कर्जमाफी की घोषणा के बाद भी आंदोलन पर क्यों आमादा हैं किसान? अब भूख हड़ताल का ऐलान 

Tamil Nadu Farmers Protest: संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े और तमिलनाडु के बड़े किसान नेता पीआर पांडियन ने कहा कि शुरुआती घोषणा में माफी की सीमा को अब घटाया जा रहा है. अधिकारी मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं और उन्होंने सीएम को गुमराह करने का आरोप भी अधिकारियों पर लगाया है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Updated On: 19 Jun, 2026 | 01:21 PM

तमिलनाडु सरकार की ओर से किसानों की कर्जमाफी का ऐलान करने के बाद भी किसान संगठनों ने राज्यव्यापी भूख हड़ताल की घोषणा की है. किसान नेता पीआर पांडियन ने ऐलान किया है कि भूख हड़ताल में राज्य के सभी 38 जिलों के किसान हिस्सा लेंगे. किसानों के लामबंद होने से मुख्यमंत्री विजय जोसेफ सरकार की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं. तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन ने नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि उनके हकों की अनदेखी की जा रही है और किए गए वादे पूरे नहीं किए गए हैं.

लोन माफी पर अधिकारी सीएम को गुमराह कर रहे

तमिलनाडु ऑल फार्मर्स एसोसिएशन ने 30 जून को राज्यव्यापी भूख हड़ताल की घोषणा की है. संगठन ने आरोप लगाया कि नौकरशाहों ने फसल ऋण माफी के मुद्दे पर मुख्यमंत्री सी जोसेफ विजय को गुमराह किया है. यह हड़ताल जमीन के रकबे (क्षेत्रफल) के आधार पर पूरी तरह से ऋण माफी और धान की खरीद कीमत 3,500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग के लिए की जा रही है.

मनमाने तरीके से नियमों में बदलाव किया

एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने कहा कि विजय के नेतृत्व वाली सत्ताधारी TVK सरकार ने अपने चुनावी घोषणापत्र में छोटे और सीमांत किसानों के लिए 100 फीसदी ऋण माफी और बड़े किसानों के लिए 50 फीसदी माफी का वादा किया था. आरोप लगाया कि सरकार ने बाद में जो नियम लागू किए, उनमें जमीन के आकार के बजाय पैसे की सीमा (मॉनेटरी कैप) को आधार बनाया गया, जिससे किसान समुदाय में भारी असंतोष फैल गया है.

तमिलनाडु में एसकेएम लीडर पांडियन ने खोला मोर्चा

संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े और तमिलनाडु के बड़े किसान नेता पीआर पांडियन ने मीडिया से कहा कि शुरुआती घोषणा में माफी की सीमा 50,000 रुपये तय की गई थी. बाद में विरोध प्रदर्शनों के बाद इसे बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया, जबकि बड़े किसानों के लिए माफी की मामूली राशि 35,000 रुपये रखी गई. एसोसिएशन का तर्क है कि राशि आधारित यह गणना केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक और नाबार्ड (NABARD) की स्थापित नीतियों का सीधा उल्लंघन है. मौजूदा राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के अनुसार माफी का निर्धारण जमीन के रकबे के आधार पर होना चाहिए. सीमांत किसानों के लिए 2.5 एकड़ तक और छोटे किसानों के लिए 5 एकड़ तक.

धान खरीद कीमतों और मिलिंग दिक्कतें बढ़ीं

धान की खरीद में आ रही गंभीर बाधाओं पर चिंता जताते हुए किसानों ने आरोप लगाया कि पिछले नौ महीनों में पिछले कुरुवई और सांबा सीजन में खरीदा गया धान खुले यार्ड और खरीद केंद्रों पर बिना पिसाई के पड़ा हुआ है. मिल मालिकों ने पुराने और रंग बदले हुए अनाज की प्रोसेसिंग करने से इनकार कर दिया है और ट्रांसपोर्ट लॉजिस्टिक्स की भी लगातार कमी बनी हुई है. ऐसे में एसोसिएशन ने मॉनसून के करीब आने के साथ ही आने वाले संकट की चेतावनी दी है.

खाद महंगाई और आपूर्ति संकट से नाराज किसान

किसानों ने पिछली DMK सरकार की ओर से लाए गए तमिलनाडु भूमि समेकन अधिनियम 2023 को तुरंत रद्द करने की मांग की है. उनका आरोप है कि इसी कानून की वजह से बड़े पैमाने पर कॉरपोरेट के लोग जमीन का अधिग्रहण हुआ है और कर रहे हैं. उन्होंने खाद की आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने और निजी वितरकों द्वारा यूरिया और DAP की बिक्री के साथ अन्य उत्पादों को अनिवार्य रूप से जोड़ने की प्रथा को रोकने के लिए केंद्र सरकार के साथ राज्य सरकार के हस्तक्षेप की मांग की है.

30 जून के आंदोलन का हिस्सा बनेंगे 38 जिलों के किसान

किसान नेता पीआर पांडियन ने आरोप लगाया कि अधिकारी जानबूझकर सरकार को इन राष्ट्रीय मानदंडों के अनुसार पूरी तरह से ऋण माफी लागू करने से रोक रहे हैं. उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के किसान 30 जून को भूख हड़ताल करेंगे और TVK के चुनावी घोषणापत्र में किए गए वादों के मुताबिक फसल ऋण माफी की मांग करेंगे. उन्होंने कहा कि 30 जून को होने वाली भूख हड़ताल में सभी 38 जिलों के किसान हिस्सा लेंगे.

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Published: 19 Jun, 2026 | 01:14 PM

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