Farmers Unions Reaction On Budget 2026: केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश कर दिया है और कई सेक्टर के विकास के लिए कई बड़े ऐलान किए गए हैं. हालांकि, कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र के लिए की गईं घोषणाएं किसानों को नाकाफी लगती हैं. किसान नेताओं और समाजसेवियों ने बजट को किसानों के साथ धोखा करने वाला बताया है. भाकियू अराजनैतिक, भाकियू मान, किसान महापंचायत, भाकियू टिकैत और समाजसेवियों ने कहा कि नारियल-काजू पर सरकार का ध्यान है क्योंकि जहां इनकी खेती की जाती है (दक्षिण भारत) वहां विधानसभा चुनाव आने वाले हैं. जबकि, उत्तर भारत जहां धान गेहूं की खेती होती है वहां के लिए कोई सुध नहीं ली गई है. बजट में दलहन-तिलहन पर कोई घोषणा नहीं होने पर भी किसान नेताओं ने नाराजगी जताई है.
बजट में खेती-किसानी के लिए कोई प्रावधान नहीं – गुणी प्रकाश
भारतीय किसान यूनियन मान गुट के हरियाणा प्रदेश अध्यक्ष गुणी प्रकाश ने कहा कि बजट में खेती किसानों के लिए कोई प्रावधान नहीं किया गया है. उन्होंने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने की बात जरूर की गई है. उन्होंने किसानों के लिए गांवों-कस्बों में फूड प्रोसिसिंग यूनिट के लिए कोई बात नहीं की गई है. उन्होंने कहा कि किसानों की कमाई बढ़ाने के लिए सरकार की क्या योजना है, इस पर कोई प्रावधान नहीं किया गया है.
किसान नेता गुणी प्रकाश ने पीएम किसान सम्मान निधि पर उन्होंने कहा कि राशि में बढ़ोत्तरी नहीं की गई है, जो सीधे-सीधे किसानों को फायदा देने वाली योजना है. लेकिन, लाभकारी योजना के लिए कोई ऐलान नहीं किया जाना, किसानों के साथ धोखा करना है. उन्होंने निराशा जताते हुए कहा कि कृषि लिए बजट में कोई ऐलान नहीं किए हैं. वहीं, किसानों की आत्महत्या रोकने के लिए फसलों के दाम, बाजार की व्यवस्था पर भी कोई प्रावधान नहीं किए जाने पर किसान नेता ने नाराजगी जताई.
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गेहूं-धान पर कोई बात नहीं हुई, मिशन भी ऐसे ही छोड़े गए – धर्मेंद्र मलिक
भारतीय किसान यूनियन अराजनैतिक के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि बजट में किसानों को अनदेखा किया गया है. कृषि क्षेत्र को छुआ तक नहीं गया है. उन्होंने कहा कि गेहूं, धान पर कोई बात नहीं की गई है. पिछले बजट में दलहन मिशन, तिलहन मिशन का जोर था, लेकिन इस बजट में इन मिशन को ऐसे ही छोड़ दिया गया है.
धर्मेंद्र मलिक ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में सिंचाई सुविधाओं की जरूरत है. उसमें कहा गया कि मिट्टी में गोबर की मिलावट में असंतुलन है, यानी जैविक खाद कम है. लेकिन, जिस तरह से बजट पेश किया गया है उसमें आर्थिक सर्वेक्षण की चिंताओं को नकार दिया गया है. उन्होंने बजट पर असंतोष जताते हुए कहा कि पहले तो किसानों की उपेक्षा की जाती थी अब तो किसानों की अनदेखी की जा रही है.
कृषि विकास पर रोडमैप नहीं दिए जाने पर भड़के किसान नेता राजेश धाकड़
किसान महापंचायत के मध्य प्रदेश अध्यक्ष राजेश धाकड़ ने केंद्रीय बजट में किसानों की अनदेखी करने की बात कही है. उन्होंने कहा कि कृषि के विकास, विस्तार के लिए कोई रोडमैप नहीं दिया गया है. किसान नेता ने कहा कि नारियल किसानों, काजू के लिए जो भी ऐलान किया गया है, उसमें उत्तर भारत के किसानों का कोई फायदा नहीं होने वाला है. उन्होंने कहा कि दक्षिण के राज्यों में आगामी विधानसभा चुनाव होने हैं, इसीलिए वहां के नारियल किसानों को फुसलाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि किसानों से वादे किए जाते हैं, लेकिन जब पूरा करने की बारी आती है तो उन्हें झुनझुना पकड़ा दिया जाता है.
बजट किसान-मजदूर और ग्रामीण भारत की अपेक्षाओं पर खरा नहीं – राकेश टिकैत
भारतीय किसान यूनियर के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत ने कहा कि आज प्रस्तुत केंद्रीय बजट 2026–27 देश के किसान, मजदूर, आदिवासी समाज और ग्रामीण भारत की मूल समस्याओं का समाधान करने में असफल रहा है. बढ़ती महंगाई, खेती की लागत में लगातार इजाफा, कर्ज के बोझ और गिरती आय से जूझ रहे किसानों के लिए बजट में न तो कर्जमाफी पर कोई ठोस पहल की गई और न ही न्यूनतम समर्थन मूल्य को कानूनी गारंटी देने का प्रावधान किया गया. यह बजट जमीनी सच्चाइयों से दूर है. देश के अन्नदाता और मेहनतकश वर्ग की अपेक्षाओं की अनदेखी की गई है. सरकार को चाहिए कि वह किसान, मजदूर, आदिवासी और ग्रामीण भारत को केंद्र में रखकर अपनी नीतियों और बजटीय प्रावधानों पर पुनर्विचार करे.
किसान का जिक्र भी नहीं, अगर है तो ‘बेचारों’ की कतार में – योगेंद्र यादव
सामाजिक चिंतक योगेंद्र यादव ने बजट 2026–27 पर कहा कि यह बजट किसान को एक साफ संदेश देता है- अब न दिल में जगह है, न ज़ुबान पर नाम.
उन्होंने कहा कि किसान का जिक्र भी अगर है तो ‘बेचारों’ की कतार में. आंकड़े गवाही देते हैं कि कृषि, ग्रामीण विकास, फसल बीमा, खाद, सबमें कटौती की गई है. दलहन, तिलहन मिशनों पर उन्होंने कहा कि कोई बात नहीं की गई है शून्य खर्च है. उन्होंने कहा कि सरकार कहती है बादाम-अखरोट लगाइए, नहीं कर सकते तो आपकी कोई जरूरत नहीं.