसान आंदोलन हुआ था, जिसके बाद प्रधानमंत्री को 3 कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था.

व्यापार समझौते के विरोध में एसकेएम ने वाणिज्य मंत्री का मांगा था इस्तीफा

भारत ने अमेरिका के साथ व्यापार समझौता किया है. किसान संगठनों और किसान नेताओं का कहना है कि इससे कृषि और किसानों को नुकसान होगा. 7 फरवरी को संयुक्त किसान मोर्चा ने बयान में कहा था अमेरिका-भारत व्यापार पर अंतरिम समझौते का फ्रेमवर्क अमेरिकी कृषि क्षेत्र की मल्टीनेशनल कंपनियों के सामने पूरी तरह से आत्मसमर्पण है. खासकर जॉइंट स्टेटमेंट में सूखे डिस्टिलर ग्रेन (DDGs), जानवरों के चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स, और अतिरिक्त प्रोडक्ट्स को शामिल करने का हवाला देते हुए संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) नेताओं ने कहा कि जानवरों के चारे के बाजार पर नियंत्रण पूरी तरह से अमेरिकी कंपनियों का एकाधिकार हो जाएगा. भारतीय किसानों को भारी नुकसान होगा. किसान नेताओं ने वाणिज्य मंत्री का इस्तीफा मांगा था और देशभर प्रदर्शन की चेतावनी दी थी.

वाणिज्य मंत्री ने संयुक्त किसान मोर्चा को छोटा गुट कहा था

अमेरिका के साथ डील पर किसानों को नुकसान होने पर संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के आह्वान पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने एएनआई से कहा कि मुझे लगता है कि यह एक बहुत छोटा गुट है और यह एक अलग हुआ गुट है, जिसने यह आह्वान किया है. पीयूष गोयल ने कहा कि देश के ज्यादातर किसान समझते हैं कि यह उनके लिए अच्छा है. हमारे सभी कृषि उत्पादों पर अब हमारे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में कम पारस्परिक टैरिफ लगेगा.

अब 12 फरवरी को देशव्यापी आंदोलन का ऐलान, राज्य प्रभारियों को लेटर जारी

संयुक्त किसान मोर्चा ने अब आज 9 फरवरी को देशव्यापी विरोध प्रदर्शन का ऐलान कर दिया है. भारतीय किसान यूनियन ने लेटर जारी करते हुए अपने प्रदेश अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों से कहा है कि भारत-अमेरिका के मध्य हुए कृषि व्यापार समझौते को लेकर संयुक्त किसान मोर्चे के आह्वान पर 12 फरवरी 2026 को सभी प्रदेशों के जिला मुख्यालयों पर धरना-प्रदर्शन किया जाएगा और अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा जाएगा. इसके साथ ही इसके बाद दोपहर में भारतीय किसान यूनियन की सभी प्रदेशों की ग्राम इकाई इसी विषय को लेकर ‘हमारा खेत-हमारा अधिकार’ के तहत अपने खेतों पर भारत-अमेरिका कृषि व्यापार समझौता की प्रतियां जलाएंगे.

एसकेएम के विरोध प्रदर्शन को लेकर भाकियू ने जारी की चिट्ठी.

राकेश टिकैत बोले- किसानों का नुकसान हम नहीं होने देंगे

एसकेएम के नेता और भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि देश की 70 फीसदी आबादी पर यह सरकार का अब तक का सबसे बड़ा प्रहार है. भारत-अमेरिका के बीच एग्रीकल्चर ट्रेड डील लगभग अब हो चुकी है. लेकिन इसके दूरगामी परिणामों को लेकर भारतीय किसानों की चिंताएं और गहरी हो गई हैं. अमेरिकी कृषि को भारी सरकारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारत का किसान लागत, कर्ज और अनिश्चित बाजार से पहले ही जूझ रहा है. अब सस्ते अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत आएंगे तो देशी फसलों के दाम गिरेंगे, MSP कमजोर होगी और सबसे बड़ा नुकसान छोटे व सीमांत किसानों को होगा. यह डील आयात निर्भरता, कॉरपोरेट नियंत्रण और किसान की सौदेबाजी शक्ति को कमजोर करने की दिशा में कदम है. इससे न केवल किसानों की आमदनी प्रभावित होगी, बल्कि खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी खतरा बढ़ेगा. राकेश टिकैत ने कहा कि किसान विकास के विरोधी नहीं हैं. लेकिन किसानों की सहमति और संरक्षण के बिना किया गया कोई भी समझौता किसान हित में नहीं हो सकता.

Published: 9 Feb, 2026 | 02:18 PM

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